कलेक्टर मनीष सिंह ने भांग माफिया को देवास से किया गिरफ्तार, मुनक्का निर्माताओं के साथ सांठगांठ की होगी जांच

इंदौर जिले में जो 17 मुनक्का निर्माता हैं , उनके साथ भी भांग माफिया की तगड़ी सांठगांठ है. स्वीकृत औषधीय फार्मूले के तहत मुनक्का ना बनाते हुए उसमें नशे के लिए अत्यधिक मात्रा में तस्करी के जरिए लाई जाने वाली सस्ती भांग और अन्य आपत्तिजनक सामग्री डाली जाती है

कलेक्टर मनीष सिंह ने पिछले दिनों भांग माफिया मंजूर खान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी 28 दुकानों का ठेका निरस्त कर दिया था और फिर उसे रासुका में भी निरुद्ध कर दिया . यह पहला मौका है जब इंदौर में किसी भांग माफिया के खिलाफ इस तरह की बडी कार्यवाही की गई हो . मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभी तरह के माफिया के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं , जिसके चलते पहली अब भांग के साथ-साथ मुनक्का निर्माताओं की जांच भी कराई जा रही है. रासुका में निरुद्ध भांग माफिया मंजूर खान को पुलिस ने देवास स्थित फार्म हाउस से गिरफ्तार कर लिया है और उसे केंद्रीय जेल भेजा जा रहा है.

कलेक्टर मनीष सिंह को यह भी शिकायत मिली कि इंदौर जिले में जो 17 मुनक्का निर्माता हैं , उनके साथ भी भांग माफिया की तगड़ी सांठगांठ है. स्वीकृत औषधीय फार्मूले के तहत मुनक्का ना बनाते हुए उसमें नशे के लिए अत्यधिक मात्रा में तस्करी के जरिए लाई जाने वाली सस्ती भांग और अन्य आपत्तिजनक सामग्री डाली जाती है, जिससे समाज के गरीब वर्ग के साथ-साथ युवा भी नशे के लिए उसका सेवन करते हैं. इंदौर में सनन , मस्तान, काला घोड़ा , माहेश्वरी जैसे ब्रांड मुनक्का के बड़े उत्पादक है , नियम के तहत मुनक्का में लगने वाली भांग लाइसेंसी दुकानों से ही खरीदी जाना चाहिए लेकिन बड़े पैमाने पर मुनक्का निर्माता भांग माफिया के साथ संगनमत होकर अवैध कारोबार में लिप्त है.

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कलेक्टर मनीष सिंह भांग माफिया के साथ-साथ मुनक्का निर्माताओं के खिलाफ भी जांच करवा रहे हैं , इसमें ऐसे कुछ चर्चित नाम भी शामिल है , जो रियल स्टेट सहित अन्य कारोबार से भी जुड़े हुए हैं . मंजूर खान भी चर्चित नफीस बेकरी परिवार से संबद्ध है . अपहरण, मादक पदार्थों की तस्करी से लेकर कई अन्य आपराधिक कृत्यों में मंजूर खान की लिप्तता रही है.

प्रशासन द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि भांग की 28 दुकानों की संख्या कम करने या कुछ दुकानों की लोकेशन को निरस्त करने का भी प्रस्ताव शासन को भेजा जाए तथा सीमित संख्या में अलग-अलग दुकानों का ग्रुप बनाकर उनका ठेका दिया जाए ताकि भविष्य में कोई सुनियोजित एवं संगठित भांग माफिया इस तरह पनप ना सके .