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प्रत्यर्पण का रास्ता साफ, फिर भी भारत नहीं आ सकता विजय माल्या

नई दिल्ली। शराब कारोबारी विजय माल्या को भारत लाने का रास्ता काफी हद तक साफ हो चुका है। दरअसल मीडिया रिपोर्ट की माने तो प्रत्यर्पण से बचने के लिए विजय माल्या की अपील को ब्रिटेन की हाईकोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट से मिले इस झटके बाद उम्मीद लगाई जा रही थी कि अब कुछ ही दिनों में माल्या को भारत लाया जा सकता है क्योंकि उसके पास प्रत्यर्पण से बचने का और कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा है। हालांकि विजय माल्या के प्रत्यर्पण पर यूके हाई कमीशन ने कहा है कि एक और कानूनी मुद्दा सुलझाया जाना अभी बाकी है, जो गोपनीय है। इस लिहाज से अब माल्या के भारत आने के लिए अभी और समय लग सकता है।

विजय माल्या को कब प्रत्यर्पित किया जा सकता है? वाले सवाल पर इस मामले पर करीब से नजर बनाए रखने वाले एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि ‘हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि ब्रिटेन के गृह सचिव ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं या नहीं। जब तक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते हैं या हमें मामले की स्थिति के बारे में सूचित नहीं किया जाता है, तब तक यह अनुमान लगाना मुश्किल होगा कि विजय माल्या को कब प्रत्यर्पित किया जा सकता है।’

जानने वाली बात ये है कि प्रत्यर्पण अधिनियम के मुताबिक विजय माल्या को भारत भेजने को लेकर दस्तावेजों पर ब्रिटेन के गृह कार्यालय सचिव के दस्तखत की अंतिम तारीख 11 जून 2020 है। इस बात की भी अटकलें लगाई जा रही है कि विजय माल्य ब्रिटेन में राजनीतिक शरण मांगे जाने को लेकर आवेदन कर सकता है सूत्रों ने बताया कि न तो केंद्रीय जांच ब्यूरो और न ही प्रवर्तन निदेशालय को ब्रिटेन के गृह कार्यालय से इस संबंध में कोई सूचना मिली है। इतना ही नहीं ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग को भी इसे लेकर कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है।

चूंकि माल्या के पास अब बचने के रास्ते खत्म हो गए है, ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि वह ये दो विकल्पों का सहारा ले सकता है। पहला राजनीतिक शरण और दूसरा यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय का दरवाजा खटखटाना। भारत और ब्रिटेन के बीच हुए समझौते के मुताबिक अगर माल्या को ब्रिटेन में राजनीतिक शरण मिल जाती है तो वह वहां जब तक चाहे रह सकता है।