चंद्रयान-2 को लेकर ISRO का बड़ा खुलासा, इस वजह से विक्रम से टूटा संपर्क

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इसरो का सबसे ख़ास मिशन चंद्रयान 2 को लेकर हाल ही में एक बड़ा खुलासा सामने आया है. विक्रम से इसरो का संपर्क चंद्र सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर नहीं बल्कि 335 मीटर पर टूटा था. इसरो के मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स से जारी तस्वीर से इस बात का खुलासा हुआ है.

सामने आए चंद्रयान 2 के विक्रम लैंडर के एक ग्राफ में देखा जा सकता है कि तीन रेखाओं के बीच में स्थित लाल रेखा पर चल रहा था. लाल रेखा इसरो द्वारा निर्धारित विक्रम का पूर्व निर्धारिक पथ था. लाल रंग की रेखा के ऊपर हरे रंग की रेखा साफ़ दिखाई दे रही थी.

चंद्रमा की सतह से करीब 4.2 किलोमीटर की ऊंचाई पर भी विक्रम लैंडर अपने रस्ते से थोडा भटक गया था, लेकिन जल्दी ही उसे अपने रस्ते भी कर दिया गया था. इसके बाद विर्क्रम चांद की सतह से करीब से  2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचा तो वह अपने रस्ते से भटककर दूसरी और चलने लगा.

जानकारी के मुताबिक, जिस समय विक्रम अपने रस्ते से लग हुआ तब उसकी रफ़्तार करीब 59 मीटर प्रति सेकंड थी. अपने रास्ते से भटकने के बाद भी विक्रम लैंडर सतह से करीब 400 मीटर की उचाई पर था. उस समय भी विक्रम लैंडर की गति करीब 59 मीटर प्रति सेकंड ही थी. इसरो के मुताबिक, विक्रम लैंडर को उस गति से लैंड नहीं करना था. 59 मीटर प्रति सेकंड की गति होने की वजह से विक्रम लैंडर सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर पाया.

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