मध्य प्रदेश

मंत्रिमंडल: भाजपा नेतृत्व को सुलझाना होगी उलझी गुत्थी

दिनेश निगम ‘त्यागी’

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर जो गुत्थी उलझी है उसे सुलझा पाना भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के बूते से बाहर दिख रहा है। इसी कारण बैठकों के दौर चल रहे हैं लेकिन मंत्रियों की सूची फाइनल नहीं हो पा रही। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल विस्तार की तीन तारीखों का संकेत दे चुके हैं। अब कहा जा रहा है, यह 31 मई से पहले हो जाएगा। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि मंत्रियों की सूची का विवाद हल हो गया। सच यह है कि मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले सदस्यों को लेकर गुत्थी अब तक उलझी पड़ी है। कुछ अंचलों में कई ऐसे मजबूत दावेदार हैं जिन्हें लेकर प्रदेश संगठन तय नहीं कर पा रहा कि किसे लें और किसे छोड़ दें। लिहाजा, गेंद अब केंद्रीय नेतृत्व के पाले में है। वह ही इस उलझी गुत्थी को सुलझाएगा। उसकी हरी झंडी के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार हो सकेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री एवं संगठन के नेता दिल्ली का एक दौरा कर सकते हैं।

चंबल-ग्वालियर अंचल से दो को छोड़ पाना कठिन

ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव वाले चंबल-ग्वालियर अंचल से नरोत्तम मिश्रा पहले ही मंत्री बन चुके हैं। सिंधिया के खेमे से इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर तथा एंदल सिंह कंसाना को मंत्री बनाया जाना है। इसके अलावा यशोधराराजे सिंधिया, अरविंद भदौरिया, गोपीलाल जाटव भाजपा एवं संजीव सिंह बसपा से मंत्री बनने की कतार में हैं। इनमें दो विधायकों यशोधरा, अरविंद को छोड़ना आसान नहीं। अन्य का समर्थन चाहिए तो बसपा के संजीव को लेना होगा। इसलिए गेंद केंद्र के पाले में जाएगी।

बुंदेलखंड से मंत्री तय करना आसान नहीं

बुंदेलखंड अंचल के सागर जिले में गोपाल भार्गव एवं भूपेंद्र सिंह को लेकर समस्या सर्वविदित है, टीकमगढ़ से हरिशंकर खटीक एवं पन्ना के बृजेंद्र प्रताप सिंह को लेकर भी विवाद है। दो में से किसी एक को मंत्री बनाना होगा, पर तय नहीं हो पा रहा। दमोह के पथरिया से बसपा की रामबाई का दबाव अलग बना हुआ है। यह गुत्थी भी केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप से सुलझेगी। हालांकि सागर जिले के नेताओं का विवाद बड़ा है। इस अंचल से सिंधिया के खास गोविंद सिंह राजपूत पहले से मंत्री हैं। छतरपुर जिले के सपा विधायक राजेश शुक्ला भी मंत्री बनने की आस में हैं।

विंध्य में बन रहे बगावत के हालात

विंध्य अंचल से अभी एकमात्र मीना सिंह मंत्री बनी हैं। अंचल से मंत्री बनने के दावेदार सीनियर विधायकों की लंबी फौज है। बागी बिसाहूलाल को मंत्री बनना है और राजेंद्र शुक्ल को इग्नोर नहीं किया जा सकता। पर गिरीश गौतम, केदारनाथ शुक्ला, नागेंद्र सिंह गुढ़ एवं नागेंद्र सिंह नागौद, दिव्यराज सिंह, नारायण त्रिपाठी तथा पंचूलाल प्रजापति का दावा कमजोर नहीं है। यहां बगावत के हालात बन रहे हैं। इसलिए केंद्रीय नेतृत्व को हस्तक्षेप करना पड़ेगा।

महाकौशल अंचल में संकट कम नहीं

महाकौशल अंचल से अभी कोई मंत्री नहीं है। अजय विश्नोई, गौरीशंकर बिसेन, जालम सिंह पटेल एवं अशोक रोहाणी प्रबल दावेदार हैं। कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे निर्दलीय प्रदीप जायसवाल एवं भाजपा के दिनेश राय मुनमुन भी मंत्री बनने प्रयासरत हैं। कौन मंत्री बने और कौन नहीं, केंद्र को ही तय करना होगा।

मध्यभारत के कई दिग्गज खतरे में

मध्यभारत अंचल से सिंधिया खेमे से प्रभुराम चौधरी का मंत्री बनना तय है। इसके अलावा सुरेंद्र पटवा, रामपाल सिंह, सीतासरन शर्मा, विश्वास सारंग बड़े नाम हैं। सक्रियता और हिंदुत्व की छवि के कारण रामेश्वर शर्मा संघ की पसंद हैं। करण सिंह वर्मा, विष्णु खत्री एवं सुदेश राय भी कतार में हैं। प्रदेश नेतृत्व भोपाल, रायसेन एवं होशंगाबाद जिले का मामला भी नहीं सुलझा पा रहा है।

मालवा-निमाड़ में स्क्रीनिंग सबके बस में नहीं

विधानसभा चुनाव में मालवा-निमाड़ अंचल से भाजपा को अपेक्षाकृत कम सफलता मिली थी, फिर भी यहां से मंत्री बनने के दावेदारों की लंबी फौज है। अंचल से सीटें भी सर्वाधिक हैं। यहां से सिंधिया खेमे के तुलसी सिलावट मंत्री बन चुके हैं। दो अन्य बागियों राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और हरदीप डंग का मंत्री बनना तय है। भाजपा से गायत्रीराजे पंवार, विजय शाह, नीना वर्मा, रमेश मेंदौला, मालिनी गौड़, ऊषा ठाकुर, महेंद्र हार्डिया, पारस जैन, यशपाल सिसोदिया, जगदीश देवड़ा, ओम प्रकाश सखलेचा एवं राजेंद्र पांडेय जैसे मंत्री पद के मजबूत दावेदार हैं। भाजपा के मोहन यादव तथा प्रेम सिंह पटेल के अलावा निर्दलीय सुरेंद्र सिंह शेरा भैया भी कतार में हैं। साफ है, दावेदारों की इतनी लंबी फौज के स्क्रीनिंग की क्षमता सिर्फ केंद्रीय नेतृत्व के पास है। इसी वजह से मंत्रिमंडल विस्तार टल रहा है।