एमपी में चना-मसूर खरीदी का काउंटडाउन शुरू, पंजीयन की तारीख घोषित, जानें MSP और अंतिम तिथि

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By Raj RathorePublished On: February 21, 2026

मध्य प्रदेश में रबी सीजन की दो प्रमुख दलहनी फसलें, चना और मसूर, इस बार भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी जाएंगी। इसके लिए किसान पंजीयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार की ओर से जारी व्यवस्था के मुताबिक, केवल पंजीकृत किसानों से ही समर्थन मूल्य पर उपज खरीदी जाएगी। इसलिए किसानों को तय अवधि के भीतर अपना पंजीयन पूरा करना जरूरी है।

राज्य में चना और मसूर का रकबा बड़ा है और दोनों फसलें किसान आय में अहम हिस्सा रखती हैं। ऐसे में समर्थन मूल्य पर खरीदी की शुरुआत से पहले पंजीयन को सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। प्रशासनिक स्तर पर यह प्रक्रिया खरीदी केंद्रों की योजना, अनुमानित आवक और भुगतान प्रबंधन को व्यवस्थित करने के लिए की जाती है।

सरकारी तंत्र की प्राथमिकता यह रहती है कि वास्तविक उत्पादक किसान ही पोर्टल पर दर्ज हों और खरीदी के दौरान किसी तरह की तकनीकी या दस्तावेजी बाधा न आए। इसी वजह से पंजीयन से जुड़े दस्तावेज, भूमि रिकॉर्ड और बैंक खाते जैसी जानकारियों की शुद्धता पर जोर दिया जाता है।

पंजीयन क्यों जरूरी है

एमएसपी खरीदी व्यवस्था में किसान पंजीयन बुनियादी शर्त है। पंजीयन के आधार पर ही किसान का नाम खरीदी सूची में आता है, केंद्र आवंटन होता है और बाद की भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ती है। यदि कोई किसान निर्धारित समय में पंजीयन नहीं कराता, तो वह समर्थन मूल्य पर बिक्री का लाभ लेने से वंचित रह सकता है।

चना और मसूर जैसी दलहनी फसलों में बाजार भाव में उतार-चढ़ाव की स्थिति अक्सर बनती है। ऐसी स्थिति में एमएसपी पर खरीदी किसानों के लिए एक सुरक्षा तंत्र का काम करती है। पंजीयन प्रक्रिया समय पर पूरी होने से सरकार और किसान, दोनों के लिए लेन-देन अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनता है।

किसानों के लिए प्रशासन की सलाह

प्रक्रिया शुरू होने के बाद किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने पंजीयन विवरण ध्यान से जांचें। नाम, जमीन से जुड़ी प्रविष्टियां और बैंक खाते की जानकारी सही होना जरूरी है, ताकि खरीदी और भुगतान के दौरान कोई अड़चन न आए। जिन किसानों ने पहले पंजीयन कराया था, उन्हें भी अद्यतन विवरण की पुष्टि करने पर जोर दिया जा रहा है।

खरीदी सीजन के दौरान अंतिम समय में भीड़ बढ़ने से दिक्कतें आती हैं। इसलिए विभागीय स्तर पर भी यही कहा जाता है कि किसान पंजीयन की प्रक्रिया अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना पूरी करें। समय पर रजिस्ट्रेशन होने से खरीदी केंद्रों पर दबाव कम रहता है और किसानों को भी सुविधा मिलती है।

रबी खरीदी प्रबंधन पर असर

चना और मसूर की एमएसपी खरीदी सिर्फ मूल्य समर्थन की योजना नहीं है, बल्कि यह रबी विपणन व्यवस्था का प्रमुख हिस्सा है। पंजीयन डेटा के आधार पर सरकार को यह अनुमान मिलता है कि किस क्षेत्र से कितनी आवक संभावित है। इसी के आधार पर केंद्रों की क्षमता, तौल, भंडारण और परिवहन की रूपरेखा तैयार होती है।

राज्य में दलहन उत्पादन को प्रोत्साहन देने की नीति के लिहाज से भी यह चरण महत्वपूर्ण है। समयबद्ध पंजीयन से खरीदी अभियान की शुरुआत सुचारु रहती है और किसानों का भरोसा बढ़ता है कि उनकी उपज तय व्यवस्था के तहत उठाई जाएगी।

सरकार की यह पहल सीधे तौर पर उन किसानों के लिए अहम है जो अपनी चना और मसूर फसल समर्थन मूल्य पर बेचना चाहते हैं। इसलिए संबंधित किसानों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी काम यही है कि वे पंजीयन प्रक्रिया समय पर पूरी करें और अपने रिकॉर्ड पूरी तरह दुरुस्त रखें।