हरिद्वार में 2020 से ही कुंभ की तैयारी की जा रही हैं। क्योंकि 14 जनवरी 2021 से कुंभ मेले का आयोजन शुरू हो जाएगा। जैसा कि आप सभी जानते हैं हरिद्वार में मां गंगा के किनारे श्रद्धा से लाखों सिर झुकते हैं। बता दे, आस्था और आध्यात्म का यह विश्व का सबसे बड़ा जमघट है जिसे कुंभ मेले के नाम से जाना जाता है। ज्योतिषों का मानना है कि जब सूर्य और बृहस्पति एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तभी कुंभ मेले का आयोजन होता है। इसके ही आधार पर ये तय किया जाता है कि किस स्थान और तिथि पर कुंभ का आयोजन होगा।

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, नक्षत्र और राशियां ये तय करती है कि चार निश्चित स्थानों में से किस स्थान पर कुंभ का आयोजन होगा। इन चार स्थानों में शामिल है हरिद्वार में गंगा तट, प्रयागराज में गंगा-यमुना-सरस्वती का संगम तट, नासिक में गोदावरी तट और उज्जैन में शिप्रा नदी का तट। बता दे, ये चरों स्थान प्राचीन काल में संस्कृतियों के केंद्र रहे हैं। इस वजह से ही इन पर कुंभ का आयोजन किया जाता है। पंचांग के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व है। इस दिन पौष मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इस दिन श्रवण नक्षत्र रहेगा।

जानें कब है कुंभ का पहला स्नान –

आपको बता दे, कुंभ मेले में इस बार 6 प्रमुख स्नान है। सबसे पहला स्नान मकर संक्रांति वाले दिन है वहीं दूसरा स्नान 11 फरवरी को मौनी अमावस्या की तिथि पर है। इसके बाद 16 फरवरी को बसंत पंचमी के पर्व पर है। और 27 फरवरी को माघ पूर्णिमा की तिथि पर है। पांचवा स्नान 13 अप्रैल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा इस दिन हिन्दी नववर्ष का आरंभ होगा। छठा प्रमुख स्नान 21 अप्रैल को राम नवमी पर होगा।

कुंभ में शाही स्नान का विशेष महत्व है –

पहला शाही स्नान -11 मार्च शिवरात्रि
दूसरा शाही स्नान – 12 अप्रैल सोमवती अमावस्या
तीसरा मुख्य शाही स्नान -14 अप्रैल मेष संक्रांति
चौथा शाही स्नान- 27 अप्रैल बैसाख पूर्णिमा