देशमध्य प्रदेश

बेतुके बयानों से चर्चा में आए मंत्री, बने मजाक के पात्र

दिनेश निगम ‘त्यागी’

प्रदेश सरकार के मंत्री कमल पटेल अपने बयानों के कारण चर्चा में हैं। उनके कई बेतुके बयानों का मजाक उड़ाया जा रहा है। जैसे, उन्होंने कह दिया, गेहूं खरीद घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जेल जाएंगे। कमल ने जो कहा, क्या यह संभव है? यह सवाल ही उन्हें मजाक का पात्र बना रहा है। प्रश्न यह है कि मंत्री बनने के बाद क्या उन्हें संभल कर नहीं बोलना चाहिए। इससे पहले उन्होंने कहा था, मैंने किसानों से अपील की है कि जिन्हें ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र मिले हैं लेकिन ऋण माफ नहीं हुए, वे कमलनाथ सरकार के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराएं, हम उनकी मदद कर कार्रवाई कराएंगे।

यह बयान उन्होंने मंत्री बनने के तत्काल बाद दिया था, लेकिन अब तक प्रदेश के किसी हिस्से से एक भी किसान द्वारा कमलनाथ सरकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सूचना नहीं आई। कमल जब पहले चरण में मंत्री बने थे तो बात बात मै एक नारा बोलते थे, हरदा क्षेत्र में ‘एक कांग्रेसी ढूंढ़ कर लाओ, एक हजार का ईनाम पाओ’। बाद में कांग्रेस ने ही उन्हें हरा दिया। तात्पर्य यह कि प्रमुख पद पर बैठे नेता को वह बोलना चाहिए जो लोगों के गले उतरे, कुछ भी अनाप – शनाप नहीं।

गले नहीं उतरे सिंधिया-नाथ के पोस्टर….

ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं कमलनाथ की आलोचना कई कारणों से की जा सकती है। राजनीति में ऐसा होता है। लेकिन यदि कोई आरोप लगाए कि ये दोनों नेता अपने क्षेत्रों में ध्यान नहीं देते। वहां नहीं जाते तो यह किसी के गले नहीं उतरेगा। सिंधिया देश में कहीं भी रहें लेकिन सप्ताह में कम से कम दो दिन अपने क्षेत्र में लोगों के बीच रहते हैं। सिंधिया के साथ 22 बागी विधायकों ने तो यह आरोप लगाकर ही कांग्रेस छोड़कर सरकार गिरा दी कि कमलनाथ सिर्फ छिंदवाड़ा की चिंता करते हैं।

प्रदेश का पूरा बजट छिंदवाड़ा के विकास के लिए खर्च कर रहे हैं। ऐसे में कुछ लोगों द्वारा सिंधिया एवं कमलनाथ के क्षेत्रों में उनके गायब होने के पोस्टर लगाना, मजाक नहीं तो क्या है? ऐसा करने वालों की राजनीतिक समझ पर तरस आता है। सांसदों एवं प्रभारी मंत्रियों के क्षेत्र से गायब होने के पोस्टर पहले भी लगते रहे हैं। अभी हाल में भोपाल सांसद प्रज्ञा ठाकुर के गायब होने के पोस्टर लगे हैं। अन्य नेताओं को लेकर एक बार लोग भरोसा कर सकते हैं लेकिन सिंधिया-कमलनाथ के पोस्टर लगाने वाले मजाक के ही पात्र बन रहे हैं।

कैलाश के बयान से कटघरे में भाजपा….

कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने वाले नेताओं का क्या हश्र होता है, बालेंदु शुक्ल, चौधरी राकेश सिंह, नारायण त्रिपाठी एवं प्रेमचंद गुड्डू सहित तमाम नेता इसके उदाहरण हैं। गुड्डू की वापसी हो गई और शेष नेता भी घर वापसी के लिए छटपटा रहे हैं। हां, संजय पाठक जैसे कुछ अपवाद भी हैं, जो भाजपा में पहुंचते ही मंत्री बन गए। इसके और कई कारण भी चर्चा में हैं। भाजपा में जाने के बाद नेता खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं, ऐसे आरोप अब तक कांग्रेस या उपेक्षा के शिकार नेता लगाते रहे हैं।

