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दिग्विजय का आरोप- चीटफंड कंपनी ने भाजना नेताओं से मिलकर लूटे साढ़े चार करोड़ रुपए

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान को एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्होने आरोप लगाया है कि बुधनी विधानसभा में चिटफंड कंपनी भाजपा के लोगों के साथ मिलकर आदिवासियों के साढ़े 4 करोड़ रुपए लेकर भाग गई है।

दिग्विजय ने पत्र में कहा कि मैंने नसरूल्लागंज तहसील के गांवों का दौरा किया था। इस दौरान मुझे आसपास के किसानों द्वारा आठ वर्ष पूर्व छले जाने की दास्तान विस्तार से बताई गई। उन्होने कहा कि जिस समय आपके विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी किसानों के साथ लूट चल रही थी तब भी आप मुख्यमंत्री थे, आज जब न्याय की तलाश में ये किसान भटक रहे है, आप पुनः मुख्यमंत्री है। इस दौरान बीच की अवधि में कांग्रेस पार्टी की सरकार के समय जब पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के संज्ञान में युवा किसान नेता अर्जुन आर्य ने यह ‘‘आदिवासी किसान लूट कांड’’ का मामला उठाया था, तो कमलनाथ ने वर्षो से भटक रहे आदिवासी किसान परिवारों की ओर से लूट करने वाली कंपनी के विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज कराई थी।

कांग्रेस नेता ने कहा कि आदिवासी और पिछड़े वर्ग के छोटे-छोटे गरीब किसानों को छले जाने का यह मामला 2012 के आसपास शुरू हुई जब नसरूल्लागंज तहसील में ‘‘घोघरा जलाशय’’ बनाने के लिये आपकी सरकार ने गरीब आदिवासियों की जमीन अधिगृहित कर उन्हें भूमिहीन कर दिया और बदले में उन्हें 2 लाख रूपये प्रति एकड़ का मुआवजा देकर घर बैठा दिया। उन्होने कहा कैबिनेट मंत्री कमल पटेल की विधान सभा क्षेत्र में एक बहुत बड़ी फर्जी संस्था ”साई प्रसाद प्रापर्टीज“ के नाम से चल रही थी। इस कंपनी के एजेंटस को बड़े-बड़े स्थानीय नेताओं का संरक्षण प्राप्त था। ये एजेंट हरदा से बुधनी विधान सभा की नसरूल्लागंज तहसील में आते थे। उन गरीब आदिवासी किसानों के साथ लूट करते थे जिन्हे अपनी डूब में आई जमीन के लिये लाखों रूपये मुआवजे के रूप में मिले थे। इस कंपनी के एजेंट 6 साल में जमा लाखों रूपयों को दुगना करने का झांसा देकर रूपये हड़पते रहे और बैंक सहित पुलिस, प्रशासन को कोई खबर नहीं लगी।

पूर्व सीएम ने पत्र में की ये मांग

  • घोघरा बांध के कारण भूमि अधिग्रहण किये जाने से भूमिहीन हो गये किसानों को उपजाऊ जमीन के पट्टे दिये जाये।
  • जो किसान मुआवजे की लूट का शिकार हुए है, उन्हें कंपनी की प्रापर्टी जब्त कर उनकी पाई- पाई वापस दिलाई जाये।
  • इस मामले में एस.आई.टी. गठित कर जांच कराई जाये, यह घोटाला हरदा, सीहोर के अतिरिक्त कई अन्य जिलों में संभावित है।
  • साँई प्रसाद कंपनी के संचालकों और एजेंटों को तत्काल गिरफ्तार किया जाये।
  • संगठित लूट का शिकार बने शेष अन्य गांवों के किसानों की ओर से पृथक-पृथक एफ.आई.आर. दर्ज की जाये।
  • पुलिस प्रकरण में एट्रोसिटी एक्ट की धाराएं भी लगाई जायें क्योंकि लूट के शिकार किसानों में आदिवासी समुदाय के लोग है।
  • कंपनी का मुख्यालय गोवा राज्य की राजधानी में है। गोवा में आपकी पार्टी की सरकार है। अंतर्राज्यीय मामला होने से साँई प्रसाद कंपनी की “आदिवासी किसानों से करोड़ो की लूट के कांड” से जांच कराने की सिफारिश की जाये।
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