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होली का धर्म है खुद भींगना, दूसरों को भिगो देना, सराबोर कर देना

Posted on: 13 Feb 2019 16:42 by mangleshwar singh
होली का धर्म है खुद भींगना, दूसरों को भिगो देना, सराबोर कर देना

 के. दाहिया

होली आने को है। होली दिलवालों की है। होली दिलजलों की भी हो सकती है। अगर आप मेरे बताए दिलफेंक उपायों पर दिल लगाकर अमल करें तो! यह त्यौहार प्यार का दुलार का, फाग का अनुराग का, रंग का तरंग का, गारी का पिचकारी का, खुमार का मनुहार का त्यौहार है। इसीलिए इसमें सब कुछ जायज है। ‘नाजायज’ तो फिल्मों में होता है। होली का धर्म है खुद भींगना, दूसरों को भिगो देना, सराबोर कर देना। होली का मर्म है आपस में मिल जाना। किसी का हो जाना।

तो इस होली के मनभावन पर्व पर सबसे पहले तो आप होली के बहाने अपने पड़ोसी को धन्य कर सकते हैं। यह प्रकृति का नियम है कि आपके पड़ोसी की धर्मपत्नी (आपकी पड़ोसन) अक्सर सुंदर होती है। सुंदर क्या, अति सुंदर होती है। अब ये पड़ोसनें सुंदर क्यों होती हैं, इस पर अलग हूक उठती होगी कि काश! मैं उससे मिल पाता। और गा पाता… सुंदरा…सुंदरा…अपने मन की बात अपने मन की कर पाता…। तो यकीन मानिए कि होली के मौके पर होली के बहाने आप अपने मन की यह अधूरी मुराद पूरी कर सकते हैं। अपने दिल की हसरत पूरी कर सकते हैं।

ये सुंदरता न केवल आपके पड़ोस में, बल्कि आपके दफ्तर में भी बसंत की तरह महकती है। तो आप अपने बॉस की नजर बचा कर उसके गोरे-गोरे गालों में गुलाल पोत सकते हैं। कुछ अति उत्साही लोग तो दो-चार हाथ बढ़ाकर वह सब भी कर बैठते हैं, जिसे यहां लिखना उचित नहीं होगा, लेकिन यकीन मानिए कि यह सब होली के बहाने ही संभव हो सकता है।

कुछ लोग तो होली के मौके पर सामाजिक रिश्ते में भी मिठास और नया रंग घोलने का सुप्रयास करते हुए रंगे हाथ पकड़े जाते हैं। अपनी घरवाली की सगी-सौतेली बहिन उर्फ अपनी साली को होली के बहाने धन्य कर देते हैं और यह बताने का प्रयास करते हैं कि दुनिया में इसके पूर्व न कभी कोई जीजा हुआ था, न होगा। साली के साथ होली मनाने के लिए आपको किसी की परमीशन लेने की जरूरत कदापि नहीं है। यह लायसेंस आपको शादी होते ही मिल जाता है, जो पूरी उम्र तक वैध होता है। यह आपकी औकात पर है कि आप किस उम्र तक इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। यदि आपकी कोई सगी साली न हो, तो भी आपको निराश होने की जरूरत नहीं है। ससुराल पक्ष में खुदा के फजल से दो-चार सालियां तो बोनस के रूप में मिलती ही हैं और साली का रिश्ता तो भगवान की दया से कुछ ऐसा बनता है कि यदि आपकी ससुराल की गांव की कोई महिला भी मिल जाए, तो उसे आप बेझिझक साली बनाने और उससे होली खेलने का दु:साहस कर सकते हैं। आगे आपकी हिम्मत और किस्मत के ऊपर है।

अगर आपकी अपने बॉस के साथ अनबन चल रही हो और आप उसे नीचा दिखाने के लिए मौके की तलाश में हों तो यकीन मानिए, होली जैसा बहाना तो आपको मिल ही नहीं सकता। इस मौके पर आप होली के बहाने मुबारकबाद देने पहुंच सकते हैं और साथ में एक किलो सोहन हलवा साथ ले जाना न भूलें। आप यकीन मानिए, कि आपका अवकाश, जी.पी.एफ., पेंशन या अन्य कोई भी पेचीदा मसला हो, उस पर गंभीरता से विचार शुरू हो सकता है। आपकी फाइल आसानी से उपलब्ध रहेगी और यदि आपने साहब की मेमसाहब के लिए कोई छोटा सा उपहार जैसे कांजीवरम की या सिल्क आदि की साड़ी या श्रंृगारदान आदि ले जा सकें तो आपका महाकल्याण संभव हो सकता है। यह सोने में सुहागा होगा। आपका काम हो जाने की पचहत्तर प्रतिशत उम्मीद है। बाकी पच्चीस प्रतिशत तो बाबू लोग संभाल लेते हैं। इतने में भी यदि आपका काम नहीं होता तो आप अगली होली में अपने बॉस को होली का ‘टायटिल’ भेंट कर सकते हैं। जैसे- ‘बीवी का गुलाम’, ‘रंगा सियार’ या ‘काठ का उल्लू’ आदि-आदि। कुछ लोग साल भर की भड़ास इस होली के बहाने टाइटिल में निकाल देते हैं। बेचारे बॉस को सब कुछ ग्रहण करना पड़ता है।

लेकिन होली के बहाने आप एक सबसे बड़ा काम यह कर सकते हैं कि अपने दुश्मनों को, जिनसे आप आमने-सामने नहीं भिड़ सकते, उसे होली के दिन अच्छा खासा पक्का रंग-रोगन, सिल्वर कलर, कालिख जो कुछ आपको आसानी से उपलब्ध हो जाए, आप उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। हां होली मुबारक कहना मत भूलिएगा। उसके कपड़े नोंच सकते हैं, तार-तार कर सकते हैं। उसे लहूलुहान करके सिर फोडक़र भी होली मुबारक कर सकते हैं।

जो कंजूस लोग होली का चंदा देने में आना-कानी करके आपके पीने-पिलाने के कार्यक्रम में रोड़ा अटकाते हों, होली के दिन ऐसे लोगों को ढूंढ़-ढूंढ़ कर मुबारकबाद देने का तरीका आप भी खोज सकते हैं। वह और भी रंगीन और कलात्मक हो सकता है।

लेकिन ध्यान रहे, यदि कोई आपसे भी ज्यादा होशियार, अति उत्साही निकले और आपको होली की ‘एडवांस’ मुबारकबाद दे दे, तो हमें दोष मत दीजिएगा। आखिर होली को तो मुबारक होना ही है न…।

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