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Part 2- पकड़ा गया वो चोर है जो बच गया वो सयाना है…..

दुनिया का कोई और देश होता तो वहां के सबसे बड़े बैंक के पूर्व चेयरमैन के धोखाधड़ी के केस में गिरफ्तार होने पर भूचाल आ गया होता !.....

दुनिया का कोई और देश होता तो वहां के सबसे बड़े बैंक के पूर्व चेयरमैन के धोखाधड़ी के केस में गिरफ्तार होने पर भूचाल आ गया होता !….. अखबारों के फ्रंट पेज पर बड़े बड़े फॉन्ट में हेडलाइन छपती ओर मीडिया पूरे केस को लेकर प्राइम टाइम की बहस चला रहा होता लेकिन यह भारत देश है यहाँ किसी को कोई फर्क नही पड़ता बड़े लोगो के लिए सौ दो सौ करोड़ का भ्रष्टाचार तो अब शिष्टाचार बन गया है,

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के पूर्व चेयरमैन प्रतीप चौधरी की गिरफ्तारी पर देश के तमाम बैंकों के आला अधिकारी ऊपर से कुछ जाहिर नही कर रहे है लेकिन अंदर से सब हिल गए हैं, कल के बिजनेस स्टेंडर्ड की खबर है कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) मामले को जल्द ही वित्त मंत्रालय और राजस्थान सरकार सामने लेकर जाने वाली है ……आईबीए के मुख्य कार्याधिकारी सुनील मेहता कह रहे है कि संपत्तियों को पट्टे पर देना और बिक्री करना वित्तीय निर्णय होता है। यह निर्णय जांच-परख के सख्त नियमों का पालन करते हुए लिया जाता है। इस तरह की गिरफ्तारी गंभीर मामला है और एसोसिएशन इस मामले को वित्तीय सेवाओं के विभाग तथा राजस्थान सरकार के समक्ष उठाएगा।

बैंकों के आला अधिकारी इसलिए घबरा रहे हैं क्योंकि उन्होंने भी उसी तरह के बहुत से घोटाले किये हैं जैसे प्रतीप चौधरी कर चुके हैं ………यदि जोधपुर अदालत का यह फैसला एक नजीर की तरह से देखा गया तो भारतीय जेलो में बैंकों के पूर्व चेयरमैन की लम्बी लाइन लगने वाली है क्योंकि आप जब इस केस की डिटेल पढ़ेंगे तो पाएंगे कि ऐसे कई किस्से आपके आसपास भी चल रहे हैं……..

जैसलमेर का सबसे मशहूर होटल है फोर्ट राजबाड़ा, 6 एकड़ में फैला हुआ एक किला जिसे हेरिटेज प्रोपेर्टी की शक़्ल दी गयी है, आज भी यदि विदेशी सैलानी यदि जैसलमेर की सैर करने आते हैं तो फोर्ट राजबाड़ा उनकी पहली पसंद रहता है इस होटल के मालिक स्व. दिलीप सिंह राठौड़ ने साल 2008 में खुहडी रोड पर एक और होटल गढ़ रजवाड़ा के नाम से बनाने का प्लान किया। ओर इसके लिए SBI जोधपुर से साल 2008 मे 24 करोड़ का टर्म लोन लिया। होटल का निर्माण शुरू हुआ। 2010 में दिलीप सिंह राठौड़ ने 6 करोड़ का लोन और मांगा, लेकिन एसबीआई ने इस बार उन्हें लोन नहीं दिया। इसी बीच 2010 में होटल मालिक दिलीप सिंह की हार्ट अटैक से मौत हो गई।

उनके पुत्र इस विषय मे अधिक जानते नही थे, मौत के 2 महीने बाद ही एसबीआई ने आरबीआई के नियमों से परे जाकर लोन को एनपीए यानी नॉन परफॉर्मिंग एसेट घोषित कर दिया। ओर दोनों होटल का वैल्युएशन कराया। लोन का पैसा भरने के लिए दिलीप सिंह के पुत्र हरेन्द्र सिंह राठौड़ पर दबाव बनाया।

