मध्य प्रदेश

इंदौर: 90 प्रतिशत कोरोना मरीजों में नहीं कोई लक्षण, अब घरों में होगा इलाज

इंदौर। दुनियाभर के विशेषज्ञों ने अब यह स्पष्ट रूप से मान लिया है कि कोरोना का वैक्सीन इतनी जल्दी नहीं आएगा और सबको इसी के साथ जीना है। लिहाजा अब सरकार ने भी लंबे समय तक लॉकडाउन को जारी ना रखने का फैसला करते हुए कई तरह की छूट शुरू कर दी है। इंदौर में पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर 2637 हो गई है। अभी 90 प्रतिशत तक ऐसे मरीज मिल रहे हैं जिनमें कोई लक्षण ही नहीं है। यही कारण है कि दो दिनों से सैंपलिंग भी घटा दी और अधिक से अधिक ऐसे लोगों का अब घरों में ही इलाज किया जाएगा। अधिक उम्र वाले या गंभीर लक्षणों वाले मरीजों को ही अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी जाएगी।

corona patients

31 मई तक इंदौर में भी कर्फ्यू और लॉकडाउन जारी है, लेकिन उसके साथ कई तरह की छूट भी लोगों को मिलने लगी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब ज्यादातर कोरोना पॉजिटिव मरीज ऐसे मिल रहे हैं जिनमें कोई लक्षण ही नहीं है। पहले यह प्रतिशत 70 से 80 के बीच था, जो अब बढ़ गया है। इसका खुलासा पिछले हफ्ते अधिक से अधिक करवाई सैंपलिंग से सामने आया। प्रशासन ने रोजाना 1200 से लेकर 1700 तक सेम्पलिंग करवाई, जिसमें 80 से लेकर 125 के बीच पॉजिटिव मरीज मिल रहे थे। अब दो दिनों से सैंपलिंग कम हो गई है। परसों 347 और कल सोमवार को 415 सैंपल ही लिए गए।

corona worriors

कल रात भी जो मेडिकल बुलेटिन जारी हुआ उसमें 72 नए पॉजिटिव और 830 नेगेटिव मिले। कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 2637 हो गई और मरने वालों का आंकड़ा 103 अधिकृत रूप से बताया गया। कल भी 39 मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे, तो अभी 1376 कोरोना पॉजिटिव मरीजों का इलाज अस्पतालों में चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अब 90 प्रतिशत तक पॉजिटिव मरीज चूंकि बिना लक्षण वाले ही मिल रहे हैं। लिहाजा इनमें से अधिकांश को अस्पताल में भर्ती होने की भी जरूरत नहीं है।

beds for corona patients

पिछले दिनों जो स्वास्थ्य मंत्रालय की गाइडलाइन आई थी, जिनमें ऐसे मरीज अपने घर रहकर ही इलाज करवा सकते हैं। इंदौर में अभी 42 से अधिक मरीजों का इलाज उनके घरों पर ही चल रहा है। अब यह संख्या लगातार बढ़ेगी। हालांकि प्रशासन ने एक हजार से अधिक बिस्तरों की व्यवस्था कर रखी है, क्योंकि छूट के साथ आने वाले दिनों में कोरोना संक्रमण के मरीजों की संख्या भी बढ़ेगी।

21 लक्षणों वाला आदेश भी स्वास्थ्य विभाग ने लिया वापस

24 घंटे में ही स्वास्थ्य विभाग ने अपने एक डराने वाले आदेश को वापस ले लिया। दरअसल मध्यप्रदेश हेल्थ सर्विसेस के डायरेक्टर ने यह आदेश जारी कर दिया था कि 21 तरह के लक्षण अगर किसी मरीज में मिले तो उसे डेडिकेटेड कोरोना अस्पताल में भर्ती करवाया जाए। इसमें बुखार, सूखी खांसी, सांस में तकलीफ, गले में खराश, सिर दर्द, थकान, मांसपेशियों में दर्द, सर्दी, जी मचलाना, उल्टी, ठंड लगना, कंपकंपनी, हाथ-पैर में सूजन, सूंघने की शक्ति कम होना, अचानक किसी स्थान पर दर्द उठना, चलने में तकलीफ, सीने में दर्द, त्वचा में अचानक नीलापन या कालापन होना, कंधों में दर्द, हाथ-पैर में कमजोरी जैसे लक्षणों को भी कोरोना मान लिया था।

अगर इस आदेश का पालन होता तो इंदौर के ही आधी से ज्यादा आबादी को ही अस्पताल में भर्ती करना पड़ जाता। इस आदेश के जारी होने के बाद प्रदेशभर में हड़कंप मचा और कल ताबड़तोड़ प्रमुख सचिव फेज अहमद फेज ने अपना 21 लक्षण वाला आदेश वापस ले लिया। अधिकारियों में चर्चा है कि इस तरह का आश्चर्यजनक आदेश निकला कैसे, जिसके चलते लोगों में और ज्यादा दहशत-घबराहट बढ़ जाती।

विदेश से आए 5 लोगों को किया क्वारेंटाइन

screening on airports

पिछले हफ्ते कुवैत से आई दो उड़ानों में इंदौर होकर भोपाल पहुंचे 18 यात्री पॉजिटिव मिले और कल भी एक और अन्य यात्री में कोरोना की पुष्टि हो गई, जिसके चलते अब विदेश से आने वाले यात्रियों को 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन सेंटर भेजा जा रहा है। कल भी ऐसे 5 विदेश से आए यात्रियों को बायपास स्थित होटल रिजेंटा में क्वारेंटाइन करवाया गया। ये यात्री लंदन, इंडोनेशिया और फिलिपिंस से आए थे।