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स्वतंत्रता दिवस: जब मदरसे में गूंज उठे ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ के नारे

मेरठ: पूरा देश आज आजादी का जश्न मना रहा है। कोरोना काल के चलते इस बार कोई बड़े कार्यक्रम नहीं हुए लेकिन अलग-अलग हिस्सों में झंडा फहराया गया। आजादी के जश्न में मदरसे में भी ‘वंदे मातरम्’ गूंज उठा। मेरठ के मदरसे में झंडा फहराकर वंदे मातरम् गाया गया। इस मौके पर दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री सुनील भराला भी पहुंचे।

मंत्री ने मदरसे का तारीफ की और कहा कि यही हिन्दुस्तान है. यही एकता और अखण्डता की हमारी शक्ति है। भराला ने कहा कि मदरसे में झंडारोहण करके उन्हें फक्र महसूस हो रहा है। इमदादादुल इस्लाम के मौलाना महफूज़ उर रहमान शाहीन जमाली ने जब वेदों का पाठ किया तो हर तरफ हिन्दुस्तान जिन्दाबाद का स्वर गूंज उठा।

मौलाना चतुर्वेदी का कहना है कि सबसे बड़ा धर्म मोहब्बत और इंसानियत है। आखिर एक मौलाना के नाम के आगे चतुर्वेदी क्यों लग गया, इसका राज जानकर आपको बेहद अच्छा लगेगा। दरअसल, उन्होंने हिंदुओं की धार्मिक पुस्तकों या वेदों का भी गहरा अध्ययन किया है। वो कहते हैं, “लोग यह सोचते हैं कि अगर ये मौलाना हैं तो फिर चतुर्वेदी कैसे हैं? मैं उनसे कहता हूं कि मौलाना अगर चतुर्वेदी भी हो जाए, तो उसकी शान घटती नहीं और बढ़ जाती है।

हिंदू धर्म में चारों वेदों का अध्ययन करने वालों को चतुर्वेदी कहा जाता है। देवबंद से पढ़ाई पूरी करने के बाद मौलाना शाहीन जमाली को संस्कृत सीखने इच्छा हुई। उसके बाद वेदों और हिन्दुओं के बाक़ी धार्मिक पुस्तकों में उनकी रूचि बढ़ती चली गई। वो कहते हैं, “वेद पढ़ने के बाद मैंने महसूस किया कि मेरा जीवन एक खाने में सिमट कर नहीं रह गया है, बल्कि मेरा दायरा और भी बड़ा हो गया है।”

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