मुख्यमंत्री मोहन यादव बुधवार को भागीरथपुरा पहुंचे और दूषित पेयजल से प्रभावित लोगों का हाल जानने के लिए अस्पतालों का दौरा किया। उन्होंने एमजीएम कॉलेज में अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें आवश्यक निर्देश दिए। मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि प्रारंभ में हुई लापरवाही के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और सरकार किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी।
एसीएस संजय दुबे पूरे मामले की बारीकी से समीक्षा करेंगे और संबंधित क्षेत्र का दौरा भी करेंगे। मैंने अधिकारियों से कहा है कि शहर के सभी हिस्सों में पानी से जुड़ी शिकायतों की पूरी तरह से जांच की जाए। यह भी सच है कि अफसरों की संख्या पर्याप्त नहीं है, लेकिन हम आवश्यक कर्मचारियों को तैनात करने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण लोग बीमार हुए हैं और विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। अब तक 40,000 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिनमें 2,456 लोगों में रोग के लक्षण पाए गए हैं।
212 मरीज भर्ती, 50 को उपचार के बाद छुट्टी
अब तक 212 मरीज अस्पताल में भर्ती हुए हैं, जबकि 50 मरीजों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। सभी मरीजों के इलाज की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। मुख्यमंत्री वर्मा ने यूनियन अस्पताल और शैल्बी अस्पताल का दौरा कर मरीजों से मुलाकात की। इसके अलावा, उन्होंने एमजीएम मेडिकल कॉलेज में अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि इस तरह की कठिन परिस्थितियाँ भविष्य में दोहराई नहीं जानी चाहिए और यदि अधिकारियों की कमी है तो उसे तुरंत पूरी की जाए।









