सावन महीने में शिव ही नहीं उनके त्रिशुल की पूजा भी हैं फलदायी

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आज पूर्णिमा के खत्म होते ही आषाढ़ मास भी समाप्त हो जाएगा और इसके साथ ही शिव और उनके भक्तों का प्रिय सावन का महीना भी शुरु हो जाएगा। इस पूरे महीने में भगवान शिव का विशेष श्रृंगार किया जाता हैं। कहा जाता हैं कि भोलेनाथ के हाथों में विराजमान त्रिशुल के बिना उनका श्रृंगार अधुरा रहता हैं। शास्त्रों में त्रिशूल को भगवान शिव का प्रतीक माना गया है लेकिन इसे इतना महत्व आखिर क्यों दिया जाता हैं। आइए जानते हैं कि त्रिशुल के बिना शिव की कल्पना क्यों नहीं की जा सकती हैं।

शास्त्रों में बताया गया हैं कि त्रिशूल को भगवान शिव का अहम शस्त्र माना जाता हैं। त्रिशूल की पूजा करने को शिव की पूजा करने के बराबर माना गया है। ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक सावन माह में त्रिशूल की पूरी विधि-विधान से पूजा करने वाले लोगों पर भगवान शिव हमेशा प्रसन्न रहते हैं। माना जाता हैं कि सावन महीने में त्रिशूल दान करने से व्यक्ति के जीवन के सारे कष्ट समाप्त हो जाते हैं। कहते हैं कि अपनी उपस्थिति का अहसास करवाने के लिए भगवान शिव त्रिशूल के अलावा डमरू भी धारण करते हैं।

पुराण में प्रचलित कथाओं में बताया गया हैं कि शिव ने कैलाश पर्वत पर अपना निवास स्थान बनाया हैं। कहा जाता है कि शिव जी खूंखार जानवरों से बचने और पर्वतों पर चढ़ने के लिए त्रिशूल का इस्तेमाल करते हैं। यह भी कहा जाता है कि, भगवान शिव असुरों के संहार करने के लिए भी त्रिशूल का प्रयोग करते हैं।

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