मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav सोमवार को अशोकनगर जिले के प्रवास पर थे। इस दौरान वे प्रदेश संगठन मंत्री हितानंद शर्मा के पैतृक गांव मढ़ी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने वहां हितानंद शर्मा की माताजी का कुशलक्षेम जाना और उनसे आशीर्वाद लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री का रुख प्रशासनिक व्यवस्थाओं की ओर मुड़ गया। उन्होंने बिना किसी पूर्व सूचना के गांव के सरकारी स्कूल, गौशाला और पंचायत भवन का औचक निरीक्षण शुरू कर दिया।
प्रशासनिक अमले में मचा हड़कंप
जैसे ही मुख्यमंत्री ने पंचायत भवन जाने की इच्छा जताई, वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में वरिष्ठ अधिकारी पंचायत भवन की ओर दौड़े। स्थिति यह थी कि पंचायत भवन में धूल जमी हुई थी और बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां तक नहीं थीं। कर्मचारियों को मोटरसाइकिल पर कुर्सियां लादकर लाते हुए देखा गया। भवन में रोशनी की कमी को दूर करने के लिए तुरंत नए और बड़े बल्ब मंगवाकर लगाए गए। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के पहुंचने से चंद मिनट पहले मेजों पर जमी धूल साफ की।
भ्रष्टाचार पर सीधा सवाल
पंचायत भवन में मुख्यमंत्री ने सरपंच और पंचों के साथ बैठकर गांव के विकास कार्यों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीण पर्वत सिंह कुशवाह से पूछा कि क्या गांव में पुलिस या पटवारी काम के बदले पैसे की मांग करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से उनकी समस्याओं को बेझिझक बताने को कहा।
सरकारी योजनाओं की समीक्षा
निरीक्षण के दौरान ग्रामीण पर्वत सिंह कुशवाह ने मुख्यमंत्री को अपनी व्यक्तिगत समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि उन्हें अभी तक किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल रहा है। इसके अलावा उन्होंने शिकायत की कि उनके परिवार में केवल एक ही महिला को लाडली बहना योजना का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया और मौके पर मौजूद अधिकारियों को तुरंत नाम नोट करने के निर्देश दिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि पात्र हितग्राहियों को जल्द ही योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।
विकास कार्यों की मांग
पंचायत प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के सामने गांव की गौशाला तक सीसी सड़क निर्माण की मांग रखी। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क न होने से बारिश के समय मवेशियों और सेवादारों को काफी परेशानी होती है। मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों का आश्वासन देते हुए कहा कि ग्रामीण विकास उनकी सरकार की प्राथमिकता है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने शासकीय स्कूल की कक्षाओं का ताला खुलवाकर वहां की शैक्षणिक व्यवस्थाओं को भी देखा।
मुख्यमंत्री का यह औचक निरीक्षण शासन की सक्रियता और ग्रामीण स्तर पर जवाबदेही तय करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अचानक हुए इस दौरे ने स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने का कड़ा संदेश दिया है।











