MP Budget 2026 : मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सड़क और परिवहन ढांचे को प्राथमिकता दी है। विधानसभा में डिजिटल बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने रोड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 30,900 करोड़ रुपये का प्रावधान घोषित किया। सरकार का फोकस ग्रामीण संपर्क, जर्जर पुलों के पुनर्निर्माण और शहरों में ट्रैफिक सुधार पर रखा गया है।
बजट दस्तावेज में सड़क नेटवर्क को विस्तार देने के साथ मौजूदा ढांचे के संधारण पर भी खर्च बढ़ाने का प्रस्ताव है। सरकार ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण बसाहटों को मुख्य मार्गों से जोड़ने और औद्योगिक-शहरी आवागमन को सुगम बनाने के लिए अलग-अलग स्तर पर परियोजनाएं चलेंगी।
मजरा-टोला और पीएमजीएसवाई पर जोर
राज्य सरकार ने मजरा-टोला सड़क योजना के तहत उन बसाहटों तक पक्की सड़क पहुंचाने का लक्ष्य दोहराया है, जहां अब तक नियमित सड़क संपर्क नहीं है। इस योजना में 30,900 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत भी नया कार्य कार्यक्रम तय किया गया है। इसमें 1,500 किमी नई सड़कें बनाने और 7,000 किमी सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य रखा गया है। इस हिस्से को ग्रामीण बाजार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच से सीधे जोड़ा गया है।
4,572 करोड़ की योजना
प्रदेश में क्षतिग्रस्त और जर्जर पुलों की स्थिति को देखते हुए 1,766 पुल-पुलियों के पुनर्निर्माण की योजना स्वीकृत की गई है। इसके लिए 4,572 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। चालू वित्तीय वर्ष में इसी मद में 900 करोड़ रुपये खर्च के लिए रखे गए हैं।
सड़कों और पुलों के निर्माण-संधारण के लिए वर्ष 2026-27 में 12,690 करोड़ रुपये का अलग प्रावधान प्रस्तावित है। इससे नए निर्माण के साथ पुराने ढांचे की मरम्मत और क्षमता बढ़ाने का काम एक साथ चलाने की रणनीति सामने आती है।
एलिवेटेड कॉरिडोर और फ्लाईओवर
बजट में बड़े शहरों के ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं का जिक्र किया गया है। भोपाल-संत हिरदाराम नगर कॉरिडोर का निर्माण जारी है। ग्वालियर में स्वर्ण रेखा नदी पर एलिवेटेड कॉरिडोर का काम भी प्रगति पर बताया गया है।
इंदौर और उज्जैन-इंदौर मार्ग से जुड़ी एलिवेटेड परियोजनाओं को भी सूची में रखा गया है। उज्जैन में फोर-लेन एलिवेटेड कॉरिडोर के साथ महाकाल रोपवे का निर्माण कार्य भी जारी है। राज्य सरकार ने इन परियोजनाओं को शहरों में यात्रा समय और जाम के दबाव से जोड़ा है।
चंबल पुल और रेलवे ओवरब्रिज
क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए चंबल नदी पर अटेर-जैतपुर मार्ग में उच्च स्तरीय पुल निर्माणाधीन है। इसके साथ 111 रेलवे ओवरब्रिज पर भी काम चल रहा है। यह पैकेज सड़क सुरक्षा और निर्बाध यातायात के नजरिये से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रेलवे क्रॉसिंग वाले हिस्सों में ओवरब्रिज बनने से रुकावट कम होने और लंबी दूरी के परिवहन को गति मिलने की उम्मीद है। राज्य की कनेक्टिविटी योजना में इसे ग्रामीण-शहरी मार्गों के एकीकरण के हिस्से के रूप में रखा गया है।
रखरखाव पर ध्यान
इस बजट की रूपरेखा में सिर्फ नई सड़कें बनाना ही लक्ष्य नहीं रखा गया, बल्कि पुराने पुलों-सड़कों का पुनर्निर्माण और संधारण भी समान रूप से शामिल है। सरकार ने अलग-अलग मदों में प्रावधान देकर संकेत दिया है कि अगले चरण में नेटवर्क विस्तार और उपयोग क्षमता दोनों को साथ बढ़ाया जाएगा।
बजट में बुनियादी ढांचे के अन्य हिस्सों का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें सिंहस्थ 2028 के लिए 13,851 करोड़ रुपये के प्रावधान की घोषणा अलग से की गई है। कुल मिलाकर 2026-27 का रोडमैप प्रदेश में लंबी अवधि की कनेक्टिविटी परियोजनाओं को तेज करने पर केंद्रित है।











