Budget 2022 : सबसे लंबे भाषण से लेकर टैबलेट तक ऐसे पेश होता आया है बजट, जानें 10 जरुरी बातें

Budget 2022 : आज देश का आम बजट (Budget)  पेश कर रही है केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ।

Budget 2022

Budget 2022 : आज देश का आम बजट (Budget)  पेश कर रही है केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) । ये उनका चौथा बजट है और इस बार भी बजट पेपरलेस रूप में पेश किया जा रहा है। सरकार ने दावा किया है कि इस बजट में सभी के लिए कुछ ना कुछ रखा गया है। आज हम आपको इस बजट से जुड़ी 10 ऐसी रोचक बाते बताने जा रहे है जो सभी को पता होना चाहिए। आज हम आपको सबसे लंबे भाषण से लेकर ‘बही खाता’ और टैबलेट तक की वो सभी बाते बता रहे है जो बेहद जरुरी होती है। तो चलिए जानते है –

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भारत के बजट के बारे में 10 रोचक बातें-

जानकारी के मुताबिक, भारत का पहला बजट 7 अप्रैल 1860 में पेश किया गया था। उस वक्त ईस्ट इंडिया कंपनी के स्कॉटिश अर्थशास्त्री और राजनेता जेम्स विल्सन ने इसे ब्रिटिश क्राउन को पेश किया था।

इसके बाद स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 में तत्कालीन वित्त मंत्री आरके षणमुखम शेट्टी ने पेश किया था।

जानकारी के अनुसार, 1 फरवरी 2020 को केंद्रीय बजट 2020-21 पेश करते वक्त सबसे लंबे भाषण का रिकॉर्ड वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम दर्ज किया गया। दरअसल, उस समय उन्होंने लगातार 2 घंटे 42 मिनट तक अपनी बात रखी थी। लेकिन उसके बाद अब स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के चलते उन्होंने अपना भाषण कम करने का फैसला किया। हालांकि, तब भी स्पीच के दो पन्ने बाकी रह गए थे।

इसके अलावा पहले भी शब्दों के लिहाज से मनमोहन सिंह ने साल 1991 में सबसे लंबा भाषण दिया था। दरअसल, पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के कार्यकाल में पेश बजट में उनके भाषण में 18 हजार 650 शब्द थे। वहीं 2018 में वित्त मंत्री रहे अरुण जेटली के भाषण में 18 हजार 604 शब्द थे।

उसके बाद फिर सबसे छोटे बजट भाषण का रिकॉर्ड वित्त मंत्री हीरूभाई मुलजीभाई पटेल ने बनाया था। दरअसल, 1977 में उन्होंने 800 शब्दों का भाषण दिया था।

बता दे, साल 1999 तक केंद्रीय बजट फरवरी के अंतिम कार्यदिवस पर शाम 5 बजे पेश किया जाता था। लेकिन बाद में ब्रिटिश काल से चली आ रही यह प्रक्रिया को तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने बदल कर सुबह 11 बजे कर दिया था। साथ ही अरुण जेटली ने व्यवस्था बदलकर 1 जनवरी 2017 से बजट पेश करना शुरू किया।

जानकारी के मुताबिक, 1955 तक केंद्रीय बजट अंग्रेजी में पेश किया जाता था। लेकिन बाद में कांग्रेस सरकार ने बजट से जुड़े दस्तावेजों को हिंदी और अंग्रेजी में छपवाने का फैसला किया।

उसके बाद साल 2017 तक रेलवे और यूनियन बजट अलग-अलग पेश किया जाता था। लेकिन ये प्रक्रिया भी 92 सालों तक चली। उसके बाद 2017 दोनों बजट को एक साथ पेश किया जाने लगा।

बताया जाता है कि पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के बाद साल 2019 में निर्मला सीतारमण बजट पेश करने वाली दूसरी महिला बनीं। गांधी ने 1970-71 के लिए बजट पेश किया था।

इसके बाद अब तक सीतारमण ने ब्रीफकेस को हटाते हुए बजट से जुड़े दस्तावेजों के लिए ‘बही खाता’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन कुछ सालों से पेपरलैस बजट के चलते बही खाता को भी शामिल नहीं किया जा रहा है। वित्त मंत्री टैबलेट के सहारे बजट भाषण देती हैं।