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अमेरिकी पूर्व मंत्री से राहुल गांधी की बातचीत, एकतरफा नेतृत्व का मोदी सरकार पर लगाया आरोप

नई दिल्ली। कोरोना वायरस संकट के बीच कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार देश की आर्थिक व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार को घेरने का मौका नहीं छोड़ रहे हैं। इसी बीच शुक्रवार को राहुल गांधी ने अमेरिका के पूर्व विदेश उप मंत्री निकोलस बर्न्स से बातचीत की। इस बात चीत में राहुल ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर बात की।

इस बात चीत में निकोलस ने कहा कि भारत और कैंब्रिज में एक से हालात हैं। इस पर राहुल ने कहा कि इन दिनों अमेरिका और भारत में वह सहिष्णुता देखने को नहीं मिल रही है जो पहले थी। बीते कुछ समय में दोनों देशों के बीच साझेदारी बढ़ी है। हालांकि अब हमारी साझेदारी पहलेे वाले मुद्दों पर नहीं हैै। यह काफी दुःखद है कि मैं उस स्तर की सहिष्णुता को नहीं देखता, जो मैं पहले देखता था।

वहीं राहुल ने निकोलस से पूछा कि वह भारत और अमेरिका के रिश्ते को कैसे देखते हैं इस पर निकोलस ने कहा कि 70-80 के दशक में यहां भारतीय इंजीनियर, डॉक्टर बने। आज हमारे राज्यों में गवर्नर, सीनेटर भारतीय अमेरिकी हैं। कई टेक कंपनियों के सीईओ भारतीय अमेरिकी हैं। ऐसे में यह एक दोनों देशों के बीच में ऐसा पुल है जो हमारे रिश्ते को और मजबूत करता है।

इस दौरान राहुल ने पीएम मोदी की नीतियों का विरोध करते हुए कहा कि आप एकतरफा फैसला करते हैं। दुनिया में सबसे बड़ा कठोर लॉकडाउन करते हैं। आपके पास लाखों दिहाड़ी मजदूर हैं जो लाखों किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। तो यह एकतरफा नेतृत्व है।

यहीं नहीं मोदी सरकार पर विभाजन का आरोप लगाते हुए राहुल ने कहा कि विभाजन वास्तव में देश को कमजोर करने वाला होता है, लेकिन विभाजन करने वाले लोग इसे देश की ताकत के रूप में चित्रित करते हैं। देश की नींव को कमजोर करने वाले लोग खुद को राष्ट्रवादी कहते है।