3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण, भारत में दृश्यता संभव, जानें किन राशियों को मिलेगा लाभ और किसे बरतनी होगी सावधानी

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By Raj RathorePublished On: February 21, 2026
chandra grahan

साल 2026 का पहला सूर्यग्रहण 17 फरवरी को लगा था। उसके करीब 15 दिन बाद, 3 मार्च 2026 को पहला चंद्रग्रहण पड़ने जा रहा है। यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा और होलिका दहन के दिन लगेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को रंगों की होली मनाई जाएगी। वैदिक ज्योतिष में इस ग्रहण के दौरान चंद्रमा को सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में बताया गया है।

ग्रहण का आरंभ दोपहर 2:16 बजे माना गया है। मुख्य प्रभाव दोपहर 3:21 बजे से दिखने की बात कही गई है। शाम 6:46 बजे चंद्रमा ग्रहण से बाहर निकलना शुरू करेगा। ग्रहण की पूर्ण समाप्ति शाम 7:52 बजे मानी गई है। चंद्रग्रहण के साथ सूतक काल को लेकर अलग-अलग पंचांगों में समय का अंतर भी सामने आया है।

सूतक काल पर समय अंतर, किन समयों का उल्लेख

परंपरागत मान्यता में चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक शुरू माना जाता है। इसी आधार पर एक समय सुबह 9:39 बजे से सूतक आरंभ बताया गया है, जो शाम 6:46 बजे तक प्रभावी माना गया। वहीं दूसरी जानकारी में सूतक का आरंभ लगभग सुबह 6:20 बजे भी दिया गया है। ऐसे में ज्यादातर लोग अपने स्थानीय पंचांग, मंदिर या आचार्य के समयानुसार नियम अपनाते हैं।

भारत में दृश्यता को लेकर भी स्पष्ट संकेत हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चंद्रोदय के बाद ग्रहण की स्थिति देखी जा सकेगी। भारत में चंद्रोदय समय लगभग शाम 6:26 बजे दिया गया है। अधिकतम प्रभाव का समय 6:33 से 6:40 बजे के बीच बताया गया है। भारत में ग्रहण समाप्ति का दृश्य समय शाम 6:46 बजे माना गया है।

कहां-कहां दिखेगा ग्रहण

यह चंद्रग्रहण भारत के अलावा एशिया, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका के कई हिस्सों में दिखाई देने की संभावना है। भारत में पूर्वोत्तर राज्यों में प्रभाव अपेक्षाकृत ज्यादा स्पष्ट बताया गया है। अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम में दृश्यता बेहतर रहने की बात है। पश्चिम बंगाल के पूर्वी हिस्सों के साथ कोलकाता, गुवाहाटी, ईटानगर और आइजोल में भी इसे देखा जा सकेगा।

बड़े शहरों में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, लखनऊ और जयपुर का भी उल्लेख किया गया है। चूंकि ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक को मान्य माना जा रहा है। हालांकि व्यावहारिक रूप से शहर और राज्य के हिसाब से दृश्य समय में कुछ मिनटों का अंतर संभव रहता है।

चंद्रग्रहण कैसे लगता है

खगोल विज्ञान के अनुसार चंद्रग्रहण तब बनता है, जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। पूर्ण चंद्रग्रहण में सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीध में आते हैं और चंद्रमा का बड़ा हिस्सा अंधकारमय दिख सकता है। आंशिक चंद्रग्रहण में चंद्रमा का केवल एक भाग छाया में जाता है, इसलिए चंद्रमा कटा हुआ दिखाई देता है।

राशियों पर प्रभाव को लेकर ज्योतिषीय दावे

वैदिक ज्योतिषीय मत के अनुसार धनु, मेष, सिंह, वृषभ और मकर राशि के लिए यह ग्रहण अनुकूल बताया गया है। इस अवधि में आय, साहस और कार्यक्षेत्र में प्रगति के संकेत बताए गए हैं। व्यापार में लाभ, नौकरी में वेतनवृद्धि या पदोन्नति की संभावना भी इसी दावे में शामिल है। यात्रा और सामाजिक प्रतिष्ठा में बढ़त की बात भी कही गई है।

इसी ज्योतिषीय विश्लेषण में कर्क, कुंभ और मीन राशि के लिए सावधानी की सलाह दी गई है। जल्दबाजी में फैसले न लेने, स्वास्थ्य पर ध्यान रखने और मानसिक दबाव से बचने की बात कही गई है। यह सभी बिंदु धार्मिक-ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

ग्रहण के दौरान क्या करें, क्या न करें

धार्मिक मान्यताओं में सूतक के समय पूजा-पाठ रोकने की परंपरा बताई जाती है। कई परिवार पूजा स्थल को ढककर रखते हैं। खाद्य पदार्थों में तुलसी पत्ता डालकर रखने की सलाह भी प्रचलित है। ग्रहण के बाद घर और पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर शुद्धि की परंपरा निभाई जाती है।

मान्यता यह भी है कि सूतक और ग्रहण के दौरान भोजन बनाना या खाना टाला जाए। कुछ परंपराओं में सोना, बाल कटवाना, तेल लगाना, सिलाई-कढ़ाई या तेज धार वाले औजार का उपयोग भी नहीं किया जाता। गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानी की सलाह दी जाती है, जैसे अनावश्यक बाहर न निकलना और सीधे ग्रहण न देखना। वैज्ञानिक दृष्टि से देखने पर चंद्रग्रहण को सुरक्षित खगोलीय घटना माना जाता है, फिर भी लोग अपनी आस्था के अनुसार नियम अपनाते हैं।