मनमोहन सरकार में ही चंद्रयान-2 होना था लॉन्च, इस वजह से हुई देरी

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नई दिल्ली : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपना सबसे महत्वपूर्ण मिशन चन्द्रयान-2 आज लाॅन्च कर दिया है। भले ही इस यान की लाॅन्चिंग मोदी सरकार के कार्यालय में हुई हो लेकिन इस मिशन की रूपरेखा मनमोहन सरकार में ही बन चुकी थी। पहले चन्द्रयान-2 को लाॅन्च किया जाना था लेकिन उस दौरान ये लाॅन्च नहीं हो पाया था। जिसके चलते इस मिशन में देरी हुई थी।

10 साल पहले लाॅन्च हुआ पहला चन्द्रयान-

बता दे कि पहला चन्द्रयान 10 साल पहले ही लाॅन्च कर दिया गया था। जिसके बाद चन्द्रयान-2 के लिए रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रॉसकॉसमॉस ने नवंबर 2007 में इस प्रोजेक्ट में जुड़ने और इसके लिए लैंडर बनाकर देने की बात कही थी। जिसे बाद 2008 में सरकार की ओर ये इसरो को इस मिशन के लिए अनुमति मिली और 2009 में इसकी डिजाइन तैयार कर ली गई।

वर्ष 2012 में लाॅन्चिंग तय की गई लेकिन कुछ कारणों के चलते इसे टाल दिया गया। इसके बाद जनवरी 2013 में लॉन्चिंग फिर तय की गई, लेकिन रॉसकॉसमॉस लैंडर नहीं दे पाई और लाॅन्चिंग 2016 तक टल गई। हांलाकि रूसी एजेंसी ने 2015 में इस प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए।

इसरो ने खुद बनाया स्वदेशी लैंडर, रोवर

इसके बाद इसरो ने खुद का स्वदेशी लैंडर, रोवर विकसित किया और लाॅन्चिंग मार्च 2018 तक की गई। लेकिन कुछ टेस्ट के लिए लॉन्चिंग अप्रैल 2018 और फिर अक्टूबर 2018 तक टाल दी गई। वहीं इसरो ने जून 2018 में फैसला किया कि कुछ जरूरी बदलाव करके चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग जनवरी 2019 तय की गई। फिर तारिख आगे बढ़ाकर फरवरी 2019 की गई। अप्रैल 2019 में भी लॉन्चिंग की बात सामने आई थी पर हुई नहीं। जिसके बाद मिशन 15 जुलाई को लाॅन्चिंग किया जाना था लेकिन तकनीकि कारणों से नही हो पाया। जिसके बाद आज इस मिशन की सफल लाॅन्चिंग हुई है।

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