इस बीच आतिशय कंसल्टेंसी के मालिक देवेंद्र जैन ने होटल मालिक के बेटे को लोन सेटेलमेंट के लिए एप्रोच किया। उस दौरान एसबीआई के चेयरमैन प्रतीप चौधरी थे।

देवेंद्र जैन ने दिलीप सिंह के बेटे हरेन्द्र सिंह को एक ऐसे व्यक्ति से मिलवाया जो दिवाला प्रक्रिया को लेकर देश के जाने माने वकील माने जाते हैं साथ ही चेयरमैन प्रतीप चौधरी के मित्र भी थे, उनके खिलाफ भी जोधपुर कोर्ट ने गिरफ्तारी के आदेश जारी किए हैं उनका नाम है आलोक धीर जो अलकेमिस्ट असेट्स रिकन्स्ट्रकशन कंपनी लिमिटेड के मालिक भी थे. अब ऐसी कम्पनियो का काम यह होता है कि जिन जो ऋणदाता लोन नही चुका पा रहे हैं उनका लोन सेटेलमेंट करवाना लेकिन यहाँ तो वकील साहब ही असेट्स रिकन्स्ट्रकशन कंपनी खोलकर बैठ गए थे।

होटल मालिक हरेन्द्र सिंह की आलोक धीर की बात नहीं बन पाई इधर प्रतीप चौधरी एसबीआई के डायरेक्टर पद से 30 सितंबर 2013 को रिटायर हुए लेकिन वो पूरा खेल सेट कर चुके थे 14 अक्टूबर 2013 को एसबीआई ने होटल मालिक को करीब 40 करोड़ की देनदारी बताते हुए नोटिस जारी कर दिया, होटल मालिक डीआरटी कोर्ट जयपुर गए। उस दौरान एसबीआई ने रिकवरी के लिए दोनों होटल का एसेट आलोक धीर को दे दिया। एसबीआई ने बिना नीलामी किए अंदर ही अंदर आलोक धीर को दोनों होटल सौंप दिए। धीर साहब ने दोनों होटल पर कब्जा कर लिया।

प्रतीप चौधरी रिटायरमेंट के अगले साल 2014 में बिचौलिये आलोक धीर की अलकेमिस्ट असेट्स रिकन्स्ट्रकशन कंपनी के डायरेक्टर बन गए।

अब होटल मालिक हरेंद्र सिंह को पूरा खेल समझ आया उन्होंने जैसलमेर सदर थाने में 2015 में धोखाधड़ी की एफ़आईआर दर्ज करवाकर इस मामले में एसएबीआई के तत्कालीन चेयरमैन समेत कुल 8 लोगों पर मामला दर्ज करवाया।

यही केस है जिसमे जोधपुर सीजेएम कोर्ट ने डिसीजन देते हुए कहा है कि इस तरह से बिना नीलामी के होटल बेचने के मामले में धोखाधड़ी हुई है। जो साफ दिख भी रही है गिरफ्तारी की सूची में देश के जाने माने वकील आलोक धीर भी शामिल हैं लेकिन अभी वह पुलिस की गिरफ्त से दूर है।

यह है पूरा मामला !…..लेकिन यदि आप इस डिसीजन के बाद किसी परिवर्तन की उम्मीद कर रहे हैं तो भूल जाइए !……हमें देश के भ्रष्ट सिस्टम पर पूरा विश्वास है पूरा मामला कुछ ही दिन बाद अगले हायर कोर्ट में पलट जाएगा और सारे आरोपी बेदाग बरी हो जाएंगे ओर कुछ साल बाद वकील साहब ओर डायरेक्टर साहब की जोड़ी नए शिकार करती पाए जाएगी……. और आप लोग भी मस्त रहिए दिन-रात हिन्दू मुस्लिम बाइनरी में उलझ कर भाजपा के हाथ मजबूत कीजिए…

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