चुनावी जंग ग्लैमर और बदजुबानी के बीच

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jaya prada ajam khan

बेशक उत्तरप्रदेश के रामपुर सीट पर मतदान हो चुका है, लेकिन जितनी कर्कशता यहां के चुनाव अभियान में छलकी वह लंबे समय तक याद की जाएगी। ऐसा लगा यह चुनाव भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा के ग्लैमर और समाजवादी नेता आजम खान की बदजुबानी के बीच लड़ा गया। हालात इतने बिगड़े कि आजम खान की एक टिप्पणी के चलते चुनाव आयोग को उन पर प्रतिबंध भी लगाना पड़ा।

उन्होंने रामपुर की ही एक रैली में कह डाला था- उनकी असलियत समझने में आपको सत्रह साल लगे। मैं सत्रह दिन में पहचान गया कि इनके नीचे का अंडरवेयर खारी रंग का है। बदजुबानी का सिलसिला यहीं नहीं थमा। चुनाव प्रचार के अंतिन दिन आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम ने जयाप्रदा को अनारकली तक कह डाला। इस पर भड़की जयाप्रदा बोलीं- जैसा बाप-वैसा ही बेटा है।

इस बयान से पता चलता है कि वह समाज की महिलाओं को किस नजर से देखते हैं। मैं तय नहीं कर सकती कि इस पर हंसें या रोएं। बेटा एकदम अपने बाप की तरह है। हालांकि उससे ऐसी उम्मीद नहीं थी। वह एक पढ़ा-लिखा जो है। पिता कहते हैं, मैं आम्रपाली हूं और पुत्र कह रहा है मैं अनारकली हूं। क्या समाज में महिलाओं को देखने का यही नजरिया है। इस सारी बहस के बीच जयाप्रदा को समाजवादी पार्टी की जगह भाजपा से टिकट दिलाने वाले उनके राजनीतिक शिल्पकार और समाजवादी पार्टी से ही राज्यसभा सदस्य अमरसिंह की टिप्पणी भी काबिल-ए-गौर थी।

उन्होंने आजम खान को राक्षस प्रवृत्ति का व्यक्ति और चंगेज खान का प्रतीक बताते हुए कहा आजम ने हमेशा महिलाओं के आबरू को तार-तार किया है, चाहे मायावती हों या नूर बानो। सबको लेकर वे हमेशा से गलत भाषा का प्रयोग करते रहे हैं। आजम ने तो मेरी बच्चियों पर भी तेजाब से हमले की धमकी दे डाली थी। इतिहास गवाह है कि जब-जब धरती पर राक्षस पैदा हुए हैं, तब-तब आदिशक्ति ने जन्म लेकर राक्षसों को मारा है। ऐसी ही एक शक्ति (जयाप्रदा) रामपुर आई है, जो राक्षस को मारकर भाजपा के सब देवताओं का उद्धार करेगी।

साथ में बताते चलें कि जयाप्रदा कुछ दिन पहले तक ही समाजवादी पार्टी में थी, लेकिन उन्हें रामपुर से टिकट नहीं दिया गया। हालांकि वे दो बार इसी लोकसभा सीट से जीतकर संसद में पहुंची है। इस बार की चुनावी जंग का नतीजा क्या होगा? इस पर सारे देश की निगाहें लगी है।

@जोग लिखी

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