Cockroach Janta Party : कॉकरोच जनता पार्टी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। हालांकि यह कोई आधिकारिक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि युवाओं की नाराजगी और सिस्टम पर व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ एक डिजिटल आंदोलन है। इस वर्चुअल कैंपेन ने कुछ ही दिनों में लाखों युवाओं को अपने साथ जोड़ लिया है। खास बात यह है कि इसके घोषणापत्र में महिलाओं को संसद और कैबिनेट में 50% आरक्षण देने जैसे बड़े वादे भी शामिल हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बेहद कम समय में सोशल मीडिया पर जबरदस्त लोकप्रियता हासिल कर ली है। इंस्टाग्राम पर इसके 63 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं, जबकि X (पूर्व ट्विटर) पर करीब 1.21 लाख लोग इससे जुड़ चुके हैं। बताया जा रहा है कि सिर्फ एक दिन में ही करीब 30 लाख लोग इस अभियान से जुड़े।
इस डिजिटल आंदोलन की शुरुआत महाराष्ट्र के अभिजीत दीपके ने की है। पार्टी का नारा है — “Secular, Socialist, Democratic, Lazy”। यह नारा भी युवाओं के बीच मीम और व्यंग्य के रूप में तेजी से वायरल हो रहा है।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में फर्जी डिग्री से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। दावा किया गया कि उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “पैरासाइट” से की है।
हालांकि बाद में कोर्ट की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह टिप्पणी केवल फर्जी डिग्री धारकों के संदर्भ में थी, लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर युवाओं का गुस्सा भड़क चुका था। इसी के बाद अभिजीत दीपके ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से यह व्यंग्यात्मक डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया।
कौन हैं अभिजीत दीपके?
अभिजीत दीपके सोशल मीडिया स्ट्रेटेजिस्ट हैं और वर्तमान में अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन की पढ़ाई कर रहे हैं। वह 2020 से 2023 तक आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम के साथ भी काम कर चुके हैं।
अभिजीत के मुताबिक, उन्होंने सोशल मीडिया पर CJI की टिप्पणी देखी और सोचा कि “अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्या होगा?” इसी विचार से इस आंदोलन की शुरुआत हुई।
मजाकिया अंदाज में इस ग्रुप से जुड़ने के लिए कुछ ‘योग्यताएं’ भी बताई गईं — जैसे बेरोजगार होना, घंटों फोन चलाना, ऑनलाइन एक्टिव रहना और प्रोफेशनल तरीके से सिस्टम को कोसना। यही वजह है कि यह कैंपेन युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गया।
युवाओं की नाराजगी का प्रतीक
भले ही CJP को एक मीम ट्रेंड या इंटरनेट जोक माना जा रहा हो, लेकिन यह देश के युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी, पेपर लीक, सिस्टम से निराशा और राजनीतिक अविश्वास जैसी भावनाओं को भी सामने ला रहा है।
कई सोशल मीडिया यूजर्स इसे युवाओं के “डिजिटल विरोध” के रूप में देख रहे हैं। महुआ मोइत्रा जैसे कुछ नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड का समर्थन किया है।
CJP का 5-सूत्रीय घोषणापत्र
कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने व्यंग्यात्मक मैनिफेस्टो में कई मुद्दे उठाए हैं, जिनमें राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर निशाना साधा गया है।
- संसद और कैबिनेट में महिलाओं को 50% आरक्षण
- रिटायरमेंट के बाद CJI को राज्यसभा या सरकारी पद न दिया जाए
- पार्टी बदलने वाले सांसद-विधायकों पर 20 साल तक चुनाव लड़ने पर रोक
- वैध वोट हटने पर चुनाव आयुक्त पर सख्त कार्रवाई
- बड़े कॉर्पोरेट समूहों के स्वामित्व वाले मीडिया चैनलों के लाइसेंस रद्द करने की मांग
50% आरक्षण का वादा
CJP के घोषणापत्र में महिलाओं को संसद और कैबिनेट में 50% आरक्षण देने की बात सबसे ज्यादा चर्चा में है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इस मांग को गंभीर बहस का विषय बता रहे हैं।
“यह सिर्फ मजाक नहीं”
एक इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने कहा कि कई युवाओं ने उन्हें बताया कि उन्हें ऐसा प्लेटफॉर्म चाहिए, जहां वे खुलकर अपनी बात रख सकें। उनके मुताबिक CJP सिर्फ एक राजनीतिक व्यंग्य नहीं, बल्कि युवाओं की आवाज और सिस्टम के खिलाफ असंतोष का प्रतीक बन चुका है।











