समान शिक्षा एवं चिकित्सा नीति को लेकर अंतर्राष्ट्रीय सत्यशोधक समाज ने सौंपा ज्ञापन

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इंदौर : सत्यशोधक समाज के संयोजक मान्यवर सुनील सरदार के निर्देशानुसार मध्य प्रदेश संयोजक हुकुमचंद यादव मध्य प्रदेश ओबीसी मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष सदाशिव यादव काका के नेतृत्व में ओबीसी एवं अनुसूचित जाति तथा जनजाति समाज के अध्यक्ष व सामाजिक प्रतिनिधि मंडल ने संभाग आयुक्त इंदौर को महामहिम राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री एवं सांसद को संबोधित करते हुए ज्ञापन दिया सौंपा है।

अंतरराष्ट्रीय सत्यशोधक समाज से जुड़े समाजसेवी और राष्ट्रीय प्रबुद्ध भारत संघ के अध्यक्ष डॉक्टर आरपी कटारे ने बताया कि समान शिक्षा एवं समान चिकित्सा नीति को लेकर भारत सरकार एवं राज्य सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। सत्यशोधक समाज ने यह मांग की है कि महात्मा ज्योतिबा फूले द्वारा देश में निशुल्क व समाज शिक्षा को लेकर बहुत कार्य किया गया था। भारत के संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर ने संविधान के तहत सभी देशवासियों को सामान चिकित्सा देने का कानून बनाया था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में एक रात में नोटबंदी कर सकते हैं तो फिर देश की सबसे बड़ी समस्या समान शिक्षा एवं समान चिकित्सा नीति लागू करने का भी आदेश उन्हें दे देना चाहिए।

संगठन ने आरोप लगाया कि हिंदू परिषद बजरंग दल, भारतीय जनता पार्टी जैसे कट्टर समर्थकों द्वारा देश के गांव शहरों में लाई जाती है कि मुसलमान और ईसाई धर्म परिवर्तन करवाते हैं। बदला लेने के लिए कट्टरपंथी हिंदू संगठनों द्वारा उन पर जानलेवा हमले उनकी हत्या भी कर दी जाती है। इस तरह के आरोप मुस्लिमों ईसाइयों पर अक्सर लगते रहते हैं।

सत्यशोधक समाज व मध्य प्रदेश ओबीसी मोर्चा भारत के प्रधानमंत्री एवं राज्य की मुख्यमंत्री को यह बताना चाहते हैं कि मुस्लिमों द्वारा मस्जिदों में जो आए हुए चंदा आता है उसने उससे मुस्लिम समाज उस राशि को मदरसों में खर्च करते हैं जिससे मुस्लिम बच्चों को शिक्षा की तालीम मिले परिवार पर बच्चों का बोझ ना आए। इसी तरह ईसाइयों के द्वारा आए चंदे की राशि से गरीब साहेब अचो की सेवा कर उनको पढ़ाना व चिकित्सा सेवा में राशि को खर्च किया जाता है।

उसी तरह सिखों के गुरुद्वारे में आए वह दान से देश के सभी गुरुद्वारों में लंगर चलाया जाता है तो क्या हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ देश के व प्रदेश के मंदिरों से होने वाली आय वेतन के पैसों को शिक्षा व चिकित्सा पर खर्च कर सकते हैं जिससे सरकार की भी मदद होगी एवं मंदिरों से होने वाली आय और चंदे से हो रही फिजूलखर्ची पर भी रोक लगेगी।

इस अवसर पर राष्ट्रीय प्रबंध भारत संघ ने मांग की है कि देश में जातिगत जनगणना के आंकड़े जल्द से जल्द जारी किए जाए। इससे यह पता लगेगा कि किस जाति को कितनी प्रतिशत नौकरी मिली और किस जाति के लोगों का शासकीय नौकरी में प्रतिनिधित्व नहीं है।

इस आदेश को लागू करवाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए कोई बड़ी बात नहीं है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी चंद घंटों में नोटबंदी कर सकते हैं और देश के व्यापारियों पर जीएसटी का भार दे सकते हैं तो क्या देश के 135 करोड़ जनता को सामान्य शिक्षा एवं समाज चिकित्सा शिक्षा नीति लागू करने का आदेश नहीं दे सकते हैं।

इसके बाद हमारी मांग है कि देश में लोकसभा एवं विधानसभा का चुनाव एक साथ करवाया जाए। यह चुनाव सुधार की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम होगा सत्यशोधक समाज एवं राष्ट्र प्रबुद्ध भारत संघ दोनों ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री राष्ट्रपति मुख्यमंत्री एवं सांसद से मांग की है कि चुनाव ईवीएम मशीन सेना करवाकर बैलेट पेपर पर करवाया जाए।

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