मध्य प्रदेश में विकास की रफ्तार अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों, कस्बों और दूर-दराज के मजरों तक भी पहुंच रही है। आने वाले समय में राज्य के 29 जिलों में ऐसी तस्वीर देखने को मिलेगी, जहां छोटे-छोटे बस्तियों को भी बेहतर सुविधाओं से जोड़ा जाएगा।
राज्य सरकार की ‘सुगम संपर्कता’ पहल के तहत जिला स्तर पर 1771 नई सड़कों के निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को लेकर अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए हैं, ताकि काम तेजी और पारदर्शिता के साथ पूरा हो सके।
1000 करोड़ की लागत से बनेगा सड़क नेटवर्क
करीब 1000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली ये सड़कें गांवों, मजरों और सांदीपनि स्कूलों को मुख्य मार्गों से जोड़ेंगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि अब दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाओं तक आसानी से पहुंच मिल सकेगी।
7 हजार से ज्यादा सड़कों का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। पूरे प्रदेश में कुल 7135 सड़कों का नेटवर्क विकसित करने की योजना है, जिसमें फिलहाल 1771 सड़कों को हरी झंडी मिल चुकी है। इसके लिए जिलों में सर्वे का काम भी शुरू कर दिया गया है और चरणबद्ध तरीके से सड़क निर्माण किया जाएगा।
इस परियोजना में तकनीक का भी खास इस्तेमाल किया जाएगा। Geo-inventory के जरिए सड़कों की मैपिंग होगी, जिससे एक ही जगह पर दोबारा निर्माण जैसी गड़बड़ियों से बचा जा सके।
SIPRI सॉफ्टवेयर रखेगा नजर
‘SIPRI’ सॉफ्टवेयर के माध्यम से सड़कों और पुलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी, जिससे हर स्तर पर गुणवत्ता और निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
गांवों की बदलेगी तस्वीर
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ 100 से ज्यादा आबादी वाले मजरों और टोलों को मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से न सिर्फ यातायात आसान होगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर भी तेजी से बदलती नजर आएगी।











