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वोटिंग के प्रतिशत ने सियासतदारों को उलझन में डाला | Opinion Polls Survey New Debate in the Country…

Posted on: 21 May 2019 12:00 by Surbhi Bhawsar
वोटिंग के प्रतिशत ने सियासतदारों को उलझन में डाला | Opinion Polls Survey New Debate in the Country…

इंदौर, प्रदीप जोशी। आम चुनाव का फैसला 23 मई को हो ही जाएगा पर देशभर की सर्वे एजेंसी और मीडिया समूह द्वारा किए गए ओपिनियन पोल ने देश में नई बहस को जन्म दे दिया है। ये सर्वे कितने सटीक हैं और हकीकत के कितने करीब निकलेंगे, इसका खुलासा भी मतगणना के बाद हो जाएगा। बहरहाल, देशभर में चुनिंदा लोगों से रायशुमारी कर निकाले गए सर्वे और मतदान के प्रतिशत से कुछ और कहानी भी निकलकर सामने आ रही है।

बात इंदौर की करें तो यहां शहरी क्षेत्र से ज्यादा वोट ग्रामीण क्षेत्र में गिरे हैं, वहीं पिछले चुनाव के मुकाबले जितने मतदाता बढ़े, उससे दोगुना वोटिंग ज्यादा हुई है। यानी पिछले चुनाव के मुकाबले मतदान अधिक हुआ, जबकि पिछले चुनाव की तरह न तो कोई लहर थी और न कोई बड़ा मुद्दा। ऐसे में एक असमंजस का वातावरण सियासी दलों के बीच बन गया है। इसी बढ़े हुए प्रतिशत को नेता अपने-अपने पक्ष में होने का दावा भी कर रहे हैं। एक्जिट पोल के बाद मतदाताओं में भी यही बहस है कि नौवीं बार भी भाजपा इंदौर में अपना परचम फहराएगी। उधर, कांग्रेस बढ़े हुए मतदान को भाजपा के खिलाफ जनता का आक्रोश बता रही है।

सांवेर में सबसे ज्यादा, 3 नंबर में सबसे कम

वैसे तो जिले में इस चुनाव में 16 लाख 28 हजार के करीब वोट डाले गए हैं जो पिछले चुनाव के मुकाबले करीब 3 लाख 12 हजार ज्यादा हैं। यानी प्रतिशत की बात करें तो कुल 7.31 प्रतिशत वोटिंग ज्यादा हुई। गौरतलब है कि जिले में नए मतदाता इस चुनाव में करीब 1 लाख अधिक थे जिनमें पहली बार वोट करने वालों की तादाद 66 हजार के करीब थी। सारी बहस अब मतदान के इसी प्रतिशत और विधानसभा वार हुई वोटिंग पर चल रही है। शहरी क्षेत्र में मतदान का प्रतिशत बढ़ा तो है पर उस अनुपात में नहीं, जितना ग्रामीण क्षेत्र में बढ़ा है।

क्या गढ़ में भाजपा कमजोर रही

शहरी क्षेत्र में वोट प्रतिशत ग्रामीण इलाकों के मुकाबले 3 से 8 फीसदी तक कम रहा है। लोकसभा चुनाव की बात करे तो शहरी क्षेत्र में भाजपा को विधानसभा 2, 3, 4 और राऊ विधानसभा के शहरी वार्डों पर ज्यादा भरोसा रहता है, वहीं कांग्रेस को विधानसभा क्षेत्र 1 और 5 में अपने पक्ष में मतदान की उम्मीद लगी रहती है। इस बार भाजपा के भरोसे वाले क्षेत्र क्रमांक 2 में महज 3 प्रतिशत ही वोट बढ़ा। जबकि क्षेत्र 3 में 7 प्रतिशत और क्षेत्र 4 में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उधर कांग्रेस को विधानसभा 1 में हुई 8 प्रतिशत और 5 नंबर में 6 प्रतिशत की वोट वृद्धि चमत्कार होने का संकेत दे रही है।

किसानों का आक्रोश कांग्रेस के खिलाफ

भाजपा शहर अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा ने मत प्रतिशत बढ़ने का कारण मोदी लहर को बताया। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में वोट के अंतर को उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ आक्रोश करार दिया। नेमा ने कहा कर्ज माफी के मामले में प्रदेश की कांग्रेस सरकार एक्सपोज हो चुकी है। ग्रामीणों ने अपने गुस्से का इजहार वोट के जरिए किया। वोट प्रतिशत इसीलिए शहर से ज्यादा ग्रामीण इलाकों में हुआ है। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार वैसी लहर नहीं होने के सवाल पर नेमा ने अंडर करंट होने का दावा किया।

प्रदेश सरकार के पक्ष में खुलकर आए ग्रामीण

प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने मत प्रतिशत के बढ़े हुए आंकड़ों को अपने पक्ष में होने का दावा किया। सलूजा ने कहा कि महज 76 दिन में ही प्रदेश सरकार ने जनता का दिल जीतने का काम किया है। कर्ज माफी सहित तमाम योजना ने जनता के बीच विश्वास का माहौल पैदा किया। ग्रामीण क्षेत्र में बिना लहर के रिकॉर्ड वोटिंग होना जनता की भाजपा के प्रति नाराजी और कांग्रेस के प्रति रुझान को दर्शा रहा है।

दो चुनाव का मत प्रतिशत क्षेत्र

          2014     2019

देपालपुर 68.02 76.88
क्षेत्र 1 58.66 66.67
क्षेत्र 2 60.23 63.15
क्षेत्र 3 60.05 67.38
क्षेत्र 4 63.87 69.19
क्षेत्र 5 60.79 66.21
राऊ 62.41 70.54
सांवेर 67.12 78.07

कुल 62.25 69.56

पुरुष मतदाता – 13, 21,779
महिला मतदाता -12,48,463
कुल – 25 लाख 70 हजार 450

इस चुनाव में मतदान

पुरुष मतदाता – 9,76,731
महिला मतदाता – 8,38,360
कुल मतदान 18,15,145

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