जेल गया तो खुद को फिर से पहचानना – राजपाल यादव

बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में उन्हें तीन महीने की जेल हुई थी वे इस साल फरवरी के अंत में तिहाड़ जेल से बाहर आए इस फेज के बारे में घमासान डॉट कॉम से बातचीत की।

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मुंबई : (ऋचा मिश्रा तिवारी) बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में उन्हें तीन महीने की जेल हुई थी। वे इस साल फरवरी के अंत में तिहाड़ जेल से बाहर आए। इस फेज के बारे में घमासान डॉट कॉम से बातचीत की। राजपाल यादव का कहना है कि जेल मे रहने के दौरान खुद को फिर से पहचानने और जिंदगी को नए सिरे से देखने का मौका दिया है।

जेल का अनुभव कैसा रहा?
देश के सिस्टम की बहुत इज्जत करता हूं। सिस्टम ने मुझे जहां भी खड़ा किया, वहां पूरे अनुशासन से खड़े रहने की कोशिश की। मैं कानून के बाहर नहीं हूं। जेल में जो भी आदेश मिला, सबको फॉलो किया।

जेल से क्या सीख मिली
मुझे खुद को पहचानने का मौका मिला। जैसे किसान अपने खेत में पैदा हुए गेहूं को खाने और बेचने के अलावा बीज के लिए भी बचाकर रखता है। मुझे लगता है कि जेल जाने के बाद मुझे भगवान ने बीज बनने वाले गेहूं सा मौका दिया है।

जिन कैदियों को आपने सिखाया, क्या उनमें से किसी को कोई रोल मिला?
कोई किसी को रोल नहीं दिलवा सकता। मैं किसी को सिखा सकता हूं, पर एक्टर नहीं बना सकता हूं। मेरे वश में एक्टर बनाना होता, तब सबसे पहले मेरे सारे भाई सुपर स्टार होते।

संजय दत्त को जेल में फर्नीचर बनाने का काम मिला था, आपको वैसा क्या काम मिला?
मैं वहां इम्प्रूवमेंट डिग्री के तहत गया था। उसमें काम करने के लिए नहीं था। फिर भी मैं मेरे लायक सभी काम करता था। सांस्कृतिक, नाटक संबंधी वर्कशॉप करवाता था। वहां जिन कैदियों के साथ पाठशाला ली, उनका कहना था कि राजपाल भैया अगर आप जैसा समझाने वाला बंदा साथ हो, तब कोई समस्या ही नहीं आ सकती।

rajpal yadav

कोई ऐसा दोस्त बना जिनसे दोबारा जाकर मिलना हुआ हो?
नहीं मिल पाया, क्योंकि लगातार बिजी हूं। अगर मौका मिला, तब जेल में वर्कशॉप करने जरूर जाऊंगा। वहां पर कई लोग हैं, जिनसे मिलने भी जाना चाहूंगा। एक सिपाही हैं, जिनसे बहुत प्रभावित हूं।

क्या वहां खाने लायक भोजन नहीं मिलता?
जो ऐसा बोलते हैं, उन्हें वहां पर एक बार दौरा करना चाहिए। फिर पता चलेगा कि वहां, खान-पान, व्यवहार और संस्कार किस तरह का होता है। वहां नियमों के तहत सबको हेल्दी खाना दिया जाता है।

जेल की कोई ऐसी बात जिसे जानकर आश्चर्य हुआ हो?
वहां पर इंग्लिश, हिंदी पढ़ाई जाती है। सबको लाइब्रेरी दी जाती है। 26 जनवरी और 15 अगस्त को प्रॉपर मोटिवेट किया जाता है। सबको गानों के जरिए मोटिवेट किया जाता है। सभी कैदी भाइयों को बिना किसी भेदभाव पार्टिसिपेट कराने का आदेश होता है। मैं दिसंबर से लेकर फरवरी तक वहां था, सो गणतंत्र दिवस का माहौल देखा। उस दिन तो सबके अंदर पॉजिटिव एनर्जी देखने को मिली, जो बहुत अच्छा लगा। सभी कैदी भाइयों को बिना किसी भेदभाव पार्टिसिपेट कराने का आदेश होता है।

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