देवी अहिल्या की नगरी इंदौर में रंगपंचमी का उत्सव पूरे जोश और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। शहर की बहुप्रतीक्षित पारंपरिक गेरों का सिलसिला शुरू हो गया है और सबसे पहले टोरी कॉर्नर से निकली गेर राजवाड़ा पहुंच गई। करीब सवा 11 बजे यह गेर ऐतिहासिक राजवाड़ा चौक पर पहुंची, जहां पहले से मौजूद लोगों ने जोरदार स्वागत किया। गेर में बड़ी संख्या में युवाओं और शहरवासियों ने हिस्सा लिया और पूरे मार्ग पर उत्सव का माहौल बन गया।
ढोल-ताशों की गूंज में झूमते नजर आए युवा
राजवाड़ा पहुंचने के साथ ही माहौल पूरी तरह उत्साह से भर गया। ढोल, ताशों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की तेज गूंज के बीच युवा रंगों में सराबोर होकर थिरकते दिखाई दिए। गेर के साथ चल रहे कलाकारों और युवाओं की टोलियों ने नृत्य और उत्साह से माहौल को और भी जीवंत बना दिया। हर तरफ हंसी, मस्ती और रंगों की बौछारें दिखाई दे रही थीं।
रंग और पानी की फुहारों से बदला नजारा
जैसे-जैसे गेर आगे बढ़ती गई, वैसे-वैसे पूरे इलाके का दृश्य रंगों से भरता चला गया। रंगीन गुलाल हवा में उड़ने लगा और पानी की तेज बौछारों ने माहौल को पूरी तरह सतरंगी बना दिया। आसमान में उड़ते रंगों के बादल ऐसा दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे मानो पूरा शहर रंगों की चादर में लिपट गया हो। गेर के मार्ग पर खड़े लोग भी रंगों में भीगकर इस उत्सव का हिस्सा बनते नजर आए।
मास्क पहनकर शामिल हुए उत्सव में लोग
गेर में भाग लेने आए कई लोग अपने चेहरे पर मास्क लगाए हुए दिखाई दिए। रंगों और पानी की अधिकता के बीच लोगों ने मास्क का उपयोग किया, ताकि रंग सीधे चेहरे या आंखों में न जाएं। इसके बावजूद किसी के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी और सभी लोग पूरे आनंद के साथ इस पारंपरिक आयोजन में शामिल हुए।
पूरा राजवाड़ा इलाका रंगों में सराबोर
जैसे ही टोरी कॉर्नर की गेर राजवाड़ा पहुंची, पूरा क्षेत्र रंगों और गुलाल से भर गया। चारों तरफ उड़ते रंगों के बीच हर व्यक्ति इस उत्सव में डूबा हुआ नजर आया। वहां मौजूद शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति रहा हो जो रंगों और पानी की बौछारों से अछूता रहा हो। इंदौर की यह पारंपरिक गेर एक बार फिर शहर की सांस्कृतिक पहचान और रंगपंचमी की खास परंपरा को जीवंत करती दिखाई दी।










