नागरिकता संशोधन बिल पर बोले अमित शाह- नेहरू की एक और गलती को सुधारा

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नई दिल्ली। लोकसभा में करीब आठ घंटे तक चली लंबे बहस के बाद आखिरकार केंद्र सरकार ने 9 दिसंबर को नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पास करवा लिया है। हालांकि बहस के दौरान कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने बिल का जमकर विरोध किया है। कांग्रेस ने इसे संविधान का काला दिन बताया, तो ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता संशोधन बिल का विरोध करते हुए बिल की कॉपी को सदन में फाड़ दिया। वहीं बिल पास होेने के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि नेहरू-लियाकत समझौते की गलती को आज मोदी सरकार ने सुधारने का काम किया है। अब यह बिल 11 दिसंबर को राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

बहस के बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने नागरिकता संशोधन बिल 2019 को पास करने की घोषणा की। विधेयक के पक्ष में 311 और विपक्ष में 80 वोट पड़े। इस बिल को पास कराने में शिवसेना ने भी मोदी सरकार का साथ दिया। नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 लोकसभा में पास होने पर पीएम नरेंद्र मोदी ने गृहमंत्री अमित शाह की तारीफ की। पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा है कि प्रसन्नता है कि लोकसभा ने एक समृद्ध और व्यापक बहस के बाद नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 पारित किया है. मैं विभिन्न सांसदों और पार्टियों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने विधेयक का समर्थन किया, यह विधेयक भारत के सदियों पुराने लोकाचार और मानवीय मूल्यों में विश्वास के अनुरूप है।

अगले ट्वीट में पीएम मोदी ने कहा है कि मैं विशेष रूप से गृह मंत्री की सराहना करना चाहूंगा। अमित शाहजी ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 के सभी पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझाया। उन्होंने लोकसभा में चर्चा के दौरान संबंधित सांसदों द्वारा उठाए गए विभिन्न बिंदुओं के विस्तृत जवाब भी दिए। लोकसभा में बहस के दौरान विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि मैंने पहले ही कहा कि ये बिल लाखों- करोड़ों शरणार्थियों को यातनापूर्ण जीवन से मुक्ति दिलाने का जरिया बनने जा रहा है। इस बिल के माध्यम से उन शरणार्थियों को नागरिकता देने का काम होगा। गृहमंत्री शाह ने कहा कि इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर न होता तो मुझे बिल लाने की जरूरत ही नहीं होती। सदन को ये स्वीकार करना होगा कि धर्म के आधार पर विभाजन हुआ है।

जिस हिस्से में ज्यादा मुस्लिम रहते थे वो पाकिस्तान बना और दूसरा हिस्सा भारत बना। नेहरू-लियाकत समझौते में भारत और पाकिस्तान ने अपने अल्पसंख्यकों का ध्यान रखने का करार किया, लेकिन पाकिस्तान ने इस करार का पालन नहीं किया। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के संविधान में इस्लाम को राज्य धर्म बताया है। वहां अल्पसंख्यकों को न्याय मिलने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है। किसी भी व्यक्ति को अपने परिवार की बहन-बेटी को या अपने धर्म को बचाने के लिए यहां आना पड़े और हम अपनाए नहीं, ये गलती हम नहीं कर सकते। हम उन्हें जरूर स्वीकारेंगे, नागरिकता देंगे और पूरे विश्व के सामने उन्हें सम्मान भी देंगे।

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