देशमध्य प्रदेश

दूध और सब्जी लेना खतरनाक, अड़तीस लाख से ज्यादा का हुआ सर्वे

राजेश राठौर

इंदौर :  इंदौर में कोरोना वायरस फैलने का सबसे बड़ा कारण दूध और सब्जी लेने के लिए जाना है। शारीरिक दूरी नहीं बनाने के कारण वायरस फैलता गया। अब भी यदि सावधानी नहीं रखी, तो वायरस चपेट में किसी को भी ले सकता है। ये निष्कर्ष निकला है गोविंदराम सकसेरिया कॉलेज के उस रिसर्च सेंटर से जहां प”ाीस दिन से एक टीम ये पता करने में लगी है कि आखिर इंदौर में कोरोना वायरस कैसे फैला। कोरोना वायरस के पॉजिटिव मरीज किस-किस के संपर्क में आए, सर्वे कितने लोगों का, कैसे हो रहा है। होम आइसोलेशन में रखे गए मरीजों की क्या हालत है। ये सेंटर नगर निगम के पुराने कमिश्नर आशीषसिंह के दिमाग की उपज थी। सबसे पहले आशीषसिंह ने ही कलेक्टर मनीषसिंह को बोला था कि जो पहला पॉजिटिव केस इंदौर में आया है, उसके बाद से अभी तक की हिस्ट्री होना जरूरी है।

सेंटर में कुछ तकनीकी जानकार और डब्ल्यूएचओ की टीम के साथ काम शुरू हुआ। आशीषसिंह के इंदौर से उज्जैन  जाने के बाद जिला पंचायत के सीईओ रोहन सक्सेना इस काम को देख रहे हैं। सेंटर में ये बात सामने आई कि सर्वे कैसे हो रहा है, क्या कमियां हैं, लोगों का क्या कहना है, सर्वे टीम को क्या-क्या परेशानी आ रही है। इस सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक कलेक्टर रोज प्लानिंग में बदलाव करते हैं। कल तक की बात करें तो लगभग 38 लाख 80 हजार लोगों का सर्वे हो चुका है। सर्वे में इंदौर, महू, सांवेर, देपालपुर भी शामिल हैं। अगले तीन दिन में सर्वे पूरा हो जाएगा। ये बात भी सही है कि सर्वे टीम से कुछ घर छूट गए होंगे या कुछ लोगों ने टीम से बात भी की। कई लोगों ने तो दरवाजे तक नहीं खोले। सर्वे टीम शहरी क्षेत्र में 1811 बनी थीं। हर टीम में दो सदस्य हैं। इंदौर, ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही सांवेर, महू, देपालपुर के लिए 1500 टीम बनी।

पॉजिटिव मरीज से कौन-कौन मिला, सब पता किया

सेंटर में जो दूसरी बड़ी गतिविधि हो रही है, जो इस समय सबसे काम की बात है। हर पॉजिटिव मरीज कहां-कहां गया, किस-किस से मिला। अब तक लगभग 2637 से ज्यादा जो पॉजिटिव मरीज आए हैं, उनका डेटा बन गया। संपर्क में आने वाले लोगों के नाम-पते नोट किए। उनको होम क्वारंटाइन किया गया, जिनके सैंपल लेना जरूरी थे, उनके सैंपल लिए, जिन्होंने खुद आगे बढ़कर सैंपल लेने के लिए कहा, उनके भी सैंपल लिए। इसी सर्वे से पता चला कि नब्बे फीसदी से ज्यादा लोग दूध या सब्जी लेने गए थे। वहां पर शारीरिक दूरी का ध्यान नहीं रखा।

लापरवाही के कारण लोग संक्रमित होते गए। दूध और सब्जी लाने के बाद घर पर सब्जी सैनिटाइज का ध्यान नहीं रखा, सब्जी को धूप में नहीं रखा, धोया नहीं और तो और बिना अनुमति के बिक रहे फल खरीदने में भी लोगों ने बहुत रुचि दिखाई। इस कारण भी परेशानी हुई। दस फीसदी ऐसे लोग थे, जो दवाई की दुकान पर पहुंचे थे या चोरी-छिपे बिक रहे किराने की दुकान पर गए थे। वायरस फैलने की बात लोगों को पता होने के बावजूद लॉक-डाउन को ऐसे लोगों ने मजाक में लिया। इन्हीं लोगों के कारण मामला बढ़ता गया। कुछ लोग ऐसे भी थे, जिनको सैंपल लेने के लिए कहा, लेकिन वो देने को तैयार नहीं हुए, तो रानीपुरा और टाटपट्टी बाखल जैसे इलाके में ज्यादा पॉजिटिव मिले या फिर मल्टी और मोहल्ले में रोज झुंड बनाकर मौज-मस्ती करने वाले भी चपेट में आ गए।

सिर्फ 75 लोगों को घर में रहने की अनुमति

सेंटर के जरिये तीसरा बड़ा काम ये हुआ कि जो लोग पॉजिटिव हुए थे, वो सामान्य थे। केंद्र सरकार का लगभग दस दिन पहले जो आदेश आया था, उस आदेश के बाद अभी तक सामान्य पॉजिटिव 75 मरीजों को घर में ही आइसोलेशन में रखा। अभी 42 सामान्य पॉजिटिव मरीज घरों में हैं। ये सेंटर लगातार काम करता रहेगा, जब तक इंदौर कोरोना वायरस से मुक्त नहीं होगा।

सेंटर के जरिये तीसरा बड़ा काम ये हुआ कि जो लोग पॉजिटिव हुए थे, वो सामान्य थे। केंद्र सरकार का लगभग दस दिन पहले जो आदेश आया था, उस आदेश के बाद अभी तक सामान्य पॉजिटिव 75 मरीजों को घर में ही आइसोलेशन में रखा। अभी 42 सामान्य पॉजिटिव मरीज घरों में हैं। ये सेंटर लगातार काम करता रहेगा, जब तक इंदौर कोरोना वायरस से मुक्त नहीं होगा।