मध्य प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में मंगलवार को 4000 मेगावाट की नई ताप विद्युत परियोजनाओं के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन परियोजनाओं की स्थापना अनूपपुर जिले में की जाएगी, जिससे यह क्षेत्र प्रदेश के नए ‘पावर हब’ के रूप में उभरेगा।
इस पहल से राज्य में लगभग 60,000 करोड़ रुपये का भारी निवेश आने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इससे न केवल प्रदेश की बिजली आपूर्ति मजबूत होगी, बल्कि 8,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। यह निवेश विंध्य क्षेत्र के आर्थिक परिदृश्य को बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
तीन बड़ी कंपनियों को मिली जिम्मेदारी
यह परियोजनाएं ग्रीनफील्ड मॉडल पर आधारित हैं, जिनके लिए टेंडर प्रक्रिया के जरिए तीन प्रमुख कंपनियों का चयन किया गया है। इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी टोरेंट पावर लिमिटेड को मिली है, जो 1600 मेगावाट क्षमता का संयंत्र स्थापित करेगी। इसके अलावा, हिंदुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स और अड़ानी पावर लिमिटेड 800-800 मेगावाट क्षमता की इकाइयां लगाएंगी। शासन की विशेष स्वीकृति से अतिरिक्त 800 मेगावाट क्षमता का प्रावधान भी रखा गया है।
DBFOO मॉडल पर होगा विकास
ये सभी परियोजनाएं ‘डिजाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ओन एंड ऑपरेट’ (DBFOO) मॉडल पर विकसित की जाएंगी। इसके तहत कंपनियां खुद ही संयंत्रों का डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण और संचालन करेंगी। इन परियोजनाओं से वर्ष 2030 तक बिजली का उत्पादन शुरू होने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि भविष्य में उद्योगों के विस्तार और आम उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
मुख्यमंत्री ने इस कदम को प्रदेश की प्रगति यात्रा में एक नया अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि यह निवेश राज्य की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और औद्योगिक विकास को गति देने में मील का पत्थर साबित होगा।











