हेमंत कटारे ने फोन बंद की चर्चाओं पर तोड़ी चुप्पी, उपनेता पद छोड़ने के बाद बताई असली वजह

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By Raj RathorePublished On: February 21, 2026

मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय चर्चा तेज हुई, जब कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ा और उसके तुरंत बाद उनका मोबाइल फोन स्विच-ऑफ आने लगा। इस क्रम ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया। अब कटारे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनके फोन न उठाने को किसी राजनीतिक साजिश से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

कटारे भिंड जिले की अटेर विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्होंने कहा कि वे पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हैं और आगे भी कांग्रेस के साथ रहेंगे। उनके बयान से यह स्पष्ट संकेत गया है कि पद छोड़ने के फैसले को पार्टी से दूरी के तौर पर नहीं पढ़ा जाना चाहिए।

फोन बंद रहने पर दी निजी कारण की जानकारी

कटारे ने अपनी पोस्ट में लिखा कि वे अपनी शादी की सालगिरह के मौके पर परिवार के साथ समय बिता रहे थे। उन्होंने इसे अपना मूलभूत और संवैधानिक अधिकार बताया। उनके अनुसार, इस दौरान फोन बंद रहने की सामान्य स्थिति को राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़ना उचित नहीं है।

“कभी-कभी नेता भी इंसान होता है। सोमवार से सदन में पूरी तैयारी, पूरे दस्तावेज और पूरी ताकत के साथ उपस्थित रहूंगा।” — हेमंत कटारे

इस बयान के साथ उन्होंने यह भी कहा कि वे जनविश्वास से ताकत लेते हैं। उनकी पोस्ट में यह संदेश भी था कि राजनीति के बीच निजी जीवन के लिए समय निकालना किसी तरह की राजनीतिक असहमति का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

कांग्रेस से संबंध पर साफ रुख

कटारे ने अपने स्पष्टीकरण में कांग्रेस के साथ अपने संबंध को स्पष्ट शब्दों में रखा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उनके स्वर्गीय पिता की विरासत है और वे पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके इस्तीफे के बाद संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही थीं।

कांग्रेस की ओर से भी पहले यह साफ किया गया था कि कटारे ने केवल उपनेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ा है, पार्टी की सदस्यता नहीं। कटारे के ताजा बयान ने उसी आधिकारिक लाइन की पुष्टि की है और भ्रम की स्थिति को काफी हद तक समाप्त किया है।

अटकलें कैसे शुरू हुईं

घटनाक्रम की शुरुआत कटारे के इस्तीफे से हुई। पद छोड़ने के तुरंत बाद उनका मोबाइल फोन बंद आने लगा। इसी कारण राजनीतिक पर्यवेक्षकों और विपक्ष-समर्थक हलकों में कई तरह के कयास लगाए जाने लगे। चूंकि इस्तीफा एक अहम संसदीय पद से जुड़ा था, इसलिए फोन न मिल पाने की स्थिति को भी राजनीतिक संकेत के रूप में पढ़ा गया।

इसी दौरान पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया की एक सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में रही। उस पोस्ट में पद के साथ मिलने वाले सम्मान और प्रोटोकॉल का जिक्र किया गया था। इस संदर्भ ने भी चल रही बहस को और गति दी। हालांकि, कटारे ने अपने बयान में सीधे तौर पर इन चर्चाओं से दूरी बनाते हुए निजी कारण को ही फोन बंद रहने की वजह बताया।

विधानसभा सत्र पर फोकस

कटारे ने अपने संदेश में सोमवार से सदन में सक्रिय उपस्थिति की बात कही है। उन्होंने कहा कि वे पूरी तैयारी और दस्तावेजों के साथ आएंगे। इसका राजनीतिक अर्थ यह निकाला जा रहा है कि वे विधानसभा की कार्यवाही में विपक्ष की भूमिका निभाते हुए सरकार को मुद्दों पर घेरने की रणनीति बनाए हुए हैं।

उपनेता प्रतिपक्ष का पद छोड़ने के बाद उनकी सक्रियता पर नजर बनी हुई थी। अब उनके बयान से यह संकेत मिला है कि वे संसदीय राजनीति में अपनी भूमिका जारी रखेंगे और पार्टी लाइन पर काम करेंगे। इस स्पष्टीकरण के बाद संगठन और विधायकों के बीच बनी अनिश्चितता भी कम होने की संभावना है।

मौजूदा संदेश क्या बताता है

कटारे का सार्वजनिक रुख तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहला, उन्होंने पद और पार्टी के फर्क को स्पष्ट किया। दूसरा, फोन बंद रहने की वजह निजी बताकर राजनीतिक अर्थ निकालने से मना किया। तीसरा, विधानसभा में वापसी और तैयारी की घोषणा करके उन्होंने सक्रिय राजनीतिक भूमिका का संकेत दिया।

कुल मिलाकर, मौजूदा घटनाक्रम से यह स्पष्ट हुआ है कि इस्तीफा केवल उपनेता प्रतिपक्ष पद से जुड़ा फैसला था, न कि कांग्रेस से दूरी का कदम। उनके सोशल मीडिया संदेश ने पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लगाने का काम किया है और अब फोकस फिर से विधानसभा की कार्यवाही और विपक्ष की रणनीति पर शिफ्ट होता दिख रहा है।