होली पर यात्रा से पहले जानें प्लान, इस तारीख को सफर करने से बचें, वरना हो सकती है परेशानी

Author Picture
By Pinal PatidarPublished On: February 25, 2026

मार्च के पहले सप्ताह की शुरुआत इस बार होली के रंगों के साथ हो रही है। दीपावली के बाद यह साल का सबसे बड़ा और बहुप्रतीक्षित त्योहार माना जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग अपने गृह नगर जाने की तैयारी कर रहे हैं। यदि आप भी यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है, क्योंकि परिवहन व्यवस्था में संभावित बदलाव आपके सफर को प्रभावित कर सकता है।

2 मार्च से मध्यप्रदेश में बेमियादी बस हड़ताल की चेतावनी

मध्यप्रदेश में नई परिवहन नीति के विरोध में MP Bus Owners Association ने 2 मार्च 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। बस संचालकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो वे प्रदेशभर में बसों का संचालन बंद कर देंगे। इस हड़ताल से रोजाना सफर करने वाले करीब डेढ़ लाख से अधिक यात्रियों पर असर पड़ सकता है।

परिवहन विभाग को सौंपा गया ज्ञापन, जिलों में तैयारियां तेज

बस ऑपरेटर संगठन द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में आरटीओ और परिवहन अधिकारियों को मांग पत्र के साथ हड़ताल की पूर्व सूचना दे दी गई है। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर सहित कई बड़े शहरों में संगठन के बैनर तले आंदोलन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। यदि हड़ताल लागू होती है तो त्योहार के समय सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमरा सकती है।

होलिका दहन और चंद्र ग्रहण को लेकर असमंजस

2 मार्च को शाम 5:45 बजे से भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो 3 मार्च की सुबह 5:23 बजे तक रहेगा। इसके बाद खंड चंद्र ग्रहण की स्थिति बनेगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में होलिका दहन नहीं किया जाता। ऐसे में तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। अधिकांश स्थानों पर 2 मार्च को होलिका दहन की तैयारी है और 3 मार्च को धुलेंडी मनाई जाएगी, जबकि कुछ क्षेत्रों में 4 मार्च को रंगोत्सव मनाने की संभावना है।

परमिट प्रक्रिया बनी विवाद की मुख्य वजह

बस ऑपरेटरों का आरोप है कि नई नीति के तहत स्टेज कैरिज परमिट के आवंटन और नवीनीकरण की प्रक्रिया को पहले से अधिक जटिल बना दिया गया है। उनका कहना है कि दस्तावेजी औपचारिकताएं और शर्तें इतनी कठिन हैं कि सामान्य संचालकों के लिए उन्हें पूरा करना मुश्किल हो रहा है। इससे छोटे और मध्यम स्तर के ऑपरेटर खासे परेशान हैं।

बढ़ती लागत, किराए में लचीलापन नहीं

डीजल की कीमतों, वाहन स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस खर्च में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके बावजूद किराया दरों में संशोधन को लेकर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट और लचीली नीति सामने नहीं आई है। बस संचालकों का कहना है कि मौजूदा किराया ढांचा उनकी लागत को पूरा नहीं कर पा रहा, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

शुल्क वृद्धि से छोटे ऑपरेटरों पर दबाव

परमिट और उसके नवीनीकरण शुल्क में बढ़ोतरी को भी विरोध का बड़ा कारण बताया जा रहा है। संगठन का दावा है कि इसका सबसे ज्यादा असर छोटे बस मालिकों पर पड़ेगा, जिनकी आर्थिक स्थिति पहले से कमजोर है। यदि समाधान नहीं निकला तो हड़ताल लंबी चल सकती है, जिससे त्योहार के समय यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।