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खेतों में पराली को जलाने से किसानों को रोकना कृषि हित में है?

नीरज राठौर की कलम से

खेतों में पराली जलाना किसान भाइयो की मजबूरी है और इसको जलाना गैरकानूनी है, पर किसानों की मज़बूरी को देखते हुए सरकार क़ानून सख़्ती से लागू नहीं करती ओर सरकार के पास इच्छाशक्ति की कमी भी है। फिर भी सरकार ने कुछ किसानों पर क़ानूनी कार्रवाई की है, ओर जुर्माना भी लगाया है पर ये नाकाफ़ी है। पराली जलने से सबसे ज्यादा पीड़ित किसान स्वयं हैं, जो कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन संस्थान द्वारा किए गए एक अध्ययन से स्पष्ट होता है, जिसमें पाया गया कि ग्रामीण पंजाब में लोग पुआल के जलने से होने वाली बीमारियों के इलाज में हर साल 7.6 करोड़ रुपये खर्च करते हैं। हालांकि, किसानों को होने वाली हानि चिकित्सा खर्चों से परे है क्योंकि उनके खेत भी आवश्यक पोषक तत्वों और नमी को खो देते हैं।

तो अब किसान करे तो क्या करे ? क्योंकि पराली उसके लिए उपयोगी भी नही है और खेत मे छोड़ा भी नही जा सकता है, इनके लिए इधर कुआं उधर खाई वाली स्थिति हो गई है। इसे देखते हुए आम जनता का यही रवैया रहता है अगर उन्हें थोड़ी भी तकलीफ हुई तो उसको कोसना शुरू कर देंगे जिसकी वजह से उन्हें तकलीफ़ हुई और दिल्ली वाले ऐसा कर चुके है पर इस समस्या का एक स्थायी समाधान ढूंढने की बजाय राज्य सरकारें एक दूसरे पर दोष मढ़ चुकी है। ऐसा नही है कि इस समस्या को खत्म नही किया जा सकता है।, ऐसे कुछ कारण है जिनके वजह से लोग इससे जूझ रहे है:-

आइये सबसे पहले हम कारणों का विश्लेषण करे-

टेक्नोलॉजी- अभी खेतों में जो मशीनें प्रयोग में लाई जा रही है वो केवल फसल को ऊपर से काटती है, और उसके जड़ का हिस्सा खेत मे लगा रह जाता है, इतना ही नही जिस हिस्से को वह मशीन काटती है उसमें से फसल के दाने को अलग करके बाकि का सारा हिस्सा खेत मे ही छोड़ देती है, जबकि विकसित देशों में मशीनें फसल को काटने के बाद उसे बचे अवशेष को काफी अच्छी तरह से एकत्रित करके बंडल बना देती है और उसे फिर कोई नया प्रोडक्ट बनाने के लिए भेज दिया जाता है, जैसा कि आप चित्र में देख सकते है।

  • इनोवेशन की कमी- पिछले साल यह खबर आई थी कि इस बचे अवशेष से कोई कंपनी बिजली बनाने वाली थी। आज पता नही उस प्रोजेक्ट का क्या हुआ लेकिन यह एक बहुत ही बढ़िया इनिशिएटिव है, जिससे बिजली का एक अल्टरनेटिव सोर्स मिल जाता।
  • जिन्हें नया स्टार्टअप खोलना है तो वह इस समस्या पर ध्यान दे सकते है इससे कई सारे बेहतरीन स्टार्टअप्स शुरू किए जा सकते है और इसके सक्सेसफुल होने के बहुत अधिक चांसेज है।
  • पशुओं के लिए बेहतरीन चारा- सीमांत किसानों के पास बहुत मात्रा में जमीनें होती है जिससे कारण वह पूरी मात्रा में इस अवशेष को चारे के रूप में नही खिला सकते, जबकि शहरों में रहने वाले पशुपालकों को हमेशा एक बढ़िया चारे की जरूरत रहती है। यदि इसे अच्छी तरह पैक करके अन्य राज्यों के शहरी इसलकों में बेचा जा सकता है, जो कि बहुत अच्छा आईडिया है।
  • खाद के रूप में- आजकल लोग ऑर्गेनिक खाद से पैदा हुई सब्जियों को खरीदना पसंद कर रहे है, इसकी खाद बनाकर बेचना बहुत ही फायदेमंद बिज़नेस हो सकता है। इसे किसानों से बहुत ही कम कीमत पर खरीदा जा सकता है और ऐसा करने से किसान इसको जलाना नही चाहेंगे। इन सबके अलावा इससे और भी प्रोडक्ट का उत्पादन किया जा सकता है।
  • इसके अलावा और भी कई कारण है इस प्रदूषण के लेकिन जो भी हो यह इंसानों के लिए हानिकारक है, हम सबको इसपर सोचना चाहिए और हमारी गवर्मेंट को भी।
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