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खूबसूरत लोग खूबसूरत घाटी डोडरा-क्वार

Posted on: 09 Feb 2019 12:46 by Ravindra Singh Rana
खूबसूरत लोग खूबसूरत घाटी डोडरा-क्वार

गुरमीत बेदी

शिमला से करीब दो सौ दस किलोमीटर दूर उत्तरप्रदेश की सीमा से सटे अत्यंत दुर्गम क्षेत्र डोडरा-क्वार का प्राकृतिक सौंदर्य जितना नयनाभिराम है, वहां की परंपराएं व संस्कृति उतनी ही निराली। यह क्षेत्र शिमला जिले का उपमंडल भी कहलाता है। यहां पहुंचने के लिए खतरनाक चांशल दर्रा पार करना पड़ता है, जो समुद्र तल से लगभग चौदह हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यह दर्रा वर्ष में लगभग छह मास बर्फ की सफेद चादर से ढंका रहता है।

स्थानीय लोग खुशगवार मौसम में ही इस दर्रे को दोपहर से पूर्व पार करने की सलाह देते हैं, क्योंकि इसके बाद तेज हवाओं के चलते से इस दर्रे को लांघना अत्यंत जोखिम भरा होता है। डोडरा और क्वार दो अलग-अलग गांव है। इनकी परस्पर दूरी मात्र छह किलोमीटर है। चूंकि दोनों ही गांवों की संस्कृति व परंपराओं में समानता है, अत: घुम्मकड़ों ने इसका एक नाम डोडरा-क्वार कर दिया है। चांशल दर्रे से भी ये दोनों गांव एकाकार नजर आते हैं। इस दर्रे पर भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर है। डोडरा-क्वार की ओर कूच करने से पूर्व इस मंदिर में शीश नवाना जरूरी समझा जाता है। लेकिन भक्तजन मंदिर में पैसे नहीं चढ़ाते, अपितु श्रद्धानुसार भगवान शिव को छोटे-छोटे पत्थर ही भेंट करते हैं।

डोडरा-क्वार पहुंचने से पूर्व पचास से अधिक किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ता है। उत्तरप्रदेश के उत्तरकाशी जिले के नेटवाड़ क्षेत्र से यहां का फासला कुछ कम है, लेकिन चालीस किलोमीटर फिर भी पैदल चलना ही पड़ता है। चांशल दर्रा जब भारी चलना ही पड़ता है। चांशल दर्रा जब भारी बर्फबारी से ढंक जाता है, तो लोक नैटवाड़ क्षेत्र से ही यहां पहुंचते हैं।

यह रास्ता कभी-कभी कुछ दिनों के लिए ही बंद होता है। रूप्पन नदी इस क्षेत्र से बिल्कुल सटकर बहती है और यहां के निवासियों के लिए आस्था की प्रतीक है। रूप्पन नदी के किनारे समुद्र तल से करीब सात हजार फुट ऊंचाई पर डोडरा गांव स्थित है। इस गांव की आबादी लगभग एक हजार है। यहां कुल मिलाकर डेढ़ सौ घर हैं। घरों के निर्माण में लकड़ी और स्लेटों का इस्तेमाल हुआ है। डोडरा से छह: किलोमीटर आगे ‘क्वार’ गांव है। यह गांव भी नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण है और यहां के लोगों का रहन-सहन, पहनावा, संस्कृति ‘डोडरा’ निवासियों की तरह ही है। इन दोनों गांवों में यद्यपि विकास की लहर तेज हो रही है, लेकिन विद्युत सुविधा बिल्कुल नहीं है।

इस उपमंडल के लोग भी बहुत ही धर्मभीरू व अंधविश्वासी हैं। पूरे उपमंडल में ‘जाख देवता’ की ही महिला है। एक तरह से यहां का पूरा जनजीवन जाख देवता के इर्द-गिर्द ही घूमता है। विवाह की तिथि भी देवता ही निश्चित करता है और कोई भी समारोह-त्यौहार देवता की आज्ञा या उपस्थिति के बिना संपन्न नहीं माना जाता। लोगों के झगड़ों का निपटारा भी देवता ही करता है और देवता का निर्णय नजरअंदाज करने की हिम्मत किसी में नहीं होती। इस समूचे क्षेत्र में स्थान-स्थान पर ‘जाख देवता’ के मंदिर बने हुए हैं। इनमें से कई मंदिर अत्यंत प्राचीन हैं। हर वर्ष श्रावण-भादों के महीने में यहां देवपर्व के रूप में मेलों का आयोजन किया जाता है, जिसमें गीत, संगीत और नृत्य के कार्यक्रम भी होते हैं।

जाख देवता का सर्वाधिक विख्यात व प्राचीन मंदिर डोडरा गांव में है। सतलुज शैली में निर्मित इस मंदिर की काष्ठ कलाएं देखने योग्य है। इसी तरह सभी गांवों के ग्रामीण देवता अक्सर एक-दूसरे के यहां आते-जाते रहते हैं। ये देवता अक्सर रूठते भी हैं, मनुहार से मानते भी हैं और ग्रामीणों से बातचीत भी करते हैं। डोडरा-क्वार के लोग अपने हर सामाजिक धार्मिक आयोजन में देवता की शिरकत जरूरी समझते हैं। शादी-विवाह के संस्कार भी यहां निराले हैं। वैसे तो अधिकतर प्रेम-विवाह ही यहां होते हैं, लेकिन अभिभाषकों द्वारा निर्धारित विवाहों की तिथियां देवता ही निश्चित करता है। इस उपमंडल की महिलाएं गजब की खूबसूरत होने के साथ मेहनती और आभूषणप्रेमी भी बहुत हैं। सैलानियों का स्वागत यहां के लोग खुले दिल से करते हैं।

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