इस वजह से दुनिया में चर्चा का केंद्र बन गए थे स्वामी सत्यमित्रानंद महाराज

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नई दिल्ली: भारत मां के परम आराधक, निवृत्त-जगद्गुरू शंकराचार्य, पद्मभूषण पूज्य गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि जी महाराज मंगलवार को ब्रह्मलीन हो गए। महाराज के निधन का समाचार मिलते ही संत समजा सहित हिन्दू समाज में शोक की लहर छा गई। सनातन संस्कृति के पुरोधा और विश्व में वैदिक संस्कृति का प्रचार करने में जगद्गुरू शंकराचार्य अग्रणी रहते थे। बुधवार को शाम 4 बजे भारत माता जनहित ट्रस्ट के राघव कुटीर के आंगन में उन्हें समाधि दी जाएगी।

स्त्यामित्रानंद महाराज का देश में जितना सम्मान था उन्ती ही ख्याति विदेशों में भी थी। सद्भाव, सांप्रदायिक सौहार्द और समन्वय भाव के प्रसार के लिए उन्होंने दुनिया के 65 से अधिक देशों की यात्रा की थी। उनकी इन्ही सेवाओं को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च सम्मान पद्मभूषण से सम्मानित किया था।

दुनिया में बने थे चर्चा का विषय

पद्मभूषण निवृत्त स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज उस समय पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गए थे जब उन्होंने पतित पावनी गंगातट सप्तसरोवर पर साल 1983 में अपने आप में अनोखे 108 फीट ऊंचे आठ मंजिला भारत माता मंदिर की स्थापना की थी। भारत माता का यह ऐसा मंदिर है जिसे देश के निर्माण और रक्षा में सर्वस्व त्याग कर आहुति देने वाले भारतमाता के सपूतों को समर्पित किया गया है।

स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी के अनुसार उन्होंने यह मंदिर देश के ऐतिहासिक रत्नों को देवतुल्य मूर्ति का रूप देकर उनकी याद, देश के लिए दी गई उनकी सेवाओं, त्याग और बलिदान को याद करने, आने वाली पीढ़ी को इसकी जानकारी देने के लिए निर्मित कराया था।

मंदिर की पहली मंजिल पर भारत माता की मूर्ति स्थापित है। दूसरी पर ‘शूर मंदिर’ जिसमें देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले प्रमुख शूरवीरों और वीरांगनाओं को जगह दी गई है। तीसरी मंजिल पर ‘मातृ मंदिर’ है, यह स्त्री शक्ति को समर्पित है।चौथी मंजिल ‘महान भारतीय संतों’ को समर्पित है। पांचवीं मंजिल विभिन्न धर्मों की झांकियों, इतिहास और भारत के विभिन्न भागों की सुंदरता को समर्पित है। छठी मंजिल पर ‘शक्ति मंदिर’ है, यह आदि शक्ति की प्रतीक दुर्गा, पार्वती, राधा, काली, सरस्वती आदि को समर्पित है। सातवीं मंजिल पर भगवान विष्णु के दस अवतार स्थापित हैं। आठवीं मंजिल प्रकृति, आध्यात्म और पर्यावरण के साथ भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर में रेत से भारत का नक्शा बनाया गया है और इसे लाल, नीली रोशनी से सजाया गया है।

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