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पहले चरण की 15 सीटें जहां हर बार नई सरकार को मिलता है मौका | 15 seats in the first phase, where every time the new government gets chance

Posted on: 10 Apr 2019 14:15 by Surbhi Bhawsar
पहले चरण की 15 सीटें जहां हर बार नई सरकार को मिलता है मौका | 15 seats in the first phase, where every time the new government gets chance

लोकसभा चुनाव के पहले चरण के चुनाव में केवल एक दिन का समय बाकी है। 11 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के चुनाव में 20 राज्यों की कुल 91 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इससे पहले हम आपको उन 15 सीटों के बारे में बताने जा रहे है जहां जनता हर बार नई सरकार को मौका देती है। इन 15 सीटों पर हर लोकसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर चलती है। हम आपको बताते उन 15 सीटों के बारे में-

अदिलाबाद

तेलंगाना की इस सीट पर 2004 के लोकसभा चुनाव में टीआरएस के सांसद मधुसूदन रेड्डी टकाला ने जीती थी। 2009 के चुनाव में यह सीट टीडीपी के कब्जे में चली गई, टीडीपी के रमेश राठौड़ ने यहां जीत दर्ज की थी। 2014 में टीआरएस के गोदाम नागेश ने इस पर फिर कब्जा कर लिया।

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अल्मोड़ा

उत्तराखंड की इस सीट पर 2004 में भाजपा के सांसद बची सिंह रावत ने अपना कब्ज़ा किया था। 2009 में यह सीट कांग्रेस के प्रदीप तामता ने छीन ली थी। 2014 के चुनाव में भाजपा जे अजय तामता में फिर वापसी कर ली।

अरुणाचल पश्चिम

अरुणाचल प्रदेश की इस सीट पर 2004 में भाजपा के किरेन रिजीजू ने जीत दर्ज की थी। साल 2009 के चुनाव में इसे कांग्रेस के तकाम संजय ने अपने कब्जे में कर लिया। 2014 में फिर इस सीट को भाजपा के किरेन रिजीजू ने अपने कब्जे में ले लिया।

डिब्रूगढ़

असम की इस सीट पर 2004 के लोकसभा चुनाव में असम गण परिषद के सरबानंद सोनेवाल जीतें थे। 2009 में यह कांग्रेस के पबन सिंह घाटोवार के पास चली गई। 2014 में भाजपा के रामेश्वर तेली ने इस पर कब्जा कर लिया।

गढ़वाल

2004 के लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की यह सीट भाजपा के भुवन चंद्र खंडूरी के खाते में चली गई। 2009 में कांग्रेस के सतपाल महाराज ने भाजपा से इसे छीन लिया। 2014 में भाजपा के खंडूरी इसे अपने पास वापस ले लिया।

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हरिद्वार

उत्तराखंड की यह सीट 2004 में सपा के राजेंद्र कुमार के खाते में गई। साल 2009 में इसे कांग्रेस के हरीश रावत ने जीत लिया। 2014 में फिर इस सीट पर भाजपा के रमेश पोखरयाल निशंक ने कब्जा कर लिया।

कैराना

उत्तर प्रदेश की यह सीट 2004 में आरएलडी की अनुराधा चौधरी ने जीती। साल 2009 में इस पर बसपा की तबस्सुम बेगम ने कब्जा जमा लिया। 2014 में यह सीट भाजपा के हुकुम सिंह ने जीत ली।

कालाहांडी

ओडिशा की कालाहांडी लोकसभा सीट 2004 में भाजपा के बिक्रम केशरी देव की झोली में थी। साल 2009 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस के भक्त चरण दास के पास चली गई। 2014 में बीजेडी के अरका केशरी देव ने इस सीट पर अपनी जीत दर्ज कर ली।

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खम्मम

तेलंगाना की यह सीट 2004 में कांग्रेस की रेणुका चौधरी के पास थी। 2009 में यह टीडीपी के नामा नागेश्वर राव ने इसे अपने खाते में डाल लिया। वही 2014 में इस सीट पर वाईएसआरपी के पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने कब्जा कर लिया।

लखीमपुर

असम की यह सीट 2004 के लोकसभा चुनाव में असम गण परिषद के डॉ. अरुण कुमार शर्मा के खाते में थी। 2009 में इस पर कांग्रेस की रानी नाराह ने कब्जा कर लिया। 2014 में भाजपा के सरबानंद सोनेवाल ने इस पर जेट दर्ज की।

लक्षद्वीप

लोकसभा की इस सीट से 2004 में जेडीयू के डॉ. पी. पुकुनिकोया सांसद बने। साल 2009 में कांग्रेस के मो. हमदुल्ला सईद ने इया पर कब्जा जमा लिया। वही 2014 में यह सीट एनसीपी के मो. फैजल पीपी की झोली में गई।

मुजफ्फरनगर

उत्तर प्रदेश की इस लोकसभा सीट पर 2004 के चुनाव में सपा के मुनव्वर हसन ने कब्जा कर लिया था। साल 2009 में इस पर बसपा के कादिर राणा ने जीत दर्ज की। 2014 के चुनाव में इस सीट से भाजपा के डॉ. संजीव कुमार बाल्यान जीतकर सांसद बने।

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सहारनपुर

उत्तर प्रदेश की इस सीट से 2004 में सपा के राशिद मसूद सांसद बने। साल 2009 में यह सीट बसपा के जगदीश सिंह राणा के खाते में चली गई। वही 2014 में यह सीट भाजपा के राघव लखनपाल की झोली में चली गई।

तेजपुर

असम की इस लोकसभा सीट से 2004 में कांग्रेस के मोनी कुमार सुब्बा सांसद बने। साल 2009 में यह असम गण परिषद के जोसेफ टोप्पो के खाते में चली गई। 2014 में भाजपा के राम प्रसाद शर्मा ने इस पर कब्जा कर लिया।

तूरा

मेघालय की इस सीट पर 2004 में एआईटीसी के पीए संगमा ने जीत हासिल की। 2009 में इस सीट पर एनसीपी की अगाथा संगमा ने कब्जा जमा लिया। 2014 में यह सीट एनपीइपी के पीए संगमा के खाते में चली गई।

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