कलकत्ता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने देश के सबसे पुराने मुकदमों में से एक को 72 साल के बाद के बाद निपटाने का काम पूरा कर दिया। यह केस भारत का सबसे पुराना केस था। मामला पूर्ववर्ती बेरहामपुर बैंक की परिसमापन कार्यवाही से संबंधित है। यह केस 1951 का था। कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्रीवास्तव भी केस फाइल होने के पूरे एक दशक के बाद जन्मे थे। 1951 का यह केस खत्म होने के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट को भी बड़ी राहत मिली।

फिलहाल कोलकाता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) को इस बात से राहत मिली होगी कि पूर्ववर्ती बेरहामपुर बैंक लिमिटेड (Berhampore Bank Ltd) को बंद करने की कार्यवाही से संबंधित मुकदमेबाजी अंतत: खत्म हो गई। फिर भी कलकत्ता हाईकोर्ट को अभी भी देश के पांच सबसे पुराने लंबित मामलों में से दो का निपटारा करना बाकी है। ये सभी मुकदमे 1952 में दायर किए गए थे।

नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिग (national judicial data grid) में 9 जनवरी तक बहरामपुर केस ही सबसे पुराना था। जब जस्टिस रवि कृष्ण कपूर ने पिछले साल 19 सितंबर को केस के निपटारे के आदेश पर हस्ताक्षर किए, इसे सील किया गया और टाइपोग्राफिकल सुधार के साथ दिया गया। जब कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस बैंक को दिवालिया घोषित किया, तो मामले को 19 नवंबर 1948 को बंद कर दिया गया था।

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अब देश के सबसे पुराने मुकदमों में चिन्हित पांच में से केवल तीन मामले पेंडिंग हैं। इनमें से दो मामलों की सुनवाई मालदा के सिविल कोर्ट में लंबित है। जबकि तीसरा मामला मद्रास हाईकोर्ट में पेंडिंग है। देश के बाकी सबसे पुराने तीन मामलों में से दो दीवानी मुकदमे बंगाल के मालदा की दीवानी अदालतों में चल रहे हैं और एक मद्रास हाईकोर्ट में लंबित है।

जानिए क्या है मामला
बेरहामपुर बैंक ने खूब कर्जे बांटे थे, लेकिन वसूली नहीं हो पा रही थी। इसके चलते यह बैंक देनदारों के साथ मुकदमेबाजी में उलझ गया। इनमें से कई कर्जदारों ने बैंक के खिलाफ चुनौती याचिका दाखिली की थी। परिणाम स्वरुप बैंक के लिक्विडेशन तक मामला पहुंच गया। यह मामला खींचते हुए अब तक चला आ रहा है। पिछले साल सितंबर महीने में ही यह मामला दो बार हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए रखा गया था।