MP से तेलंगाना तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी, बिछेगी रेल लाइन, 910 करोड़ रुपए होंगे खर्च

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By Raj RathorePublished On: February 14, 2026
Mhow Balwara Rail Line

Mhow Balwara Rail Line : मध्य प्रदेश में महू-खंडवा ब्रॉडगेज रेल परियोजना के तहत महू से बलवाड़ा तक नई रेल लाइन बिछाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। यह प्रोजेक्ट करीब 910 करोड़ रुपये का है। इससे मध्य प्रदेश से तेलंगाना तक रेल संपर्क मजबूत होगा।

रेलवे ने निर्माण कार्य शुरू करने से पहले वन विभाग के साथ मिलकर पूरे रूट पर सर्वे किया है। इस सर्वे में पाया गया कि वन क्षेत्र में लगभग एक लाख पेड़ रेल लाइन की राह में बाधक बन रहे हैं। इन पेड़ों को काटना अनिवार्य होगा, तभी ट्रैक बिछाने का काम आगे बढ़ सकेगा।

पेड़ों की यह गिनती रेलवे और वन विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से की है। बाधक पेड़ों की सूची तैयार कर ली गई है। इसके बाद वन भूमि के डायवर्जन और पेड़ कटाई की अनुमति के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

महू-खंडवा ब्रॉडगेज प्रोजेक्ट

महू-खंडवा ब्रॉडगेज रेल परियोजना लंबे समय से लंबित है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य इंदौर-महू क्षेत्र को खंडवा और आगे दक्षिण भारत के राज्यों से सीधे जोड़ना है। महू-बलवाड़ा सेक्शन इस पूरे प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है।

यह रेल लाइन बन जाने के बाद मध्य प्रदेश से तेलंगाना तक ट्रेनों का आवागमन काफी आसान हो जाएगा। फिलहाल इस रूट पर यात्रियों को लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ता है। नई लाइन से दूरी और समय दोनों में बड़ी बचत होगी।

पर्यावरणीय चिंताएं भी अहम

एक लाख पेड़ों की कटाई कोई छोटा मसला नहीं है। यह मामला पर्यावरणविदों और स्थानीय समुदायों के लिए चिंता का विषय बन सकता है। रेलवे को वन भूमि के उपयोग के लिए वन संरक्षण अधिनियम के तहत केंद्रीय अनुमति लेनी होगी।

आमतौर पर ऐसे प्रोजेक्ट्स में प्रतिपूरक वनरोपण की शर्त रखी जाती है। यानी जितने पेड़ काटे जाएंगे, उससे कहीं अधिक संख्या में नए पौधे लगाने का प्रावधान होगा। हालांकि अभी तक इस बारे में रेलवे की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा बूस्ट

महू-बलवाड़ा रेल लाइन के बनने से इंदौर डिवीजन की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आएगा। खंडवा जंक्शन पहले से ही मुंबई और दक्षिण भारत के लिए प्रमुख रेल मार्ग पर है। महू से खंडवा जुड़ने के बाद इंदौर और आसपास के शहरों से सीधी ट्रेनें चल सकेंगी।

व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी इससे गति मिलने की उम्मीद है। मालगाड़ियों के लिए भी यह रूट काफी उपयोगी साबित होगा। कृषि उत्पादों और औद्योगिक सामान की ढुलाई में समय और लागत दोनों कम होंगे।

आगे की प्रक्रिया

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक वन भूमि डायवर्जन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बाद ही पेड़ कटाई और ट्रैक निर्माण का काम शुरू हो सकेगा। इस प्रक्रिया में कुछ महीनों का समय लग सकता है।

910 करोड़ रुपये की यह परियोजना मध्य प्रदेश के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। रेलवे का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द सभी अनुमतियां प्राप्त कर निर्माण कार्य शुरू किया जाए।