पहली बार प्रेमचंद गुड्डू के मामले में कड़ा बयान देकर भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी ही पार्टी को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने यह स्वीकार करने की हिम्मत दिखाई कि गुड्डू को भाजपा में अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। उनकी उपेक्षा की गई। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि गुड्डू को थोड़ा और धैर्य रखना चाहिए था। विजयवर्गीय का संकेत साफ है कि अब राजनीति बदल रही है। दूसरे दल से आए नेताओं की बदौलत हम फिर सत्ता में आए हैं। इसलिए ऐसे नेताओं को भरोसे में लेकर मैसेज देने की जरूरत है कि भाजपा में आने पर सबको बराबरी का सम्मान मिलता है।

दूध में नीबू नहीं, डाला जा रहा पानी….

प्रेमचंद गुड्डू एवं चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी की वजह से भाजपा में आए बागियों के मन में कोई संशय न रहे इसे दूर करने के प्रयास हो रहे हैं। इसलिए भी क्योंकि दो माह बाद भी वे बागी मंत्री नहीं बन सके, जिन्हें मंत्री बनाने का भरोसा देकर कांग्रेस से लाया गया था। तारीख पर तारीख बढ़ रही है और उनके सब्र का बांध टूट रहा है। इनके भाजपा में शामिल होने से संबंधित क्षेत्रों के भाजपा नेता भी खुदके भविष्य को लेकर चिंतत हैं। दरार और न बढ़े, इसलिए दूध में नीबू नहीं, पानी डाला जा रहा है। नीबू डालने से दूध फट जाता है जबकि पानी को दूध खुद में समाहित कर लेता है।

भाजपा नेतृत्व की कोशिश पानी डालकर बागियों एवं भाजपा नेताओं को मिलाने की है। इसीलिए डा. गौरीशंकर शेजवार को बुला कर समझाया गया। बाद में प्रभुराम चौधरी एवं शेजवार ने साथ में भोजन किया। दीपक जोशी को समझाइश दी गई तो उन्होंने बागी मनोज चौधरी के साथ बैठक कर समर्र्थन का भरोसा दिलाया। बिसाहू लाल सिंह और रामलाल रौतेल को मिलाया गया। इसी तरह के प्रयास ग्वालियर, मुरैना, सुरखी आदि क्षेत्रों के नाराज भाजपा नेताओं को बुलाकर किया जा रहा है। दूध में नीबू का असर दिखता है या पानी का, यह उप चुनाव के नतीजे बताएंगे।

गोविंद के बयान ने कर दिया निरुत्तर

बागियों के खिलाफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने फेसबुक के जरिए लोगों से जो अपील की थी, सिंधिया खेमे के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने ऐसा जवाब दिया कि दिग्विजय सहित सभी नेता निरुत्तर हो गए। सबको सांप सूंघ गया। दिग्विजय ने लोकतंत्र बचाने के लिए जनता से बागियों को हराकर सबक सिखाने का आग्रह किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस को खत्म करने के आपको कई अवसर मिलेंगे, लेकिन अभी लोकतंत्र की रक्षा के लिए धोखा देने वाले बागियों को हराना जरूरी है। जवाब में गोविंद ने कहा कि कांग्रेस के साथ गद्दारी की शुरुआत दिग्विजय के घर से हुई थी।

संकट के दौर में उनके भाई लक्ष्मण सिंह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। इसलिए यदि लक्ष्मण सिंह गद्दार हैं तो हम भी हैं, यदि वे नहीं हैं तो हम भी गद्दार नहीं हैं। गोविंद ने इस जवाब के जरिए बिना नाम लिए अजय सिंह पर भी निशाना साधा, जो चौधरी राकेश सिंह का लगातार विरोध कर रहे हैं। गोविंद का कहना है कि लक्ष्मण सिंह के पार्टी छोड़ने का इसी तरह विरोध क्यों नहीं किया गया। संभवत: गोविंद के जवाब और उठाए सवाल का कोई जवाब नहीं है, इसीलिए उनकी टिप्पणी पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।