अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर महेश्वर में सांस्कृतिक आयोजन की धूम, सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 का हुआ आगाज

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By Raj RathorePublished On: February 21, 2026

मध्य प्रदेश की पवित्र नगरी महेश्वर में सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 की शुरुआत हो गई है। महोत्सव का उद्घाटन ऐतिहासिक नर्मदा तट पर हुआ। शुरुआती सत्र में नर्मदा वंदना के साथ कार्यक्रम आगे बढ़ा। आयोजन स्थल पर स्थानीय नागरिक, कला प्रेमी और पर्यटक मौजूद रहे। शुरुआत से ही माहौल में उत्साह और श्रद्धा की उपस्थिति स्पष्ट दिखी।

यह आयोजन देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती वर्ष के संदर्भ में आयोजित किया गया है। इसी कारण कार्यक्रम का केंद्र केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं रहा। इसे आस्था, परंपरा और इतिहास के संयुक्त मंच के रूप में पेश किया गया। महेश्वर और नर्मदा तट की ऐतिहासिक पहचान इस आयोजन में प्रमुख रूप से सामने आई।

फेस्टिवल के आगाज के दौरान नर्मदा तट पर जुटी भीड़ ने शुरुआत से अंत तक कार्यक्रम में भागीदारी की। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों के साथ विदेश से पहुंचे पर्यटक भी मौजूद रहे। कई कला प्रेमी इस अवसर को देखने महेश्वर पहुंचे। स्थानीय समुदाय की उपस्थिति ने आयोजन को व्यापक सामाजिक स्वरूप दिया।

नर्मदा वंदना से औपचारिक शुरुआत

महोत्सव की शुरुआत नर्मदा वंदना से करना आयोजन की मूल थीम को दर्शाता है। कार्यक्रम के पहले चरण में धार्मिक भावभूमि को प्रमुख स्थान दिया गया। इसके बाद मंचीय क्रम आगे बढ़ा और लोग पूरे समय जुड़े रहे। नर्मदा तट पर हुआ यह आरंभ महेश्वर की परंपरागत पहचान के अनुरूप रहा।

आयोजन के दौरान उपस्थित लोगों ने इसे सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं माना। यह मंच कई लोगों के लिए सांस्कृतिक जुड़ाव का अवसर भी बना। स्थानीय समाज के साथ बाहर से आए लोगों की भागीदारी ने इसे साझा अनुभव में बदला। इसी कारण आरंभिक सत्र को व्यापक प्रतिक्रिया मिली।

अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती वर्ष का संदर्भ

देवी अहिल्याबाई होल्कर का नाम महेश्वर की ऐतिहासिक स्मृति से गहराई से जुड़ा है। 300वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित यह महोत्सव उसी विरासत को रेखांकित करता है। आयोजन में इतिहास को वर्तमान संदर्भ से जोड़ने की स्पष्ट कोशिश दिखी। महेश्वर के घाट, नदी और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि इस संदेश के केंद्र में रहे।

महोत्सव का ढांचा इस तरह रखा गया कि जयंती वर्ष और स्थान की ऐतिहासिकता साथ दिखाई दे। इससे कार्यक्रम का संदेश स्थानीय दायरे से बाहर भी गया। देश-विदेश से आए लोगों की मौजूदगी ने इस संदर्भ को और व्यापक बनाया। महेश्वर ने एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक भूमिका को रेखांकित किया।

देश-विदेश से आए पर्यटक, स्थानीय भागीदारी मजबूत

कार्यक्रम में शामिल लोगों की संरचना विविध रही। स्थानीय निवासी बड़ी संख्या में मौजूद थे। उनके साथ भारत के अन्य शहरों से आए पर्यटक भी तट पर पहुंचे। विदेश से आए आगंतुकों की उपस्थिति ने आयोजन को अंतरराष्ट्रीय ध्यान से भी जोड़ा। कला और संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों ने भी सक्रिय भागीदारी की।

आयोजन स्थल पर यह विविधता लगातार दिखाई दी। इससे स्पष्ट हुआ कि महेश्वर का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आकर्षण कई समूहों को जोड़ता है। नर्मदा तट के ऐतिहासिक संदर्भ ने इस आकर्षण को और मजबूत किया। सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 की शुरुआत इसी साझा उपस्थिति के बीच दर्ज हुई।

आस्था और इतिहास के साझा फ्रेम में महेश्वर

सेक्रेड रिवर फेस्टिवल 2026 का आरंभिक दिन महेश्वर की पहचान के अनुरूप रहा। एक ओर धार्मिक भावभूमि रही, दूसरी ओर इतिहास का संदर्भ लगातार उपस्थित रहा। इसी संयोजन ने कार्यक्रम को अलग स्वरूप दिया। शुरुआत में दिखी भागीदारी से संकेत मिला कि आगे के चरणों में भी लोगों की रुचि बनी रह सकती है।

महोत्सव ने यह भी स्पष्ट किया कि नर्मदा तट पर होने वाले आयोजन केवल औपचारिकता नहीं रहते। वे स्थानीय विरासत को सार्वजनिक संवाद में लाते हैं। अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती वर्ष की पृष्ठभूमि में यह संदेश और स्पष्ट हुआ। महेश्वर में शुरू हुआ यह आयोजन इसी कारण व्यापक महत्व रखता है।