CM Yogi : गोरखपुर महानगर के बिछिया क्षेत्र में शनिवार को पांचवें कल्याण मंडपम के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शहर विकास के एक संगठित मॉडल के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क चौड़ीकरण और कनेक्टिविटी सुधार के बाद जाम की समस्या में स्पष्ट कमी आई है, जबकि जलनिकासी व्यवस्था के काम पूरे होने के बाद जलभराव पर स्थायी नियंत्रण का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों में ट्रैफिक जाम से कामकाज की गति प्रभावित होती है और इससे जड़ता पैदा होती है। इसी वजह से राज्य सरकार का जोर नगरों को जाममुक्त बनाने पर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में फोरलेन और सिक्सलेन सड़कों का नेटवर्क तेजी से विकसित किया जा रहा है, ताकि यात्रा समय घटे और आर्थिक गतिविधियों को गति मिले।
गोरखपुर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लखनऊ, वाराणसी, देवरिया, बिहार और नेपाल की दिशा में बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध है। उनके अनुसार महानगर को जोड़ने वाली लगभग हर प्रमुख सड़क फोरलेन स्वरूप में विकसित हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि शहर में उर्वरक कारखाना सेवा दे रहा है और उद्योगों की नई संभावनाएं भी बन रही हैं।
जलभराव पर स्थायी समाधान की बात
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में जलभराव की चुनौती का समाधान चरणबद्ध ढंग से किया जा रहा है। उन्होंने गोड़धोइया नाला निर्माण कार्य का जिक्र करते हुए कहा कि इसके पूरा होने के बाद बरसात के दिनों में लंबे समय से महसूस की जा रही समस्या को स्थायी रूप से कम किया जा सकेगा। उन्होंने इसे शहरी बुनियादी ढांचे के उस हिस्से के रूप में रखा, जो नागरिक जीवन की गुणवत्ता पर सीधे असर डालता है।
उन्होंने कहा कि विकास कार्य केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों की भागीदारी से सफल होते हैं। उनके मुताबिक सड़क, जलनिकासी, स्वच्छता और सार्वजनिक ढांचे के रखरखाव में जनसहभागिता लगातार बनी रहे तो शहरों की स्थिति तेजी से बदलती है।
स्वच्छता और पर्यावरण पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में दिल्ली के वायु प्रदूषण का संदर्भ देते हुए गोरखपुरवासियों से पर्यावरण संरक्षण को दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर बड़े शहरों में सामान्य जीवन और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं, इसलिए समय रहते स्थानीय स्तर पर सावधानी जरूरी है।
उन्होंने रामगढ़ताल का उदाहरण देते हुए कहा कि शहर की प्राकृतिक और सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ताल और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न डालें तथा ऐसा करने वालों को भी रोकें। उनके अनुसार स्वच्छता बनाए रखना केवल प्रशासनिक नहीं, सामाजिक अनुशासन का भी विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से अंततः आम नागरिकों को ही असुविधा होती है। इसलिए विकास कार्यों से बने ढांचे की सुरक्षा और उपयोग का जिम्मेदार रवैया जरूरी है।
जनकल्याण, पारदर्शिता और निवेश
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि नीति का केंद्र समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास और सुशासन का वातावरण बनने से निवेश, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की गति बढ़ी है।
उन्होंने गरीब, किसान, महिला और युवा को सरकार की प्राथमिकता बताया। साथ ही सामाजिक सुरक्षा, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में यह भी कहा कि पिछली व्यवस्थाओं में अनियमितताओं के कारण स्वास्थ्य चुनौतियां बढ़ती थीं, जबकि वर्तमान सरकार ने बीमारी की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाए हैं। इंसेफेलाइटिस का नाम लिए बिना उन्होंने दावा किया कि बीमारी को नियंत्रित करने में सफलता मिली है।
कार्यक्रम का समापन नागरिक भागीदारी, स्वच्छता, पर्यावरण और शहर के दीर्घकालिक बुनियादी विकास के संदेश के साथ हुआ। कुल मिलाकर सरकार ने इस आयोजन के जरिए गोरखपुर को कनेक्टिविटी, शहरी सुविधाओं और सार्वजनिक सहयोग आधारित विकास मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया।










