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आखिर आर्टिकल-15 का विरोध क्यो…?

Posted on: 05 Jul 2019 18:25 by Surbhi Bhawsar
आखिर आर्टिकल-15 का विरोध क्यो…?

नीरज राठौर

मैंने आर्टिकल-15 फिल्म को देखने से पहले भारत के संविधान में आर्टिकल-15 को पढ़ा। आर्टिकल-15 में साफ लिखा है…

धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा…। इस एक लाइन में पूरे आर्टिकल का सार है, फिर विरोध क्यो..?

फिल्म में भी यही बताया गया कि किस तरह से एक जाति विशेष के लोगों के साथ हर तरह से अन्याय, अत्याचार होते हैं, उनकी बहन-बेटियां तक सुरक्षित नहीं रहती है. बलात्कार के बाद मार दी जाती है, सरकारी तंत्र भी इन अत्याचारों को रोकने के बजाय, उसमें शामिल हो जाता है।

आखिर दूर-दराज गांवों में क्या हो रहा है, यह बात भोपाल-दिल्ली तक नहीं पहुंच पाती। फिल्म का विरोध करने के बजाय, उसे जनजागरूकता के लिए अधिक से अधिक तौर पर दिखाई जाना चाहिए…

फिल्मी की खासियत..

फिल्म की सबसे खासियत बात यह है कि फिल्म का जो वर्ग विरोध कर रहा हैं, उसी वर्ग से का किरदार हीरो बना है और वर्गभेद को उखाड़ फेंक इंसानियत का साथ देता है और शोषितों की आवाज बनता है। तो मेरा मनना है विरोध करने से पहले आर्टिकल-15 देखना चाहिए…

आप लोगों की जानकारी के लिए आर्टिकल-15 की पूरी जानकारी-
अनुच्छे- उपखंड सहित… पढ़िए और जानिए..

संविधान में – आर्टिकल-15 का क्रमवार जिक्र…

धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेद

  • राज्य के किसी भी नागरिक के विरूद्ध धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।
  • कोई नागरिक केवल धर्म, मूलवंश, जाति लिंग या जन्मस्थान या इनमें किसी के आधार पर।

(क) दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलो और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश पर।

(ख) पूर्णत: या भगत: राज्य-निधि से पोषित या साधरण जनता के प्रयोग के लिए समर्पित कुओं, तालाबों, स्नानघाटों, सड़कों और सार्वजनिक समागम के स्थानों के उपयोग के संबंध में किसी भी निर्योग्यता, दायित्व, निर्बधन या शर्त के अधीन नहीं होगा।

  • इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य को स्त्रियों और बालकों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवासरित नहीं करेगा।
  • इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खंड (2) की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्ही वर्गों की उन्नति के लिए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगा।
  • इस अनुच्छेद या अनुच्छेद ़19 के खंड (1) के उपखंड (छ) की कोई बात राज्य के सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए अनुसूचित जातियों-जनजातियों के लिए विधि द्वारा कोई विशेष उपबंध करने से निवारित करेगी, जहां ऐसे विशेष उपबंध अनुच्छेद 30 के खंड (1) में निर्दिष्ट अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थाओं से भिन्न, शिक्षा संस्थाओं में, जिनके अतंर्गत पाइवेट शिक्षा संस्थाए भी है, चाहे वे राज्य से सहायता प्राप्त हो या नहीं, प्रवेश से सबंधित है।

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