उत्तर प्रदेश में उद्यम सारथी और नई एमएसएमई नीति से डिजिटल निवेश को मिली रफ्तार

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By Raj RathorePublished On: February 17, 2026
Yogi MSME

उत्तर प्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सेक्टर को डिजिटल सिस्टम के साथ तेज़ी से जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार का फोकस कारोबारी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन और समयबद्ध बनाने पर है। इस रणनीति में उद्यम सारथी जैसे प्लेटफॉर्म, तकनीकी उन्नयन और निवेश उन्मुख नीतियों को एक साथ रखा गया है। सरकार का कहना है कि इन कदमों से एमएसएमई इकाइयों की कार्यक्षमता और बाजार प्रतिस्पर्धा दोनों मजबूत हुई हैं।

प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र को लंबे समय से रोजगार और स्थानीय उत्पादन का प्रमुख आधार माना जाता रहा है। अब इसी क्षेत्र को डिजिटल टूल, ऑनलाइन सेवाओं और नीति आधारित समर्थन के जरिए नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है। कारोबारी अनुमतियों, आवेदन प्रक्रियाओं और विभागीय समन्वय में तकनीक का उपयोग बढ़ने से उद्यम शुरू करने और चलाने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित बताई जा रही है।

उद्यम सारथी और ऑनलाइन सुविधाओं का असर

उद्यम सारथी जैसे प्लेटफॉर्म का उद्देश्य उद्यमियों को एकीकृत डिजिटल मदद उपलब्ध कराना है। ऑनलाइन मॉड्यूल के जरिए जानकारी, आवेदन और ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं एक ही ढांचे में दी जा रही हैं। इससे अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर कम करने में मदद मिलती है और प्रक्रिया की पारदर्शिता भी बढ़ती है। छोटे उद्यमों के लिए यह बदलाव खास तौर पर अहम है, क्योंकि उनके पास सीमित संसाधन होते हैं और समय की लागत सीधे उत्पादन पर असर डालती है।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म आधारित मॉडल से उद्यमियों को नीतिगत जानकारी समय पर मिलने का दायरा भी बढ़ा है। सरकार की विभिन्न औद्योगिक योजनाओं तक पहुंच आसान होने से नए और मौजूदा दोनों प्रकार के कारोबारी लाभ उठा पा रहे हैं। प्रशासनिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण निवेश निर्णयों में देरी कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एमएसएमई चैंपियनशिप और तकनीकी उन्नयन पर जोर

राज्य की रणनीति में एमएसएमई चैंपियनशिप और तकनीकी उन्नयन को प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के अहम उपकरण के रूप में रखा गया है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य इकाइयों को गुणवत्ता, उत्पादकता और बाजार जरूरतों के अनुसार खुद को बेहतर करने की दिशा देना है। तकनीक अपनाने से उत्पादन प्रक्रिया अधिक नियंत्रित होती है और लागत प्रबंधन में भी मदद मिलती है।

तकनीकी उन्नयन के साथ एमएसएमई इकाइयों की आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका मजबूत करने का प्रयास भी शामिल है। छोटे उद्यम जब बेहतर मशीनरी, डिजिटल मॉनिटरिंग और प्रक्रिया सुधार अपनाते हैं, तब वे बड़े औद्योगिक नेटवर्क से अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ पाते हैं। इससे स्थानीय निर्माण इकाइयों के लिए नए अवसर बनते हैं और बाजार में उनकी विश्वसनीयता बढ़ती है।

नई एमएसएमई नीति और प्लग एंड प्ले मॉडल

निवेश को गति देने के लिए नई एमएसएमई नीति को प्लग एंड प्ले मॉडल के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। प्लग एंड प्ले व्यवस्था का मुख्य लाभ यह है कि बुनियादी औद्योगिक संरचना तैयार अवस्था में उपलब्ध कराई जाती है, जिससे इकाई स्थापना में शुरुआती समय और जटिलताएं कम होती हैं। यह मॉडल खासकर उन निवेशकों के लिए उपयोगी माना जाता है जो जल्दी उत्पादन शुरू करना चाहते हैं।

नई नीति का व्यापक उद्देश्य निवेश माहौल को सरल और अनुमानित बनाना है। जब जमीन, ढांचा, प्रक्रियाएं और डिजिटल अनुमतियां समन्वित रूप से मिलती हैं, तब एमएसएमई सेक्टर में नई इकाइयों का प्रवेश अपेक्षाकृत आसान होता है। इससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने और औद्योगिक गतिविधि को क्षेत्रीय रूप से फैलाने में मदद मिलती है।

डिजिटल औद्योगिक ढांचे की ओर यूपी का फोकस

योगी आदित्यनाथ सरकार की औद्योगिक रणनीति में एमएसएमई को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ना केंद्रीय बिंदु के रूप में उभरा है। राज्य सरकार के अनुसार, नीति समर्थन और तकनीकी प्लेटफॉर्म का संयुक्त उपयोग उत्तर प्रदेश को डिजिटल औद्योगिक शक्ति केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। इस मॉडल में पारंपरिक उद्योग प्रोत्साहन को डिजिटल प्रशासन और तेज कारोबारी सेवाओं के साथ जोड़ा गया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, एमएसएमई सेक्टर में प्रक्रियागत सरलता, तकनीकी क्षमता और निवेश सहूलियत एक साथ बढ़ें तो औद्योगिक वृद्धि की गति स्थिर रहती है। उत्तर प्रदेश में इसी समन्वित दृष्टिकोण पर काम होता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में इस ढांचे की प्रभावशीलता का आकलन निवेश प्रवाह, इकाइयों की स्थिरता और बाजार प्रतिस्पर्धा के आधार पर किया जाएगा। फिलहाल, संकेत यही हैं कि राज्य तकनीक-संचालित एमएसएमई इकोसिस्टम को नीति के केंद्र में रखकर आगे बढ़ रहा है।