मध्य प्रदेश

अफसरों के जिम्मे फीवर क्लीनिकों की मॉनिटरिंग, 600 निजी क्लिनिक भी होंगे शुरू

इंदौर। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रशासन कई कदम उठा रहा है। घर-घर जाकर सर्वे करने के साथ अब प्रशासन ने कोरोना संक्रमितों की जांच के लिए 44 फीवर क्लीनिक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू करवाए हैं। इन क्लीनिकों पर अभी तक 6 हजार लोगों का परीक्षण किया जा चूका है।

कलेक्टर ने स्टेडियम में कल रात अपने सभी अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ को ट्रेनिंग दी और इन सभी फीवर क्लीनिक की सतत मॉनिटरिंग करने को कहा। वहीं निजी क्लीनिकों को भी अनुमति दे दी है। 600 से अधिक चिकित्सकों ने इसके लिए पंजीयन भी करवा लिए।

कलेक्टर मनीष सिंह ने जहां कल चिकित्सा अधिकारी डॉ. माधव हसानी को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त किया और अब कोविड केयर सेंटर और क्वारेंटाइन सेंटरों में रूके संदिग्धों या अन्य लोगों के स्वास्थ्य का जिम्मा सौंपा है। वे अपर कलेक्टर संतोष टैगोर के साथ काम करेंगे। डॉ. एमपी शर्मा को पीसी सेठी, संयोगितागंज झोन प्रभारी, मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं कलेक्टर ने कल रात नेहरू स्टेडियम में फीवर क्लीनिकों के संचालन के संबंध में बैठक ली। उन्होंने बताया कि कोरोना से निपटने के लिए 44 फीवर क्लीनिक शुरू करवाए गए हैं। इनमें से 19 इंदौर शहर में और 25 इंदौर ग्रामीण क्षेत्र में बनाये गये हैं। इन फीवर क्लीनिकों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जायेगा। यहाँ कोविड-19 के संभावित लक्षण वाले मरीजों का परीक्षण होगा तथा आवश्यकता के अनुसार उनके उपचार के लिये अगली कार्यवाही की जाएगी।

कलेक्टर मनीष सिंह ने इन फीवर क्लीनिकों के संचालन के लिये आज यहाँ नेहरु स्टेडियम में संबंधित अधिकारियों और चिकित्सकों तथा पैरामेडिकल स्टॉफ की बैठक ली। बैठक में अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, फीवर क्लीनिक के प्रभारी चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ मौजूद थे। बैठक में सभी को फीवर क्लीनिक के संचालन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कलेक्टर मनीष सिंह ने निर्देश दिए कि फीवर क्लीनिक में आने वाले सभी मरीजों का परीक्षण किया जाएये। कोविड-19 के संभावित लक्षण पाए जाने पर उन्हें कोविड केयर सेंटर भेजा जाये।

कोविड-19 के मरीजों को भेजने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है। सभी चिकित्सक एम्बुलेंस का उपयोग ऐसे मरीजों को भेजने के लिये सुनिश्चित करें। साथ ही निर्देश दिये गये कि सभी चिकित्सक अपने यहाँ आने वाले मरीजों की जानकारी एप में दर्ज करें। यह जानकारी संबंधित एसडीएम और आरआरटी टीम को भी मिल जाएगी। इससे मरीज के उपचार में सुविधा होगी। साथ ही बताया गया कि इंदौर में प्रायवेट क्लीनिक के संचालन की अनुमति भी दी गयी है। अभी तक 600 से अधिक चिकित्सकों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। इनके द्वारा क्लीनिक संचालन किया जायेगा। इनके यहाँ आने वाले कोविड-19 के संभावित लक्षण के मरीजों की जानकारी भी वे एप में भरेंगे और मरीजों को फीवर क्लीनिक में भेजेंगे।

कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि फीवर क्लीनिक में आने वाले मरीजों के लिये सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुये बैठने की पर्याप्त व्यवस्था की गयी है। क्लीनिक के बाहर टेंट लगाये गये हैं। पेयजल की भी व्यवस्था की गयी है। कलेक्टर मनीष सिंह ने निर्देश दिए कि, फीवर क्लिनिकों में प्रभारी डॉक्टर द्वारा मरीज का प्राथमिक उपचार किया जाएगा। इन मरीजो का फॉलोअप लिया जाएगा, तत्पश्चात यदि उपचार में चिकित्सकीय सलाह की आवश्यकता है तो, सिविल सर्जन डॉ संतोष वर्मा से मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे। इन क्लीनिकों में इलाज के दौरान यदि अगर किसी मरीज में कोविड-19 से संक्रमण के लक्षण पाए जाते हैं,तो संबंधित मरीज को प्रभारी डॉक्टर द्वारा इंडेक्स, अरविंदो या एमटीएच अस्पताल में बिना किसी विलंब के रेफर किया जाएगा। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रोहन सक्सेना ने एप के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने फीवर क्लीनिक संचालन के संबंध में बनाये गये मार्गदर्शी निर्देशों के बारे में भी बताया।

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