श्राद्ध में क्यों इन पांच जानवरों को ही दिया जाता हैं महत्व

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14 सितंबर से श्राद्ध पक्ष लग चुुका है माना जाता है कि इन दिनों में पितृ धरती पर आते है और अपने परिजनों द्वारा किए गए श्राद्ध से संतुष्ट होते हैं और इन्हीं के माध्यम से भोजन ग्रहण करते हैं। ज्योतिषियों के अनुसार श्राद्ध के दिनों में जीव के रूप में पितृ धरती पर आते हैं और अपने वंशजों को आशाीर्वाद देते हैं।

माना जाता है कि पितृ पक्ष में किसी भी पशु पक्षी का अनादर नहीं करना चाहिए। घर आए किसी भी जीव को भूखा नहीं लौटाना चाहिए। ऐसा करने से पितृ भूखे ही धरती से लौट जाते है और ऐसे ही भटकते हैं। श्राद्ध पक्ष में पशुओं को बहुत महत्व बताया गया हैं। आइए जानते है कि श्राद्ध में पशु पक्षियों का क्या महत्व माना जाता हैं।

1- शास्त्रों में माना गया है कि पितृ पक्ष में हमारे पितृ पशु-पक्षियों के माध्यम से धरती पर आकर हमें आशीर्वाद देते हैं।

2- जिन जीवों और पशु-पक्षियों के माध्यम से पितृ आहार ग्रहण करते हैं शास्त्रों के अनुसार वे गाय, कुत्ता, कौवा और चींटी हैं।

3- श्राद्ध पक्ष में रोजाना इनके लिए भी आहार का एक अंश निकाला जाता है, तभी श्राद्ध कर्म को पूर्ण माना जाता है।

4- शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध करते समय पितरों को अर्पित करने वाले भोजन के पांच अंश निकाले जाते हैं- गाय, कुत्ता, चींटी, कौवा और देवताओं के लिए। इन पांच अंशों का अर्पण करने को पंचबली कहा जाता है।

इन 5 जीवों को ही क्यो दिया गया श्राद्ध में महत्व

शास्त्रों के अनुसार मनुष्य पांच तत्वों से मिलकर बना है जल, अग्नि, वायू, आकाश, और धरती वहीं जानवरों में कुत्ता जल तत्व का प्रतीक है ,चींटी अग्नि तत्व की, कौवा वायु तत्व का, गाय पृथ्वी तत्व की और देवता आकाश तत्व का प्रतीक है। इस प्रकार इन पांचों को आहार देकर हम पंच तत्वों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। इसलिए श्राद्ध पक्ष में पशु पक्षियों को बहुत महत्व दिया जाता है।

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