जल शक्ति मंत्री स्वातंत्र देव सिंह द्वारा नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के अन्तर्गत जल निगम(ग्रामीण), राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, भूजल एवं स्वच्छता विभाग, राज्य स्वच्छ गंगा मिशन एवं लघु सिंचाई विभाग की समीक्षा, जल निगम (ग्रामीण) के सभागार में की गयी।
जिसमें अपर मुख्य सचिव, नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग, प्रधान निदेशक, OSD जल निगम (ग्रामीण), परियोजना निदेशक, राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, अभियान्त्रिकी निदेशक, राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन, निदेशक, भूगर्म जल विभाग उपस्थित रहे। मंत्री द्वारा सभी विभागों की विस्तृत समीक्षा करने के उपरान्त निम्नलिखित निर्देश दिये गये–
1. नमामि गंगे के तहत चल रही विभिन्न योजनाएँ
जिनमें सीवेज शोधन संयंत्र (STP) निर्माणाधीन है, उनको समयबद्ध रूप से पूरा कर कार्य हेतु सुनिश्चित कर लेने को कहा गया। साथ ही कहा गया कि कोई मील का पत्थर में देरी न हो, इसके लिए कारगर मॉनिटरिंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाये।
इसके साथ-साथ मा. मंत्री जी द्वारा अपेक्षा की गयी कि प्रदेश के 05 बड़े शहर जो गंगा तथा यमुना के तट पर स्थित हैं — प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, मथुरा, आगरा — इससे साथ-साथ लखनऊ, अयोध्या, गोरखपुर आदि बड़े शहरों में सीवेज संयंत्र को आवश्यकता अनुसार सुदृढ़ कराया जाये, ताकि कोई नाला बिना शोधन के नदियों में न जाये।
उक्त के अतिरिक्त मा. मंत्री जी द्वारा निर्देशित किया गया कि छोटी नदियों के पुनर्स्थापना हेतु Forestry River Rejuvenation के तहत कार्य योजना को तेजी से क्रियान्वित किया जाये। इसमें “रिवर बेसिन के पुनर्जनन नीति” से सम्बन्धित विभागों में समय-समय पर सहकारिता एवं हुई प्रगति का समन्वय क्रियान्वयन कराया जाये।
2. ग्रामीणों के संसर्ग के इण्डिकेटर अधिक से अधिक ग्रामीण में जल जीवन मिशन एवं जल निगम (ग्रामीण) की कार्यप्रणाली के माध्यम से सुगमता प्रदान करने की दिशा में प्रयास सुनिश्चित किए जाएँ। जल निगमित जलापूर्ति में आने वाली समस्याओं का समय पर निराकरण कराया जाये।
3. मंत्री सिंह द्वारा यह भी अपेक्षा की गई कि ऐसे जनपद जो गुणवत्ता एवं मात्रा (Q & Q) प्रभावित हैं, जैसे– झांसी, मुरैना, मथुरा, एटा, अयोध्या, वाराणसी, गाजीपुर, अमेठी आदि — इन जनपदों की स्थिति को देखते हुए ग्रामिण जल योजनाओं के तहत लगाये गये लगभग 8000 नन से अधिक टाइप स्टेप पोस्ट (COTOF900110) संचालित कर लिये जाएँ। यदि कोई टाइप स्टेप पोस्ट (COTOF900110) के मरम्मत/अनुसन्धान की आवश्यकता हो तो उसका परीक्षण कराते हुए आगामी 15 दिनों में मरम्मत का कार्य पूर्ण कराते हुए सभी COTOF900110 संचालित कर लिये जाएँ, ताकि गुणवत्ता एवं मात्रा प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को शुद्ध जलापूर्ति उपलब्ध कराया जा सके।
उक्त के अतिरिक्त मा. मंत्री जी ने गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति को देखते हुए निर्देशित किया कि ऐसे क्षेत्रों में स्थापित समस्त आर्सेनिक रिमूवल यूनिट (ASRO420) / फ्लोराइड रिमूवल यूनिट (FRO34020) को पूर्ण क्रियाशील करते हुए उनसे शुद्ध जलापूर्ति सुनिश्चित की जाये।
4. मंत्री स्वातंत्र देव सिंह द्वारा भूगर्भ जल विभाग की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पिछले 8–9 वर्षों में अतिदोहन श्रेणी के विकास खण्डों की संख्या में कमी पायी गयी। विभिन्न विभागों के द्वारा भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किये गये जल संचयन के कार्यों के समीक्षात्मक परिणाम के फलस्वरूप जहाँ वर्ष 2017 में प्रदेश के 82 विकास खण्ड अति दोहन श्रेणी में वर्गीकृत थे, वहीं वर्ष 2025 के आकलन के अनुसार यह संख्या घटकर अब 44 हो गयी है।
5. मंत्री द्वारा यह भी निर्देश दिए गये कि ऐसे 10 शहर जहाँ भू–जल की स्थिति संकटग्रस्त है, वहाँ पर व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाते हुए भू–जल की संकटग्रस्त स्थिति में सुधार लाने हेतु प्रयास किया जाये।
इस हेतु सभी सम्बन्धित निकायों जिलों प्रशासन, औद्योगिक निकायों, विभिन्न गैर सरकारी संगठनों/शैक्षिक विभागों के साथ भू–जल संचयन हेतु कार्यशालाएँ आयोजित करते हुए बेहतर परिणाम लाये जायें।










