Homemoreआर्टिकलसमकालीन महिला लेखन की दिशा तय करेगा इंदौर का महिला साहित्य समागम

समकालीन महिला लेखन की दिशा तय करेगा इंदौर का महिला साहित्य समागम

समकालीन महिला लेखन की दिशा क्या होना चाहिए आने वाले समय में महिला लेखन के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां हैं बदलते हुए टेक्नोलॉजी के इस दौर में महिला लेखन के अस्तित्व पर उठने वाले सवालों के जवाब मिलेंगे इंदौर के महिला साहित्य समागम में ।

समकालीन महिला लेखन की दिशा क्या होना चाहिए आने वाले समय में महिला लेखन के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां हैं बदलते हुए टेक्नोलॉजी के इस दौर में महिला लेखन के अस्तित्व पर उठने वाले सवालों के जवाब मिलेंगे इंदौर के महिला साहित्य समागम में ।
उल्लेखनीय है कि पूरे देश में सिर्फ इंदौर में ही महिला लेखिकाओं द्वारा एक अनूठा आयोजन किया जाता है जिसका आयोजन वामा साहित्य मंच के तत्वाधान में होता है और न्यूज़ पोर्टल घमासान डॉट कॉम इसका प्रायोजक रहता है घमासान डॉट कॉम ने कुछ ही वर्षों में न्यूज़ पोर्टल की दुनिया में एक अलग ही पहचान स्थापित की है और देश के अग्रणी न्यूज़ पोर्टल के रूप में घमासान डॉट कॉम का नाम लिया जाता है इस बार महिला साहित्य समागम में मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद द्वारा इस सम्मेलन में प्रायोजक के रूप में अपनी भूमिका निभाई जा रही है ।
3 वर्ष पहले इस अनूठे आयोजन की शुरुआत घमासान डॉट कॉम और वामा साहित्य मंच द्वारा की गई थी जिसमें पिछले 2 वर्षों में अनेक प्रसिद्ध लेखिकाओं ने भाग लेकर अपने विचार रखे हिंदी लेखिकाओं के लिए इस आयोजन का इसलिए भी बहुत अधिक महत्व है क्योंकि इसमें देश भर की प्रसिद्ध लेखिकाएं भाग लेती हैं और महिला लेखन पर अपने विचार बेबाक तरीके से रखती है । इंदौर के प्रसिद्ध सभागार जाल सभागृह में 29 और 30 दिसंबर को होने वाले इस समारोह में देश भर की प्रसिद्ध लेखिकाएं आ रही हैं इनमें जाने-माने नाम है विभा रानी विमला व्यास सरला शर्मा आभा बोधिसत्व सुषमा गुप्ता मालिनी गौतम सरला शर्मा उमाजी सीमा जैन ममता सिंह तथा लक्ष्मी शर्मा ।
इसमें कोई दो मत नहीं है कि मौजूदा महिला लेखन अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है इसमें सबसे बड़ी चुनौती है सोशल मीडिया का बदलता हुआ रूप है ,पिछले एक दशक में हिंदी की तमाम साहित्यिक पत्रिकाएं एक के बाद एक बंद होती चली गई और खासकर महिला साहित्य पर निकलने वाली पत्रिकाएं तो ना के बराबर हो गई लेकिन इसके बावजूद फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नई महिला लेखिकाओं को अपना लेखन प्रस्तुत करने का भरपूर मौका मिला इधर पुस्तकों के पाठक भी कम होते चले गए लेकिन ऑडियो के माध्यम से किताबों को ऑडियो रूप में भी सुना जाने लगा ऐसे में महिला लेखन को कैसे जिंदा रखा जाए ऐसे तमाम सवालों पर इस महिला साहित्य समागम में विचार किया जाएगा जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की तरह ही इंदौर में आयोजित महिला साहित्य समागम की लोकप्रियता देशभर में पहुंच चुकी है।
अर्जुन राठौर

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