राहुल गांधी ने साबित किया की वे अब कांग्रेस में मुखिया की भूमिका में आ गए है

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जब घर के मुखिया को यह पता चल जाए की अब घर टूट रहा है और इसको बचाने के लिए घर के एक-एक पिलर को मजबूत करना जरूरी है। कुछ इस अंदाज में ही कांग्रेस के कप्तान राहुल गांधी ने संगठन को मजबूत करना शुरू कर दिया है। भोपाल मैं जिस तरह से वह कार्यकर्ताओं के लिए बोल रहे थे उसे लग रहा था कि अब कांग्रेस में गुटबाजी बहुत हो गई तेरा मेरा खूब चल गया। लेकिन अब कार्यकर्ता जो कहेगा वही होगा इसलिए मंच पर खड़े नेताओं को राहुल ने समझा दिया कि अब गुटबाजी से काम नहीं चलेगा। हालांकि यह बात भी सही है कि राहुल ने जिस अंदाज में समय पर टिकट बांटने और जीतने वाले कार्यकर्ताओं को ही टिकट मिलने की बात कही है। उससे लगता है कि चुनाव बहुत कुछ गुजरात पैटर्न पर लड़ा जाएगा जब राहुल कार्यकर्ताओं से एकता की बात कर रहे थे।

तब लग रहा था कि सार्वजनिक तौर पर किसी कांग्रेस अध्यक्ष ने पहली बार अपने संगठन की कमियों पर खुलकर बात की कार्यकर्ताओं को लेकर जब यह कहा कि नेता मेरी नजर में तीसरे नंबर पर हैं और उसके पहले कार्यकर्ता हैं पहले नंबर पर उन्होंने किसानों को अपना बताया जिस अंदाज में राहुल बात कर रहे थे, तो लग रहा था कि काफी कुछ कुछ सीखने और समझने में लगे हैं। इसी कारण परंपरागत तरीके से अपने भाषण की शुरुआत  करते हुए सचिन तेंदुलकर का नाम लिया। वह यह बताने की कोशिश करने में कामयाब रहे कि राहुल गांधी पप्पू नहीं है। अब संगठन चलाना भी जानते है बड़े नेताओं को अपना असली चेहरा बताने की भी कोशिश की भोपाल के जिस भेल मैदान में एक लाख से ज्यादा लोग थे। वहां पर सिर्फ कार्यकर्ताओं का ही सम्मेलन बुलाया था।

उस हिसाब से भीड़ भी सम्मानजनक थी वैसे राहुल ने मंच से एकता की बात जरूर की लेकिन वह दिग्विजय सिंह का नाम लेना भूल गए जिससे लगा कि वह भी मध्यप्रदेश में कमलनाथ और ज्योति सिंधिया के भरोसे है। दिग्विजय सिंह को रोड शो के दौरान और उसके बाद कार्यकर्ताओं सम्मेलन में भी महत्व नहीं दिया गया। यह चर्चा अब हर कार्यकर्ताओं के जुबान पर आ गई है। राहुल ने शुरुआत में जब सब नेताओं के नाम लिए तब ही एक बार दिग्विजय सिंह का नाम लिया उसके बाद वह कमलनाथ और सिंधिया के साथ ही रहे मंच पर जो कुर्सियां लगी थी। उनमें भी राहुल के आसपास सिंधिया और कमलनाथ के नाम की तख्ती थी।दिग्विजय सिंह कमलनाथ के पास बैठे थे।

जब राहुल गांधी आखिरी में जा रहे थे तब जरूर दिग्विजय सिंह ने उन्हें कुछ कहा राहुल ने उनकी बात पर गौर किया और कुछ जवाब भी दिया। मध्यप्रदेश में गुजरात और कर्नाटक की जो टीम सर्वे कर रही है उसी सर्वे पर राहुल को भरोसा है। राहुल ने कल एक नया अंदाज और दिखाया मंच के सामने फैशन शो की तरह रैंप बना हुआ था। उस पर राहुल जा रहे थे और कार्यकर्ताओं के सवाल के जवाब दे रहे थे। रैम्प के आस पास खड़े कार्यकर्ताओं से उन्होंने हाथ भी मिलाएं उन्होंने कार्यकर्ताओं के पास आने की कोशिश दिखाई जिस अंदाज में राहुल थे। वह अंदाज कांगरेस के लिए जड़ी-बूटी का काम करेगा क्योंकि 15 साल से मध्य प्रदेश में आम कार्यकर्ता अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है कि उसके हिस्से में कुछ नहीं आया अब जो कार्यकर्ता काम कर रहे थे।

उनको टिकट मिलेंगे तो बात कुछ और होगी यह बात भी सही है कि राहुल ने जो कहा की संघर्ष करने वाले पीटने वाले कार्यकर्ता मेरे लिए सब कुछ है राहुल ने ऐसा इशारा कर दिया कि अब मध्यप्रदेश में किसी एक चेहरे पर नहीं लाखों कार्यकर्ताओं की मेहनत पर चुनाव जीता जाएगा। राहुल इसी तरह से कार्यकर्ताओं से पूरे देश में बात करने निकल पड़े तो सोया हुआ कार्यकर्ता भी जाग जाएगा। सभा के बाद हर कार्यकर्ता की जुबान पर यही शब्द सुनाई दे रहे थे की अब हमारी इज्जत होगी मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को सर्वे के आधार पर टिकट मिलेगा, तो फिर हम क्यों नहीं काम करेंगे कल के इस जलसे से देश की कांग्रेस में एक नई ताकत आई है। अब जब टिकट की बात आएगी तब पता चलेगा कि राहुल की बातों में कितना दम था कार्यकर्ताओं के सवालों के जवाब देने की योजना के कारण शोभा ओझा की भी दुकान चल पड़ी, शोभा ने माइक हाथ में लिया और सवाल पढ़ना शुरू किया जो राहुल ने सीधे उनका नाम लिया कि शोभा इधर आ जाओ।

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