हमारे सत्य सनातन धर्म के विभिन्न अंग वैज्ञानिकता के आधार से ही मूलतः जुड़े हैं। चाहे वो सनातन वैदिक पूजन पद्धति हो या फिर ज्योतिष या वास्तुशास्त्र हो इन सभी सनातनी आयामों की यदि जड़ें तालशी जाएतो वैज्ञानिकता की सैद्धांतिक उपस्थिति अनिवार्य रूप से देखने को मिलेगी। इसी आधार पर वास्तुशास्त्र से जुड़े सभी सिद्धांत भी मूलतः वैज्ञानिकता के आधार पर निश्चित किए गए हैं। वास्तुशास्त्र के अंतर्गत जल अथवा पानी से जुड़े कुछ कर्म बताए गए हैं, जिनका विधिवत और श्रद्धावत पालन करने से अत्यंत ही शुभ फलदायक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं, इसके साथ ही आपके घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है ।

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गंगा जल का करें ये कार्य

सनातन धर्म और वास्तुशास्त्र के हिसाब से गंगा नदी के जल को अत्यंत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के शरणों से निकली गंगा को भगवान शिव ने अपने शीश पर धारण किया और राजा भागीरथ के सद्प्रयासों से पृथ्वी पर अवतरित किया। महाभारत के सबसे महत्वपूर्ण पात्र भीष्म पितामह को गंगा नदी का पुत्र माना जाता है। गंगा नदी हमारे देश के सबसे पवित्र नदी मानी जाती है। वास्तु शास्त्र के हिसाब से अपने घर के पूजन स्थल पर उपस्थित सभी देवी देवताओं के विग्रह को गंगा के जल को सामान्य जल में मिलाकर स्नान कराना चाहिए। इसके बाद स्नान कराए गए जल का छिड़काव घर के मुख्यद्वार से लेकर के अन्य सभी हिस्सों में करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक का प्रादुर्भाव होता है और नकारात्मकता का हास होता है।

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तांबे के लोटे में जल भरकर करें छिड़काव

वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि घर में गंगा जल उपस्थित नहीं है तो आप उसके स्थान पर ताम्बे के लोटे या कलश में शुद्ध जल भर कर भी घर के मुख्यद्वार और अन्य हिस्सों में छिड़काव कर सकते हैं। जहां यह प्रक्रिया धार्मिक मान्यता से जुडी है वहीं इसके पीछे छिपी वैज्ञानिकता सामान्य साफ़ सफाई से जुडी है और कि अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। वास्तुशात्र के हिसाब से ताम्बे के लोटे में जलभर कर घर के सभी हिस्सों में छिड़कने से घर में पवित्रता बनी रहती है और रिद्धि सिद्धि और शुभ लाभ की उपस्थिति भी बनी रहती है।

पानी में मिलाएं हल्दी और करें ये काम

हल्दी को हमारे देश और धर्म में सबसे महत्वपूर्ण औषधि के रूप में जाना जाता है, जिसका उपयोग खाने के मसाले के रूप में मुख्यतः देश के प्रत्येक घर में होता है। इसके साथ ही सत्य सनातन पूजन पद्धतियों में भी हल्दी का विशेष महत्व बताया गया है, जोकि सभी देवी देवताओं को अर्पित की जाती है केवल महादेव को छोड़कर। वास्तु शास्त्र के अनुसार एक ताम्बे के लोटे में स्वच्छ जल भरकर उसमे एक चुटकी हल्दी डालकर, सच्चे मन से ईश्वर का ध्यान करते हुए घर की देहलीज पर अर्पित करने से घर में सकारात्मकता और सुख समृध्दि का प्रवेश होता है और नकारात्मकता की विदाई होती है और साथी शुभलाभ और रिद्धि सिद्धि की वृद्धि होती है ।