मध्य प्रदेश

सड़कों पर मिल रहे लावारिस बच्चों को भेजा जाएगा क्वारेंटाइन सेंटर

इंदौर। एक और प्रशासन से सामने बहार से आ रहे मजदूरों की परेशानी है, वहीं दूसरी और बड़ी संख्या में लावारिस बच्चे पुलिस-प्रशासन को सड़कों पर मिल रहे है। ऐसे में संक्रमण का खतरा और बढ़ गया है। पहले इन बच्चों को बालगृह भेज दिया जाता था लेकिन कोरोना के संक्रमण को देखते हुए अब इनबच्चों को भी विभागीय क्वारेेंटाइन सेंटरों में रखा जाएगा।

कर्फ्यूऔर लॉकडाउन में फंसे सबसे ज्यादा मुसीबत गरीब और मजदूर झेल रहे हैं। उनकी रोजी-रोटी ही समाप्त हो गई। वहीं लावारिस बच्चों की संख्या भी बढ़ गई है। अभी रोजाना इंदौर सहित सभी जिलों में चाइल्ड लाइन और पुलिस के माध्यम से बड़ी संख्या में बच्चे मिल रहे हैं। इन बच्चों के लिए जो बालगृह बने हैं वहां इन्हें भिजवा दिया जाता है। मगर चूंकि ये बच्चे बाहर लावारिस घूम रहे थे और संक्रमित हो सकते हैं। अगर इन्हें सीधे बालगृह भेजा गया तो वहां के बच्चों में भी कोरोना संक्रमण फैल सकता है। इसके मद्देनजर संचालक महिला एवं बाल विकास स्वाति मीणा नायक ने ऐसे विभागीय क्वारेंटाइन सेंटरों की सूची कलेक्टरों को भेजी है, जहां पर इन बच्चों को पहले सेंटरों में और फिर 14 दिन बाद बालगृहों में भिजवाया जाएगा।

अभी जो प्रशासन के क्वारेंटाइन सेंटर हैं वहां पर कोरोना संदिग्ध या परिजनों को ठहराया जाता है। अब इन बच्चों के लिए अलग से क्वारेंटाइन सेंटर तय किए हैं। इंदौर में लड़के और लड़कियों के लिए लोक बिरादरी ट्रस्ट, अरमान स्नेहलतागंज को सेंटर बनाने का निर्णय लिया है। इसके भूतल पर बालक और प्रथम तल पर बालिकाएं रखी जाएंगी। इसी तरह उज्जैन में सेवा धाम आश्रम ग्राम अम्बोदिया, भोपाल में एसओएस बालग्राम खजूरीकलां रोड पिपलानी, वहीं जबलपुर में शासकीय पश्चात वृद्धि गृह को तय किया गया है। सभी जिला कलेक्टरों से बोला है कि बाल गृह से भिजवाने से पहले सड़़कों पर मिल रहे इन लावारिस बच्चों को सेंटरों में रखा जाए और केयर टेकर भी हो। बच्चों को इन सेंटरों में नाश्ता, भोजन, दूध सहित सभी आवश्यक सुविधाएं भी दी जाएं। मास्क, सेनेटाइजर की व्यवस्था, सोने के लिए पलंग और अन्य आवश्यक सामग्री दी जाए।

बाहरी व्यक्ति का प्रवेश ना हो और क्वारेंटाइन सेंटर से 14 दिन बाद बालगृह में शिफ्ट करते वक्त भी स्वास्थ्य परीक्षण किया जाए। सेंटर के बाहर पोस्टर चस्पा भी किया जाए, जिस पर बच्चों के प्रवेश की तिथि, नाम, उम्र और क्वारेंटाइन समाप्त होने की तारीख भी अंकित रहे। वहीं इंदौर में कलेक्टर श्री मनीष सिंह द्वारा विशेष पहल कर लॉकडाउन के चलते इंदौर में रहे 11 दिव्यांगजनों को आज विशेष बस से उनके उत्तर प्रदेश स्थित गृह जिलों में भेजा गया। इनमें दृष्टिहीन, मूकबधिर और अन्य श्रेणी के दिव्यांगजन शामिल थे। जिन दिव्यांगों को उनके गृह क्षेत्र भेजा गया उनमें विकास जायसवाल, कमलेश निषाद, नंदलाल कनोजिया, विनय कुमार, कुमारी बीना सिंह, अमित साहनी, देवऋषि, अरमान कुरैशी, आशुतोष, हर्षित जैन तथा नितेश कुमार शामिल है। इनमें से तीन बच्चे मूकबधिर संगठन और तीन बच्चे मध्यप्रदेश दृष्टिहीन कल्याण संघ में अध्ययनरत थे।

शेष अन्य वर्ग के हैं। इन्हें आज विशेष वाहन से इनके गृह क्षेत्र उत्तर प्रदेश के ललितपुर, झांसी, बरेली, बस्ती, महाराजगंज, गोरखपुर भेजा गया। आनंद सर्विस सोसायटी के श्री ज्ञानेन्द्र पुरोहित को इनके गृह क्षेत्रों में जिला अधिकारियों से सम्पर्क और सतत समन्वय के लिये जवाबदारी सौंपी गई है। संयुक्त संचालक सामाजिक न्याय द्वारा बताया गया है कि यह वाहन इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के श्री सुरेश भदौरिया के सौजन्य और अन्य लोगों के जन सहयोग से रवाना किया गया । इनके सहयोग से भोजन, पेयजल आदि की व्यवस्था भी की गई।