देशमध्य प्रदेश

भाजपा में भी मंत्री बनने एक ‘गॉडफादर’ की जरूरत!

दिनेश निगम ‘त्यागी’

कांग्रेस इस मायने में चर्चित रही और आलोचना का शिकार भी कि नेता को आगे बढ़ने के लिए किसी दिग्गज का वरदहस्त जरूरी है। मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच भाजपा को लेकर भी ऐसा ही सवाल चर्चा में है। क्या यहां भी मंत्री बनने के लिए एक ‘गॉडफादर’ का होना जरूरी है। यदि नहीं तो क्या वजह है कि भाजपा सरकार में दो बार जीते विधायकों को मंत्री बनने का मौका मिल गया। चार से छह बार जीते विधायक इंतजार ही करते रह गए। नाम न छापने की शर्त पर मंत्री पद के दावेदार एक विधायक की पीड़ा थी, हमने पार्टी को ही अपनी मां माना। पार्टी से कभी विश्वासघात नहीं किया। जनता का समर्थन है, 6 बार से लगातार विधानसभा का चुनाव जीत रहे हैं। फिर भी मंत्री नहीं बन सके। उन्होंने ही सवाल भी उठाया, शायद इसलिए कि हमने पार्टी में किसी को अपना ‘गॉडफादर’ नहीं बनाया। आगे-पीछे चक्कर लगाकर किसी की चापलूसी नहीं की।

लगातार जीत के बाद मौका नहीं

भाजपा में 4 से 6 बार तक विधानसभा चुनाव जीतने वाले ऐसे दर्जनों विधायक हैं जिन्हें मंत्री के लायक नहीं समझा गया जबकि दूसरी बार जीते कई विधायक मंत्री बनने में सफल रहे। इन वरिष्ठ विधायकों में जगदीश देवड़ा, गोपीलाल जाटव, जुगुल किशोर बागरी, जयसिंह मरावी, सीतासरन शर्मा, प्रेम सिंह पटेल, गिरीश गौतम, नागेंद्र सिंह गुढ़, केदारनाथ शुक्ला, देव सिंह सैयाम, देवेंद्र वर्मा, ओम प्रकाश सखलेचा आदि को शामिल किया जा सकता है। देवड़ा, जाटव एवं बागरी एक-एक बार मंत्री बने लेकिन दुबारा मौका नहीं मिला जबकि कई विधायक बार-बार मंत्री बन रहे हैं।

इनके प्रति भी दोहरा व्यवहार

मंत्री बनाने में भाजपा को मजबूत व खड़ा करने में मुख्य भूमिका निभाने वाले नेताओं के परिजनों के साथ भी एक जैसा व्यवहार नहीं किया जाता। इन वरिष्ठों के परिजनों, पुत्रों, संबंधितियों पर नजर डालने पर ऐसे कई उदारहण मिल जाते हैं। जैसे, दो बार जीतने के बाद सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा, कैलाश जोशी के पुत्र दीपक जोशी एवं कैलाश नारायण सारंग के पुत्र विश्वास सारंग, प्रहलाद पटेल के भाई जालम सिंह पटेल मंत्री बन गए, लेकिन वीरेंद्र कुमार सखलेचा के पुत्र ओम प्रकाश सखलेचा, विक्रम वर्मा की पत्नी नीना वर्मा, लक्ष्मीनारायण पांडे के पुत्र राजेंद्र पांडे जैसों को अवसर नहीं मिला। सखलेचा, वर्मा एवं पांडे का पार्टी को खड़ा करने में किसी से कम योगदान नहीं है। इसलिए भी सवाल उठ रहा है कि क्या वास्तव में भाजपा में भी मंत्री बनने के लिए एक ‘गॉडफादर’ जरूरी है।

वरिष्ठता कर दी नजरअंदाज

कोरोना संकट के कारण प्रदेश की भाजपा सरकार ने छोटा पांच सदस्यीय मंत्रिमंडल बनाया। इसमें भी वरिष्ठता को नजरअंदाज किया गया। तुलसी सिलावट एवं गोविंद सिंह राजपूत को मंत्री बनाना भाजपा की मजबूरी थी, क्योंकि इनके कारण भाजपा की सरकार बनी। मंत्रिमंडल में सात बार के विधायक नरोत्तम मिश्रा के साथ पांचवी बार जीते कमल पटेल एवं मीना सिंह दूसरी बार मंत्री बन गए। चर्चा है, ये तीनों अपने-अपने ‘गॉडफादर’ के कारण मंत्री बनें। जबकि पहले मंत्रिमंडल में सबसे मजबूत दावा 8 बार के विधायक गोपाल भार्गव का था। भार्गव अपनी ताकत खुद हैं। वे ‘गॉडफादर’ बनाने में भरोसा नहीं करते। पार्टी को मां मानते हैं लेकिन कांग्रेस सरकार में नेता प्रतिपक्ष रहने के बावजूद वे ‘पंच परमेश्वर’ में से बाहर थे।

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